विद्यालयी वार्षिक आचार्य कार्यशाला का शुभारंभ, शिक्षण गुणवत्ता पर दिया गया जोर
प्रांतीय योजना के तहत सरस्वती शिशु विद्या मंदिर, भलपहरी (ताराटांड़) में सोमवार को विद्यालयी वार्षिक आचार्य कार्यशाला का शुभारंभ दीप प्रज्वलन एवं सरस्वती वंदना के साथ किया गया।

विद्यालयी वार्षिक आचार्य कार्यशाला का शुभारंभ, शिक्षण गुणवत्ता पर दिया गया जोर
गिरिडीह/ताराटांड़, मनोज कुमार।
गिरिडीह : प्रांतीय योजना के तहत सरस्वती शिशु विद्या मंदिर, भलपहरी (ताराटांड़) में सोमवार को विद्यालयी वार्षिक आचार्य कार्यशाला का शुभारंभ दीप प्रज्वलन एवं सरस्वती वंदना के साथ किया गया। कार्यक्रम में आचार्य एवं दीदीगण उत्साहपूर्वक शामिल हुए।

कार्यशाला में समिति सदस्य सुरेंद्र यादव, मुख्य प्रशिक्षक सह पूर्व आचार्य एवं मीडिया प्रभारी राजेंद्र लाल बरनवाल तथा प्रधानाचार्य जीतन पंडित ने उपस्थित शिक्षकों को मार्गदर्शन प्रदान किया। इस दौरान प्रधानाचार्य ने कार्यशाला के उद्देश्य पर विस्तार से प्रकाश डाला।
मुख्य प्रशिक्षक राजेंद्र लाल बरनवाल ने कहा कि विद्या भारती, झारखंड द्वारा आयोजित यह वार्षिक आचार्य कार्यशाला शिक्षकों के लिए एक विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम है,

जो भारतीय संस्कृति, मूल्यों एवं पंचपदीय शिक्षण पद्धति पर आधारित है। उन्होंने बताया कि कार्यशाला में बीते सत्र की समीक्षा के साथ-साथ नए शैक्षणिक सत्र की विस्तृत योजना तैयार की जाती है।
उन्होंने आगे कहा कि इस कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य शिक्षकों के शिक्षण कौशल में सुधार करना तथा विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास के लिए संस्कारित शिक्षा प्रदान करना है।

इस दौरान पंचपदीय शिक्षण पद्धति, विद्या भारती के पांच केंद्रीय विषय, सुलेख तथा राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा की गई। कार्यक्रम में यह भी कहा गया कि वंदना सभा शिशु मंदिर का प्राण है और बचपन में दिए गए संस्कार ही व्यक्ति के भविष्य को निर्धारित करते हैं।

इसलिए शिक्षा प्रणाली का आधार चरित्र निर्माण और संस्कार होना आवश्यक है। शिशु मंदिर योजना ने देशभर में शिक्षा के क्षेत्र में एक सकारात्मक जागरण लाया है।
कार्यशाला में सभी आचार्य एवं दीदीगण की सक्रिय भागीदारी रही।




