119 नामांकन, 24 उपस्थिति: दानोखूंटा स्कूल में हाजिरी बनाकर गायब रहते हैं शिक्षक, कई दिनों से बंद है मध्यान भोजन l
तिसरी प्रखंड के उत्क्रमित मध्य विद्यालय दानोखूंटा में शिक्षा व्यवस्था भगवान भरोसे चल रही है। विद्यालय में कुल 119 बच्चों का नामांकन है, लेकिन उपस्थित महज 24 बच्चे। विद्यालय में तीन शिक्षक पदस्थापित हैं, लेकिन उपस्थित सिर्फ एक शिक्षक; जिसे लेकर उक्त विद्यालय की पढ़ाई की स्थिति बेहद खराब बताई जा रही है।

119 नामांकन, 24 उपस्थिति: दानोखूंटा स्कूल में हाजिरी बनाकर गायब रहते हैं शिक्षक, कई दिनों से बंद है मध्यान भोजन l
तिसरी, गिरिडीह, मनोज कुमार।
गिरिडीह : तिसरी प्रखंड के उत्क्रमित मध्य विद्यालय दानोखूंटा में शिक्षा व्यवस्था भगवान भरोसे चल रही है। विद्यालय में कुल 119 बच्चों का नामांकन है, लेकिन उपस्थित महज 24 बच्चे। विद्यालय में तीन शिक्षक पदस्थापित हैं, लेकिन उपस्थित सिर्फ एक शिक्षक; जिसे लेकर उक्त विद्यालय की पढ़ाई की स्थिति बेहद खराब बताई जा रही है।
बता दें ग्रामीणों से लगातार जा रहे आरोपों की पुष्टि करने शुक्रवार की सुबह मीडियाकर्मी उक्त विद्यालय पहुंचे तो विद्यालय के सचिव राकेश कुमार विभागीय बैठक में गए हुए थे। वहीं एक शिक्षक बच्चों को पढ़ा रहे थे, जबकि शिक्षक तालो हांसदा, जो स्थानीय मुखिया के पति भी हैं, हाजिरी बनाने के बाद विद्यालय से अनुपस्थित थे। इन सभी बातों को लेकर जब स्थानीय ग्रामीणों और छात्रों से बात किया गय तो उनका आरोप था कि तालो हांसदा अक्सर विद्यालय में हाजिरी बनाकर अन्य कार्यों में निकल जाते हैं।

बच्चों को भोजन नहीं, थमाया जा रहा बिस्किट
विद्यालय की छात्राओं ने बताया कि स्कूल में नियमित रूप से पढ़ाई नहीं होती। तीन शिक्षक होने के बावजूद कक्षाएं सुचारू रूप से संचालित नहीं की जाती हैं। छात्राओं ने यह भी आरोप लगाया कि कई दिनों से मध्यान भोजन बंद है और भोजन के बदले बच्चों को केवल बिस्किट का पैकेट देकर औपचारिकता पूरी की जा रही है। साथ ही उन्होंने कहा कि कई बार तो बिना छुट्टी के ही विद्यालय बंद रहता है।

शिक्षकों की लापरवाही से घट रही उपस्थिति
स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि शिक्षकों की गैरजिम्मेदारी के कारण विद्यालय की शिक्षा व्यवस्था लगातार खराब होती जा रही है। बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा नहीं मिलने से कई अभिभावक अपने बच्चों को करीब चार किलोमीटर दूर लोकाय स्थित सरकारी विद्यालय में पढ़ने भेजने को मजबूर हैं। ग्रामीणों ने शिक्षा विभाग के वरीय अधिकारियों से मामले की जांच कर व्यवस्था में सुधार की मांग की है।
मौजूद शिक्षक ने भी स्वीकार की अनियमितता
विद्यालय में मौजूद शिक्षक ने भी माना कि स्कूल में कई तरह की समस्याएं हैं। उन्होंने स्वीकार किया कि मध्यान भोजन कई दिनों से बंद है और शिक्षक तालो हांसदा के नियमित रूप से विद्यालय में नहीं रहने की शिकायतें भी सही हैं। उन्होंने बताया कि गर्मी छुट्टी से पहले बच्चों की संख्या ठीक ठाक रहती थी, मगर इधर से कम है।

मुखिया के काम से विद्यालय छोड़ने की बात स्वीकार
इधर विद्यालय में पत्रकारों के पहुंचने की जानकारी मिलने के बाद स्थानीय मुखिया पति सह शिक्षक तालो हांसदा भी विद्यालय पहुंचे। जिसके बाद उनसे अनुपस्थिति के बारे में पूछा गया तो उन्होंने कहा कि मुखिया को कई बार विभिन्न कार्यों के लिए उनकी जरूरत पड़ती है, जिसके कारण उन्हें विद्यालय छोड़कर जाना पड़ता है। उनका यह बयान विद्यालय में उनकी अनुपस्थिति को लेकर उठ रहे सवालों को और मजबूत करता है।

सचिव ने बैठक में होने की बात कही
मामले की जानकारी लेने के लिए विद्यालय के सचिव राकेश कुमार से फोन पर संपर्क किया गया। उन्होंने विभागीय बैठक में होने की बात कही। हालांकि बाद में दोबारा संपर्क करने का प्रयास किया गया, लेकिन उन्होंने फोन रिसीव नहीं किया।
शिक्षा विभाग पर उठे सवाल
विद्यालय में नामांकित 119 बच्चों में से केवल 24 की उपस्थिति, मध्यान भोजन का बंद होना और शिक्षकों की अनियमित उपस्थिति शिक्षा विभाग की निगरानी व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करती है। सवाल यह है कि आखिर विभागीय अधिकारी ऐसे विद्यालयों पर कब तक आंखें मूंदे रहेंगे और बच्चों के भविष्य के साथ हो रहे इस खिलवाड़ पर कब कार्रवाई होगी। ग्रामीणों ने दोषी शिक्षकों पर कार्रवाई और विद्यालय की व्यवस्था में तत्काल सुधार की मांग की है।





