वीर विप्लवी शहिद खुदीराम बोस के 118 वीं पुण्यतिथि पर टीम पीएसएफ का एसडीपी रक्तदान अभियान।
एक समय था जब खुदीराम बोस जैसे देशप्रेमियों के द्वारा अंग्रेजों से लोहा लिया गया था. और सिर्फ 18 वर्ष 8 महीने 11 वां दिन, हंसते हुए देश के लिए फांसी को गले लगाकर शहीद हुए, और शहीद होते हुए देश के लिए उनका अंतिम शब्द था " बन्दे मातरम "।

वीर विप्लवी शहिद खुदीराम बोस के 118 वीं पुण्यतिथि पर टीम पीएसएफ का एसडीपी रक्तदान अभियान।
अभिजीत सेन।
जमशेदपुर/ पोटका
एक समय था जब खुदीराम बोस जैसे देशप्रेमियों के द्वारा अंग्रेजों से लोहा लिया गया था. और सिर्फ 18 वर्ष 8 महीने 11 वां दिन, हंसते हुए देश के लिए फांसी को गले लगाकर शहीद हुए, और शहीद होते हुए देश के लिए उनका अंतिम शब्द था ” बन्दे मातरम “। ऐसे वीर विप्लवी शहिद खुदीराम बोस के 118 वीं पुण्यतिथि पर टीम पीएसएफ ने भी एसडीपी रक्तदान अभियान चलाते हुए रक्ताजंली देकर , भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित किया।

स्वैच्छिक रक्तदान शिविर आयोजित करना हो, या सबसे बड़ा एसडीपी रक्तदान अभियान हो, टीम पीएसएफ ने शहर से लेकर सुदूरवर्ती गांव तक जागरुकता का एक अलख जगाया है। अस्पतालों में इलाजरत गम्भीर बीमारी से जंग लड़ रहे ऐसे मरीजों के लिए वरदान साबित होता टीम पीएसएफ का एसडीपी रक्तदान अभियान।
एसडीपी रक्तदान नियमित रक्तदान से थोड़ा पृथक है. आमतौर पर नियमित रक्तदान में जहां औसतन दस मिनट का समय लगता है. वहीं एसडीपी रक्तदाताओं को औसतन 40 मिनट से एक घंटे तक रक्तदान बेड पर रह कर रक्तदान प्रक्रिया से गुजरना पड़ता। आज के समय कहा जाएं तो ग़लत नहीं होगा कि सबसे विश्वसनीय एवं सुरक्षित रक्तदान प्रक्रिया है सिंगल डोनर प्लेटलेट्स यानी एसडीपी रक्तदान। इस प्रक्रिया में रक्तदान करने वाले रक्तदाताओं का रक्तदान के पूर्व ही सभी जांच से गुजरना पड़ता है।.
सभी मानकों से गुजरने के पश्चात ही कोई एसडीपी रक्तदान कर पाता है। रक्तदाताओं के शरीर में प्लेटलेट्स की मात्रा, लम्बाई, वजन एवं अन्य मानकों के जरिए एक स्वास्थ्य रक्तदाता का चयन होता है। ऐसे ही रक्तवीरों एवं एसडीपी रक्तदान के चलते आज कई घरों में फिर से खुशियों के द्विये जल उठते हैं, चाहे केंसर, डेंगू या अन्य गम्भीर बीमारी के लिए जब शरीर में प्लेटलेट्स की मात्रा में औसतन से काफी गिरावट देखा जाता है तो यही एसडीपी रक्त जीवनदाई बन जाता है।
आज इस अवसर पर 4 एसडीपी रक्तदान जिसमें मनोतोष घोषाल, शतकवीर अजित कुमार भगत, शतकवीर कुमारेस हाजरा एवं ब्लड सेंटर के तकनीशियन मोहन मंडल के जरिए टीम पीएसएफ का 1881 वां एसडीपी हुआ पुरा। टीम पीएसएफ के निदेशक अरिजीत सरकार ने एक संकल्प के तहत एक राज्य से दूसरे राज्य तक एसडीपी रक्तवीरों का फौज तैयार करने में जुटा है। बही रक्तदान करने के पश्चात सभी रक्तदाताओं को प्रशस्ति पत्र एवं प्रतीक चिन्ह देकर सम्मानित किया गया।
इस दौरान जमशेदपुर ब्लड सेंटर के डाॅक्टर लव बहादुर सिंह, डाॅक्टर रीता सिंह, डॉक्टर निर्जला झा, तकनीशियन आदित्य कुमार, अरुनभो मोइत्रा, स्वर्णा मोइत्रा, टीम पीएसएफ के निदेशक अरिजीत सरकार. उपस्थित थे।



