मरांग बुरु की अस्मिता और आदिवासी पुरखौती अधिकार की लड़ाई तेज, अंतरराष्ट्रीय धर्म महासम्मेलन की तैयारी पूरी
मरांग बुरु की धार्मिक, सांस्कृतिक और सामाजिक पहचान को अक्षुण्ण रखने तथा आदिवासी संताल समाज के परंपरागत और पुरखौती अधिकारों की रक्षा को लेकर मरांग बुरु बचाओ संघर्ष मोर्चा की महत्वपूर्ण तैयारी बैठक मधुबन स्थित गेस्ट हाउस सभागार में आयोजित की गई।

मरांग बुरु की अस्मिता और आदिवासी पुरखौती अधिकार की लड़ाई तेज, अंतरराष्ट्रीय धर्म महासम्मेलन की तैयारी पूरी
गिरिडीह, मनोज कुमार।
गिरिडीह : मरांग बुरु की धार्मिक, सांस्कृतिक और सामाजिक पहचान को अक्षुण्ण रखने तथा आदिवासी संताल समाज के परंपरागत और पुरखौती अधिकारों की रक्षा को लेकर मरांग बुरु बचाओ संघर्ष मोर्चा की महत्वपूर्ण तैयारी बैठक मधुबन स्थित गेस्ट हाउस सभागार में आयोजित की गई। बैठक में आगामी 04 और 05 नवंबर 2026 को आयोजित होने वाले दो दिवसीय अंतरराष्ट्रीय धर्म महासम्मेलन को सफल बनाने को लेकर विस्तार से चर्चा की गई।

बैठक में निर्णय लिया गया कि प्रस्तावित मरांग धोरोम गाढ़ सम्मेलन के माध्यम से आदिवासी संताल समाज की धर्म-संस्कृति, परंपरा, सामाजिक विधि-विधान और पुरखौती अधिकारों की रक्षा का संदेश मजबूती से रखा जाएगा। साथ ही मरांग बुरु को अक्षुण्ण बनाए रखने और आदिवासी समाज के विधिक एवं संवैधानिक अधिकारों की लड़ाई को आगे बढ़ाने पर भी रणनीति तैयार की गई।
बैठक में सम्मेलन की व्यवस्थाओं, प्रतिनिधियों की भागीदारी और कार्यक्रम को सुचारू रूप से संचालित करने सहित कई महत्वपूर्ण बिंदुओं पर विचार-विमर्श किया गया। आयोजन में झारखंड के विभिन्न जिलों के साथ-साथ ओडिशा, बिहार और असम से भी प्रतिनिधियों के शामिल होने की बात कही गई।

इस अवसर पर मरांग बुरु बचाओ संघर्ष मोर्चा के केंद्रीय पदाधिकारियों एवं विभिन्न क्षेत्रों से आए प्रतिनिधियों में फागू बेसरा, केंद्रीय सचिव हीरालाल मांझी, कोषाध्यक्ष सोमई टुडू, TAC सदस्य जसायं मार्डी, मरांग बुरु धर्म नायके बाबा चंदोलाल टुडू, महावीर मुर्मू, विष्णु किस्कू, सुधीर बास्के, दिलीप मुर्मू, रतिलाल टुडू, आलोक बास्के, बेनीलाल टुडू, डॉ. जगजीवन मुर्मू, महावीर बास्के, महेश मरांडी, एतो बास्के, शुकेज हेम्ब्रम, सुनील मुर्मू, बाबूराम सोरेन, सुरेश हेम्ब्रम, भगवान किस्कू,
सुशांत प्रसाद सोरेन, बिरजू मरांडी, शनिचर बेसरा, अशोक मुर्मू, सुरेश मरांडी, केसी टुडू, रविन्द्र हांसदा, नारायण मुर्मू, प्रभाकर हांसदा, रमेश हेम्ब्रम, अजीत बेसरा, सुरेश मुर्मू, बुधन हेम्ब्रम, अजय हेम्ब्रम, राजेश किस्कू, रूपलाल सोरेन, तुलसी मरांडी, धनीराम मरांडी, अपर्णा हांसदा और शांति देवी समेत बड़ी संख्या में लोग मौजूद रहे।
बैठक में धनबाद, बोकारो, हजारीबाग, रामगढ़, दुमका, जमशेदपुर और कोल्हान के अलावा ओडिशा, बिहार और असम से आए सैकड़ों प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया। सम्मेलन को लेकर प्रतिनिधियों में उत्साह देखा गया और इसे आदिवासी धर्म-संस्कृति एवं अधिकारों की आवाज को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मजबूती देने वाला महत्वपूर्ण आयोजन बताया गया।




