झंडा मैदान में मनाया गया जेएमएम का स्थापना दिवस समारोह,
जेएमएम के 53 स्थापना दिवस समारोह सोमवार को झंडा मैदान में मनाया गया।

झंडा मैदान में मनाया गया जेएमएम का स्थापना दिवस समारोह, शामिल हुए मंत्री और विधायक कल्पना समेत कई नेता
कई लोगों ने लिया दल की सदस्यता
गिरिडीह : मनोज कुमार।
गिरिडीह : जेएमएम के 53 स्थापना दिवस समारोह सोमवार को झंडा मैदान में मनाया गया। इस दौरान समारोह में नगर विकास मंत्री सुदिव्य कुमार सोनू, गांडेय विधायक कल्पना सोरेन, टुंडी विधायक मथुरा महतो, पूर्व मंत्री बेबी देवी, महापौर प्रमिला मेहरा, पूर्व विधायक निजामुद्दीन अंसारी, जमुआ के पूर्व विधायक केदार हाजरा, जेएमएम जिला अध्यक्ष संजय सिंह, अजीत कुमार पप्पू, कोडरमा की जेएमएम नेत्री शालिनी गुप्ता, प्रणव वर्मा भी शामिल हुए।

समारोह की शुरुआत ही पार्टी के संस्थापक स्वर्गीय शिबू सोरेन के तस्वीर पर माल्यार्पण कर किया गया। जबकि जेएमएम के कई फाइटर नेताओं के तस्वीर पर माल्यार्पण किया गया। इस दौरान समारोह में हजारों की संख्या में आदिवासी समुदाय के लोगों का जुटान हुआ।

मौके पर पोषण सखी संघ की नौकरी से इस्तीफा देकर जेएमएम की सदस्यता ग्रहण करने वाली प्रमिला कुमारी के नेतृत्व में कई महिलाओं को गांडेय विधायक कल्पना सोरेन और मंत्री सुदविया कुमार सोनू ने पार्टी के अंगवस्त्र पहनाकर स्वागत किया। वही स्थापना दिवस समारोह में कई और लोगों ने पार्टी का सदस्यता ग्रहण किया।

जबकि कुछ कार्यकताओं ने संस्थापक स्वर्गीय शिबू सोरेन का बड़ा तस्वीर गांडेय विधायक कल्पना सोरेन और मंत्री सुदविया कुमार सोनू को भेंट किया। इस दौरान कई वक्ताओं ने भाजपा पर जमकर हमला बोला, वही मईया सम्मान योजना को लेकर हेमंत सरकार की बड़ी उपलब्धि बताया।

समारोह को सम्बोधित करते हुए गांडेय विधायक कल्पना सोरेन ने कहा कि स्थापना दिवस की तिथि सिर्फ तिथि नहीं है बल्कि झारखंड के भूले हुए आंदोलकारी का तिथि है. इसी झंडा मैदान से कल्पना सोरेन को हिम्मत दिया था गिरिडीह से उड़ीसा की कल्पना को गिरिडीह ने बेटी के रूप में गोद लिया

हर किसी का संघर्ष गाथा बेहद मुश्किल भरा था. उन्होंने कहा कि आने वाले वर्ष 2050 तक हेमंत दादा ने झारखंड को एक विकसित राज्य के रूप में आगे करने का अभियान में जुटे हुए है. समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में मौजूद राज्य के नगर विकास मंत्री सुदिव्य कुमार सोनू ने झारखण्ड को बचाने के लिए जेएमएम ने कई त्याग किया. राज्य के किसी भी कोने में जाए, हर किसी को झारखंड के आंदोलन कारी का नाम सामने आएगा.



