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पलामू सांसद विष्णु दयाल राम पर झूठ बोलकर लोगों को गुमराह करने का आरोप लगाया।

चैनपुर नेमरा रोड उनके और विधायक आलोक चौरसिया के प्रयास से नहीं बल्कि झारखंड मुक्ति मोर्चा के चैनपुर रामगढ़ प्रखंड के कार्यकर्ताओं एवं जिलाध्यक्ष राजेंद्र प्रसाद सिन्हा के नेतृत्व में माननीय मुख्यमंत्री से मांग का नतीजा है।

सांसद अपना क्रेडिट लेना बंद कर :=चंदन सिन्हा

मेदिनीनगर : पलामू सांसद विष्णु दयाल राम पर झूठ बोलकर लोगों को गुमराह करने का आरोप लगाया।चैनपुर नेमरा रोड उनके और विधायक आलोक चौरसिया के प्रयास से नहीं बल्कि झारखंड मुक्ति मोर्चा के चैनपुर रामगढ़ प्रखंड के कार्यकर्ताओं एवं जिलाध्यक्ष राजेंद्र प्रसाद सिन्हा के नेतृत्व में माननीय मुख्यमंत्री से मांग का नतीजा है।

उक्त बातें झारखंड मुक्ति मोर्चा के केंद्रीय समिति सदस्य सह पलामू जिला प्रवक्ता चंदन प्रकाश सिन्हा ने प्रेस विज्ञप्ति जारी कर कहा। जारी किए गए प्रेस विज्ञप्ति में चंदन प्रकाश सिन्हा ने कहा कि पलामू एवं गढ़वा में माननीय मुख्यमंत्री के कार्यक्रम के दौरान चैनपुर एवं रामगढ़ के कार्यकर्ताओं एवं पार्टी के जिला अध्यक्ष राजेंद्र प्रसाद सिन्हा ने इस मुद्दे को प्रमुखता से रखा था और लोगों को होने वाले कठिनाइयों के बारे में बतलाया था जिसका नतीजा है

कि राज्य सरकार के द्वारा चैनपुर नेमरा रोड के लिए 104 करोड़ रुपए के लागत से निर्माण का निर्णय कैबिनेट के बैठक में लिया गया। जिसकी जानकारी होते ही भाजपा नेताओं में इसका श्रेय लेने का होड़ मच गया है। जबकि सच्चाई है कि यह योजना पूर्णतः राज्य सरकार के पैसे से पूरा किया जाना है। भाजपा के सांसद होने के बावजूद भी केंद्र सरकार में उनकी बात नहीं सुनी जा रही है जिस कारण लोगों को बताने के लिए उनके पास कुछ नहीं है।

यह झूठ बोलकर लोगों को गुमराह कर रहे हैं। यह तीसरी बार चुनाव जीतकर पलामू के सांसद है लेकिन एक भी योजना ऐसी नहीं है जो यह कह सके कि उनके प्रयास से किया गया है।पहली बार चुनाव जीतने से पहले जिन्होंने छतरपुर गया रेलवे लाइन को अतिशीघ्र चालू कराने का वादा किया था जो अभी तक जस का तस पड़ा हुआ है।

कोई कार्रवाई नहीं की गई है। साथ ही कोरोना महामारी में स्पेशल ट्रेन के नाम पर लोगों से रेलवे ने स्पेशल ट्रेन के नाम पर कई गुना भाड़ा वसूल किया लेकिन ये चुपचाप रहे। झारखंड सरकार का 136000 करोड़ रूपया केंद्र सरकार के बाकी है जिसके कारण झारखंड का विकास अवरुध हो रही है। साथ ही केंद्र सरकार ने भेदभाव करते हुए विकास योजनाओं की बहुत सारे पैसों को रोक कर रखा है। यदि वास्तव में झारखंड का विकास चाहते हैं तो केंद्र सरकार से उन बकाया पैसों को झारखंड को वापस करने की मांग करनी चाहिए ताकि योजनाओं को सुचारू रूप से चलाया जा सके।

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