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बिहार में स्थापित होगी सरदार पटेल की सबसे ऊंची प्रतिमा, CM सम्राट चौधरी का बड़ा ऐलान; 2030 तक 1 करोड़ लोगों को रोजगार देने का लक्ष्य

बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने राष्ट्रीय एकता दिवस के अवसर पर राज्य के लोगों के लिए कई बड़े ऐलान किए हैं। उन्होंने घोषणा की कि बिहार में लौह पुरुष भारत रत्न सरदार वल्लभभाई पटेल की अब तक की सबसे ऊंची प्रतिमा स्थापित की जाएगी।

बिहार में स्थापित होगी सरदार पटेल की सबसे ऊंची प्रतिमा, CM सम्राट चौधरी का बड़ा ऐलान; 2030 तक 1 करोड़ लोगों को रोजगार देने का लक्ष्य

Bihar News: बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने राष्ट्रीय एकता दिवस के अवसर पर राज्य के लोगों के लिए कई बड़े ऐलान किए हैं। उन्होंने घोषणा की कि बिहार में लौह पुरुष भारत रत्न सरदार वल्लभभाई पटेल की अब तक की सबसे ऊंची प्रतिमा स्थापित की जाएगी। इसके साथ ही मुख्यमंत्री ने वर्ष 2030 तक राज्य में एक करोड़ लोगों को नौकरी और रोजगार उपलब्ध कराने तथा नवंबर 2030 तक एक करोड़ परिवारों को उद्योग जगत से जोड़ने का लक्ष्य भी दोहराया। मुख्यमंत्री ने कहा कि बिहार में उद्योगों का विस्तार इस तरह किया जा रहा है कि युवाओं को रोजगार और जीविकोपार्जन के लिए मजबूरी में दूसरे राज्यों का रुख न करना पड़े। इसके अलावा अगले चार वर्षों में बिहार की स्वास्थ्य व्यवस्था को देश की सर्वश्रेष्ठ स्वास्थ्य व्यवस्थाओं में शामिल करने का भी लक्ष्य निर्धारित किया गया है।

बिहार में बनेगी सरदार वल्लभभाई पटेल की सबसे ऊंची प्रतिमा

पटना में 31 अक्टूबर 2026 को भारत रत्न लौह पुरुष सरदार वल्लभभाई पटेल की 151वीं जयंती के अवसर पर राष्ट्रीय एकता दिवस समारोह का आयोजन किया गया। साझी विरासत अभियान की ओर से सम्राट अशोक कन्वेंशन केंद्र परिसर स्थित बापू सभागार में आयोजित इस कार्यक्रम में मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी शामिल हुए।

इस दौरान मुख्यमंत्री ने सरदार वल्लभभाई पटेल के तैलचित्र पर माल्यार्पण कर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि सरदार पटेल आधुनिक भारत के शिल्पकार, राष्ट्रीय एकता के महान प्रतीक और अखंड भारत के निर्माता थे।

मुख्यमंत्री ने कहा कि सरदार पटेल देश के सबसे मजबूत गृह मंत्रियों में से एक थे। उन्होंने 567 रियासतों का भारत में विलय कर देश की एकता और अखंडता को मजबूत किया था। कश्मीर से कन्याकुमारी तक भारत को एक सूत्र में पिरोने में उनकी ऐतिहासिक भूमिका रही। यदि सरदार पटेल नहीं होते तो आज भारत का स्वरूप इतना विशाल और एकीकृत नहीं होता।

इसी क्रम में मुख्यमंत्री ने बड़ा ऐलान करते हुए कहा कि बिहार में लौह पुरुष सरदार वल्लभभाई पटेल की सबसे ऊंची प्रतिमा स्थापित की जाएगी। उन्होंने स्पष्ट किया कि बिहार में अब तक स्थापित महापुरुषों की प्रतिमाओं में सरदार पटेल की प्रतिमा सबसे बड़ी होगी।

2047 तक विकसित भारत बनाने के लिए हो रहा काम: सम्राट चौधरी

मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत को वर्ष 2047 तक विकसित और आर्थिक रूप से सशक्त राष्ट्र बनाने के लिए लगातार काम किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने सरदार पटेल के सपनों को साकार करने की दिशा में महत्वपूर्ण योगदान दिया है।

मुख्यमंत्री ने पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के 20 वर्षों के कार्यकाल का उल्लेख करते हुए कहा कि उन्होंने बिहार को विकसित बनाने के लिए काफी काम किया है। उनसे बिहार के विकास को आगे बढ़ाने की सीख मिली है। वर्तमान सरकार उनके विकास कार्यों को आगे बढ़ाने और उनके सपनों को पूरा करने की दिशा में काम कर रही है।

उन्होंने कहा कि देश और बिहार को आर्थिक रूप से मजबूत बनाने के लिए सरकार प्रतिबद्ध है। जनता के आशीर्वाद से ही राज्य और देश की अर्थव्यवस्था को नई ऊंचाई तक पहुंचाया जा सकता है।

कभी सोने की चिड़िया था भारत, पाटलिपुत्र की थी अलग पहचान

अपने संबोधन में मुख्यमंत्री ने भारत के ऐतिहासिक गौरव का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि करीब ढाई हजार वर्ष पहले भारत को सोने की चिड़िया कहा जाता था। उस दौर में पाटलिपुत्र आर्थिक और सांस्कृतिक रूप से बेहद समृद्ध था। विदेशी आक्रांताओं ने भारत की इस समृद्धि को काफी नुकसान पहुंचाया।

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ‘मेक इन इंडिया’ अभियान के माध्यम से देश को मजबूत बनाने की दिशा में काम कर रहे हैं। उन्होंने इस अभियान के जरिए भारत को सोने का शेर बनाने की बात कही, जो पूरी दुनिया में अपनी ताकत का एहसास कराएगा।

उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में जनता ही सर्वोपरि है। जनता के आशीर्वाद से ही देश और राज्य की आर्थिक व्यवस्था को मजबूत बनाने का काम किया जा रहा है।

2030 तक बिहार में एक करोड़ लोगों को नौकरी और रोजगार देने का लक्ष्य

मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने बिहार में रोजगार और नौकरी के अवसर बढ़ाने को सरकार की प्राथमिकता बताया। उन्होंने कहा कि वर्ष 2005 में जनता के आशीर्वाद से बिहार में एनडीए की सरकार बनने के बाद राज्य का परिदृश्य बदला है।

गांव-गांव तक सड़क, बिजली और पेयजल जैसी बुनियादी सुविधाएं पहुंचाई गई हैं। पिछले 20 वर्षों में बिहार की अर्थव्यवस्था और आधारभूत संरचना को मजबूत करने के लिए व्यापक स्तर पर काम हुआ है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि अब सरकार का लक्ष्य वर्ष 2030 तक बिहार में एक करोड़ लोगों को नौकरी और रोजगार उपलब्ध कराना है। इस लक्ष्य को पूरा करने के लिए विभिन्न क्षेत्रों में तेजी से काम किया जा रहा है।

बिहार में उद्योगों का जाल बिछाने की तैयारी, युवाओं को नहीं जाना पड़ेगा बाहर

मुख्यमंत्री ने बिहार के युवाओं के पलायन और रोजगार की समस्या पर भी अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि बिहार के युवा अच्छी पढ़ाई और बेहतर नौकरी के लिए देश-दुनिया में कहीं भी जाएं, लेकिन किसी को भी मजबूरी में रोजगार या जीविकोपार्जन के लिए बिहार से बाहर नहीं जाना पड़े।

इसी उद्देश्य से राज्य में उद्योगों का विस्तार किया जा रहा है। औद्योगिक कॉरिडोर विकसित किए जा रहे हैं। इसके साथ ही सोलर प्लांट, थर्मल प्लांट और खाद्य प्रसंस्करण उद्योगों की स्थापना की दिशा में तेजी से काम किया जा रहा है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि बिहार की लगभग 14 करोड़ की आबादी में युवाओं की बड़ी भागीदारी राज्य की सबसे बड़ी ताकत है। इस युवा शक्ति को रोजगार और उद्योगों से जोड़कर बिहार की अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाया जा सकता है।

नवंबर 2030 तक एक करोड़ परिवारों को उद्योग जगत से जोड़ने का लक्ष्य

मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने रोजगार के साथ परिवारों को आर्थिक गतिविधियों से जोड़ने का भी लक्ष्य सामने रखा। उन्होंने कहा कि नवंबर 2030 तक बिहार के एक करोड़ परिवारों को उद्योग जगत से जोड़ने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।

सरकार का प्रयास है कि राज्य के परिवारों को उद्योग, स्वरोजगार और आर्थिक गतिविधियों से जोड़कर उनकी आमदनी के अवसर बढ़ाए जाएं। इसके लिए औद्योगिक कॉरिडोर, ऊर्जा परियोजनाओं और खाद्य प्रसंस्करण उद्योगों को बढ़ावा दिया जा रहा है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि जो राज्य अपनी कमजोरियों को ताकत में बदलने की क्षमता रखता है, वही विकास की राह पर तेजी से आगे बढ़ता है। बिहार भी अपनी युवा आबादी और उपलब्ध संसाधनों के दम पर विकास की नई संभावनाएं तैयार कर रहा है।

नक्सलवाद खत्म करने के संकल्प का किया जिक्र, अमित शाह की तारीफ

अपने संबोधन में मुख्यमंत्री ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के नक्सलवाद के खिलाफ अभियान का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि अमित शाह ने देश को नक्सलवाद से मुक्त करने का संकल्प लिया था और 31 मार्च 2026 तक इस लक्ष्य को पूरा करने की समयसीमा निर्धारित की थी।

मुख्यमंत्री ने कहा कि केंद्रीय गृह मंत्री ने अपने संकल्प को पूरा करके दिखाया। इसी तरह बिहार सरकार भी संकल्प और प्रतिबद्धता के साथ अपने निर्धारित लक्ष्यों को पूरा करने में विश्वास रखती है।

उन्होंने कहा कि राज्य के विकास के लिए केवल घोषणाएं करना पर्याप्त नहीं है, बल्कि निर्धारित लक्ष्यों को पूरा करने के लिए लगातार प्रयास करना जरूरी है।

अगले चार वर्षों में बिहार की स्वास्थ्य व्यवस्था को देश में सर्वश्रेष्ठ बनाने का लक्ष्य

मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने स्वास्थ्य क्षेत्र में सुधार को लेकर भी बड़ा लक्ष्य बताया। उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य मंत्री निशांत कुमार इस क्षेत्र में बेहतर काम कर रहे हैं। आने वाले चार वर्षों में बिहार की स्वास्थ्य व्यवस्था को देश की सबसे अच्छी स्वास्थ्य व्यवस्थाओं में शामिल करने का लक्ष्य है।

उन्होंने बताया कि जिला और अनुमंडल अस्पतालों में स्वास्थ्य सुविधाओं को मजबूत करने की दिशा में काम किया जा रहा है। सरकार का प्रयास है कि मरीजों को अनावश्यक रूप से बड़े अस्पतालों में रेफर न करना पड़े।

मुख्यमंत्री ने कहा कि यदि कोई डॉक्टर बिना उचित कारण के किसी मरीज को बड़े अस्पताल में रेफर करता है तो उसे इसका कारण बताना होगा। इसके अलावा जिला अस्पतालों में 52 प्रकार के ऑपरेशन की व्यवस्था उपलब्ध कराई गई है।

सरकार की कोशिश है कि मरीजों को उनके जिले और अनुमंडल स्तर पर ही बेहतर इलाज की सुविधा मिले, ताकि उन्हें छोटी-छोटी स्वास्थ्य समस्याओं के लिए बड़े अस्पतालों का चक्कर न लगाना पड़े।

सरदार पटेल को बताया भारत की एकता का सबसे बड़ा प्रतीक

मुख्यमंत्री ने सरदार वल्लभभाई पटेल के योगदान को याद करते हुए कहा कि वह भारत के निर्माता और महान महापुरुषों में से एक थे। उन्होंने देश को एकजुट करने के लिए ऐतिहासिक कार्य किया। उनकी दूरदर्शिता और मजबूत नेतृत्व ने भारत की एकता और अखंडता को नई मजबूती प्रदान की।

मुख्यमंत्री ने कहा कि सरदार पटेल की सबसे ऊंची प्रतिमा स्थापित करना उनके प्रति सम्मान और नई पीढ़ी को उनके योगदान से परिचित कराने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम होगा। उन्होंने राष्ट्रीय एकता दिवस समारोह के आयोजकों को बधाई और शुभकामनाएं भी दीं।

समारोह में कई मंत्री, विधायक और जनप्रतिनिधि रहे मौजूद

राष्ट्रीय एकता दिवस के इस कार्यक्रम को स्वास्थ्य मंत्री निशांत कुमार ने भी संबोधित किया। समारोह के आयोजक मंडल की ओर से मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी को पुष्पगुच्छ, अंगवस्त्र और प्रतीक चिह्न भेंट कर सम्मानित किया गया। इस दौरान उन्हें पुष्पमाला पहनाकर स्वागत भी किया गया।

कार्यक्रम में सहकारिता मंत्री राम कृपाल यादव, योजना एवं विकास मंत्री भगवान सिंह कुशवाहा, कला एवं संस्कृति मंत्री डॉ. प्रमोद कुमार, विज्ञान, प्रावैधिकी एवं तकनीकी शिक्षा मंत्री शीला कुमारी मौजूद रहीं।

इसके अलावा विधायक उपेंद्र प्रसाद, विधायक अश्वमेघ देवी, विधायक रत्नेश कुमार, विधायक अरुण माझी, विधान पार्षद संजय कुमार सिंह उर्फ गांधी जी, बिहार राज्य किसान आयोग के अध्यक्ष रूपनारायण मेहता सहित अन्य जनप्रतिनिधि, आयोजक मंडल के सदस्य और बड़ी संख्या में आम लोग भी उपस्थित रहे।

कुल मिलाकर, राष्ट्रीय एकता दिवस के मंच से मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने बिहार के विकास को लेकर तीन प्रमुख प्राथमिकताएं सामने रखीं। इनमें सरदार पटेल की सबसे ऊंची प्रतिमा की स्थापना, वर्ष 2030 तक एक करोड़ लोगों को रोजगार और एक करोड़ परिवारों को उद्योग जगत से जोड़ना तथा अगले चार वर्षों में स्वास्थ्य व्यवस्था को देश की सर्वश्रेष्ठ व्यवस्थाओं में शामिल करना शामिल है। अब इन घोषणाओं को जमीन पर उतारना बिहार सरकार के सामने सबसे बड़ी चुनौती और जिम्मेदारी होगी।

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