चार लेबर कोड़ के विरुद्ध मजदूर संगठनों ने निकाला प्रतिवाद मार्च, नोटिफिकेशन नोटिफिकेशन को जलाया
हजारीबाग देश के 10 केंद्रीय श्रमिक संगठनों के आह्वान पर केंद्र सरकार द्वारा लागू किया गया चार लेबर कोर्ट के विरुद्ध सेंटर ऑफ़ इंडियन ट्रेड यूनियन केंद्र सी आई टी यू के बाजार चले प्रतिवर्त मार्च निकाला गया

चार लेबर कोड़ के विरुद्ध मजदूर संगठनों ने निकाला प्रतिवाद मार्च, नोटिफिकेशन नोटिफिकेशन को जलाया
हजारीबाग : ब्यूरो रिपोर्ट
हजारीबाग : देश के 10 केंद्रीय श्रमिक संगठनों के आह्वान पर केंद्र सरकार द्वारा लागू किया गया चार लेबर कोर्ट के विरुद्ध सेंटर ऑफ़ इंडियन ट्रेड यूनियन केंद्र सी आई टी यू के बाजार चले प्रतिवर्त मार्च निकाला गया इसे बताओ ने बताया कि केंद्र सरकार के द्वारा 15 श्रम कानून को विलोपित और 29 श्रम कानून को समाप्त कर दिया गया है .

कुल मिलाकर 44 श्रम कनुनों को समाप्त कर दिया गया है .इसमें श्रमजीवी पत्रकार और अन्य समाचार पत्र कर्मचारी( सेवा शर्तें और विविध प्रावधान ) अधिनियम 1955, और श्रमजीवी पत्रकार( वेतन दरों )का निर्धारण अधिनियम 1958, मातृत्व लाभ अधिनियम 1961, बोनस भुगतान अधिनियम 1965 ,सामान मजदूरी भुगतान अधिनियम 1976, वेतन भुगतान अधिनियम औद्योगिक विवाद अधिनियम 1926 जैसे महत्वपूर्ण श्रम कानून को समाप्त कर दिया गया है इन 44 श्रम कानून के बदले केंद्र सरकार ने चार लेबर कोड लाया है.
2019 में वेज कोड़ और 2020 में तीन लेबर कोड बनाया था . यह चार लेबर कोड देश के तमाम मजदूर और अधिकारियों के लिए काला कानून है इस कानून में मजदूरों को दो भागों में बांटा गया है. एक है मजदूर जिसकी मासिक वेतन 18000 और 18000 से अधिक वेतन पाने वाले को एम्प्लॉई का दर्जा दिया गया है . इम्प्लाई में कर्मी के साथ-साथ अधिकारी भी रखा हैं.
इससे साफ हो गया है यह जो कर लेबर कोड है वह अधिकारियों पर भी लागू होता है. सबसे चिंता जनक बात इस कानून में है कि प्रशिक्षु यानी की ट्रेनिंग करने वाले लोगों पर यह चार लेबर कोड लागू नहीं होगा इससे स्पष्ट है कि प्रबंधन मालिक और ठेकेदार इनका जितना शोषण करना चाहे है करते रहे यह लोग न्याय पाने के लिए कहीं नहीं जा सकते इस लेबर कोर्ट से देश के अंदर अस्थाई नौकरी समाप्त हो जाएगी और एक या दो वर्ष के लिए फिक्स टर्म के आधार पर मजदूर और कर्मचारियों को कंपनियां या कार्यालय बहाल करेगी .
फिक्स को पूरा होने के बाद इसी मजदूर को रखा जाएगा इसकी कोई गारंटी इस कोड में नहीं है .इस कोड़ में न्यूनतम मजदूरी बनाने का अधिकार राज्य सरकारों से छीन लिया गया है. इस कोड से मजदूरों को संगठन बनाने और अपनी जायज मांगों के लिए हड़ताल करने का अधिकार भी छीन लिया गया है. इस कोर्ट में मजदूरों का वेतन निर्धारण करने की प्रक्रिया में मजदूर प्रतिनिधि और सरकार के प्रतिनिधि हिस्सा नहीं ले सकेंगे इसलिए मजदूरों का वेतन भी मनमाने तरीके से तय किया जाएगा .
प्रबंधन के खिलाफ मजदूरों को कोर्ट जाने का अधिकार भी इस कोड के माध्यम से छीन लिया गया है .इस कोड से मजदूरों को तो भला होगा ही नहीं लेकिन कंपनियों को ठेकेदारों को बहुत लाभ मिलेगा. इससे देश में पूर्ण रूप से ठेकेदारी प्रथा लागू हो जाएगी .स्थाई रूप से काम करने वाले कामगारों को भी अस्थाई रूप से काम करने वाले कामगारों को भी फिक्स टर्म की ओर धकेल दिया जाएगा. इस कार्यक्रम में सी आई टी यू जिला सहसचिव गणेश कुमार सीटू,तपेशवर राम ,
बीमा कर्मचारी संघ के महासचिव जे सी मित्तल ,सुशील लकड़ा, दुर्गा सिंह ,शंकर कुमार, विजय चौबे, मेडिकल रिप्रेजेंटेड रिप्रेजेंटेटिव यूनियन के साकेत कुमार, सुमन शेखर, सिकंदर शर्मा , अखिल भारतीय बैंक एसोसिएशन के किशोर सिंह ,राजेश कुमार ,एटक के महेंद्र राम, शौकत अनवर, डीवीसी श्रमिक यूनियन के विजय चौधरी , लाल बहादुर शास्त्री ,किसान सभा के ईश्वर महत्व सहित कई संगठन के लोगों ने भाग लिया .. अंत में केंद्र सरकार द्वारा जारी नोटिफिकेशन के छाया प्रति सभी लोगों ने संयुक्त रूप से विरोध स्वरूप जलाया |



