19 hours ago

    किताबों से निकलकर खेतों तक पहुंची पढ़ाई, जी.एम. इंटर महाविद्यालय इचाक के छात्रों ने कृषि अनुसंधान केंद्र में सीखी आधुनिक खेती की बारीकियां

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    19 hours ago

    बिहार के डेयरी किसानों की बढ़ेगी कमाई! जीविका और आगा खान फाउंडेशन ने शुरू किया ‘प्रोजेक्ट धेनु धारा’, 20 हजार किसानों को मिलेगा लाभ

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    19 hours ago

    बिहार के 20 हजार डेयरी किसानों की बढ़ेगी आमदनी! जीविका और आगा खान फाउंडेशन ने शुरू किया ‘प्रोजेक्ट धेनु धारा’

    बिहार के 20 हजार डेयरी किसानों की बढ़ेगी आमदनी! जीविका और आगा खान फाउंडेशन ने शुरू किया ‘प्रोजेक्ट धेनु धारा’…
    19 hours ago

    माननीय मंत्री श्रीमती लेशी सिंह ने की पटना एवं नालंदा जिले में विभाग की विद्युत योजनाओं की समीक्षा

    माननीय मंत्री श्रीमती लेशी सिंह ने की पटना एवं नालंदा जिले में विभाग की विद्युत योजनाओं की समीक्षा पटना :…
    19 hours ago

    बिहार पुलिस में Gender Responsive Policing पर बड़ा प्रशिक्षण कार्यक्रम, महिला-बालिकाओं से जुड़े मामलों में संवेदनशील पुलिसिंग पर जोर पटना: बिहार पुलिस मुख्यालय स्थित सरदार पटेल भवन सभागार में 6 अक्टूबर 2026 को Gender Responsive Policing यानी जेंडर रिस्पॉन्सिव पुलिसिंग विषय पर एक दिवसीय क्षमता संवर्द्धन कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य पुलिस पदाधिकारियों को लैंगिक संवेदनशीलता के प्रति जागरूक करने के साथ-साथ महिलाओं, बालिकाओं और ट्रांसजेंडर से जुड़े मामलों में संवेदनशील, प्रभावी और उत्तरदायी पुलिसिंग के लिए आवश्यक क्षमताओं को मजबूत करना रहा। महिलाओं और बालिकाओं से जुड़े मामलों में संवेदनशील पुलिसिंग पर फोकस कार्यक्रम के दौरान पुलिस व्यवस्था में जेंडर संवेदनशीलता को मजबूत करने, जेंडर आधारित मुद्दों को समझने और ऐसे मामलों में पुलिस की भूमिका को अधिक प्रभावी बनाने पर विस्तार से चर्चा हुई। विशेष रूप से महिलाओं और बालिकाओं से संबंधित शिकायतों एवं मामलों में पीड़ित केंद्रित, निष्पक्ष और संवेदनशील दृष्टिकोण अपनाने की आवश्यकता पर जोर दिया गया। कार्यक्रम का उद्घाटन श्रीमती के. सुहिता अनुपम, अपर पुलिस महानिदेशक, कमजोर वर्ग, अपराध अनुसंधान विभाग, बिहार, पटना ने दीप प्रज्ज्वलित कर किया। इस अवसर पर श्री ख्वाजा सादत नूर, राज्य कार्यालय प्रमुख, बिहार UNFPA, श्रीमती गरिमा, पुलिस अधीक्षक, कमजोर वर्ग, डॉ. आयुषी दुबे, निदेशक, जेंडर रिसोर्स सेंटर, CNLU, डॉ. अमित जैन, सहायक प्राध्यापक, CNLU तथा सुश्री अंचल गुप्ता, अधिवक्ता, इलाहाबाद उच्च न्यायालय, लखनऊ खंडपीठ सहित अन्य अतिथि और पुलिस पदाधिकारी मौजूद रहे। स्वागत भाषण से हुई कार्यक्रम की शुरुआत कार्यक्रम की शुरुआत श्रीमती गरिमा, पुलिस अधीक्षक, कमजोर वर्ग के स्वागत भाषण से हुई। उन्होंने कार्यक्रम में शामिल अतिथियों और पुलिस पदाधिकारियों का स्वागत किया तथा जेंडर रिस्पॉन्सिव पुलिसिंग की आवश्यकता और प्रशिक्षण के महत्व पर प्रकाश डाला। इसके बाद कार्यक्रम की मुख्य अतिथि श्रीमती के. सुहिता अनुपम, अपर पुलिस महानिदेशक, कमजोर वर्ग, अपराध अनुसंधान विभाग, बिहार, पटना ने उद्घाटन संबोधन दिया। उन्होंने पुलिस व्यवस्था में लैंगिक संवेदनशीलता को मजबूत करने की आवश्यकता पर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने पुलिस पदाधिकारियों से महिलाओं और बालिकाओं से संबंधित शिकायतों तथा मामलों में संवेदनशील, निष्पक्ष और पीड़ित केंद्रित दृष्टिकोण अपनाने का आह्वान किया। उन्होंने जेंडर से जुड़े मामलों की प्रकृति को समझते हुए पुलिस की कार्रवाई को अधिक प्रभावी और संवेदनशील बनाए जाने पर जोर दिया। UNFPA और चाणक्या विधि विश्वविद्यालय के विशेषज्ञों ने रखे विचार कार्यक्रम को श्री ख्वाजा सादत नूर, राज्य कार्यालय प्रमुख, UNFPA बिहार तथा डॉ. अमित जैन, सहायक प्राध्यापक, चाणक्या विधि विश्वविद्यालय, पटना ने भी संबोधित किया। वक्ताओं ने जेंडर आधारित हिंसा और भेदभाव की रोकथाम के साथ पुलिसिंग व्यवस्था में जेंडर संवेदनशीलता को संस्थागत रूप से मजबूत करने की जरूरत पर चर्चा की। प्रशिक्षण के दौरान यह समझ विकसित करने पर जोर दिया गया कि जेंडर आधारित मामलों में पुलिस की प्रतिक्रिया केवल कानूनी प्रक्रिया तक सीमित न रहकर संवेदनशील और पीड़ित केंद्रित भी होनी चाहिए। विशेषज्ञों ने पुलिस पदाधिकारियों को दी व्यावहारिक जानकारी कार्यक्रम में विषय विशेषज्ञ और रिसोर्स पर्सन्स के रूप में डॉ. अमित जैन, श्री अंकित मैकवान और सुश्री अंचल गुप्ता ने विभिन्न विषयों पर प्रशिक्षण दिया। विशेषज्ञों ने पुलिस पदाधिकारियों को जेंडर रिस्पॉन्सिव पुलिसिंग से जुड़े महत्वपूर्ण पहलुओं के साथ व्यावहारिक जानकारी भी उपलब्ध कराई। प्रशिक्षण सत्रों में जेंडर संवेदनशील पुलिसिंग, महिलाओं से संबंधित कानून और प्रक्रियाएं, पुलिस की भूमिका तथा महिलाओं से जुड़े मामलों में संवेदनशील और प्रभावी प्रतिक्रिया जैसे विषयों पर विस्तार से चर्चा की गई। इन सत्रों का उद्देश्य पुलिस पदाधिकारियों को जेंडर आधारित मामलों की संवेदनशीलता को समझने, कानूनी एवं प्रक्रियात्मक पहलुओं पर बेहतर पकड़ बनाने और अपने कार्यक्षेत्र में अधिक प्रभावी तरीके से कार्रवाई करने के लिए तैयार करना रहा। सभी जिलों के महिला थानों के SHOs ने लिया हिस्सा इस एक दिवसीय क्षमता संवर्द्धन कार्यक्रम में बिहार के सभी जिलों के महिला थानों के थानाध्यक्ष यानी SHOs ने हिस्सा लिया। इसके अलावा प्रत्येक जिले से एक-एक महिला पुलिस पदाधिकारी भी कार्यक्रम में शामिल हुईं। कार्यक्रम के माध्यम से राज्यभर में पुलिस पदाधिकारियों की जेंडर संबंधी समझ को मजबूत करने और पेशेवर क्षमता में वृद्धि करने का प्रयास किया गया। खासतौर पर महिलाओं, बालिकाओं और ट्रांसजेंडर से संबंधित मामलों में पुलिसिंग को अधिक संवेदनशील, उत्तरदायी और प्रभावी बनाने को कार्यक्रम का महत्वपूर्ण उद्देश्य बताया गया। प्रशिक्षण के अनुभवों को कार्यक्षेत्र में लागू करने की प्रतिबद्धता कार्यक्रम के दौरान मौजूद पुलिस पदाधिकारियों ने जेंडर रिस्पॉन्सिव पुलिसिंग से जुड़े विषयों पर अपने अनुभव भी साझा किए। प्रशिक्षण में सामने आए विभिन्न पहलुओं पर चर्चा करते हुए पुलिस पदाधिकारियों ने प्रशिक्षण के माध्यम से प्राप्त ज्ञान और समझ को अपने-अपने कार्यक्षेत्र में लागू करने की प्रतिबद्धता व्यक्त की। बिहार पुलिस मुख्यालय में आयोजित यह क्षमता संवर्द्धन कार्यक्रम पुलिस व्यवस्था में जेंडर संवेदनशीलता को मजबूत करने की दिशा में प्रशिक्षण आधारित पहल के रूप में सामने आया। इसका फोकस महिलाओं, बालिकाओं और ट्रांसजेंडर से संबंधित मामलों में पुलिस की भूमिका को अधिक संवेदनशील, प्रभावी और उत्तरदायी बनाने पर रहा।

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    19 hours ago

    अमृत नगर के शिव मंदिर में सांसद ने निजी खर्च से सौंपा इनवर्टर

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