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ग्लोबल माइका कमिटि द्वारा पिछले दिनों ढिबरा पर आश्रित परिवारों के सामाजिक एवं आर्थिक स्थिति पर हुए शोध से प्राप्त तथ्यों के व्यापक प्रचार-प्रसार के लिए जिला स्तरीय कार्यशाला का आयोजन मीर होटल गिरिडीह में किया गया।

ग्लोबल माइका कमिटि द्वारा पिछले दिनों ढिबरा पर आश्रित परिवारों के सामाजिक एवं आर्थिक स्थिति पर हुए शोध से प्राप्त तथ्यों के व्यापक प्रचार-प्रसार के लिए जिला स्तरीय कार्यशाला का आयोजन मीर होटल गिरिडीह में किया गया।

ग्लोबल माइका कमिटि द्वारा पिछले दिनों ढिबरा पर आश्रित परिवारों के सामाजिक एवं आर्थिक स्थिति पर हुए शोध से प्राप्त तथ्यों के व्यापक प्रचार-प्रसार के लिए जिला स्तरीय कार्यशाला का आयोजन मीर होटल गिरिडीह में किया गया।

गिरिडीह, मनोज कुमार।

गिरिडीह : ग्लोबल माइका कमिटि द्वारा पिछले दिनों ढिबरा पर आश्रित परिवारों के सामाजिक एवं आर्थिक स्थिति पर हुए शोध से प्राप्त तथ्यों के व्यापक प्रचार-प्रसार के लिए जिला स्तरीय कार्यशाला का आयोजन मीर होटल गिरिडीह में किया गया। कार्यशाला में मुख्य अतिथि अतिथि जिला बाल संरक्षण पदाधिकारी श्री जीतु कुमार, बाल कल्याण समिति के अध्यक्षा पूजा सिन्हा, डालसा के पैनल अधिवक्ता राज किशोर वर्मा, विपिन यादव, राहत फातिमा जमुआ के जिला परिषद सदस्या श्रीमती प्रभा वर्मा तथा माइका प्रभावित परिवारों के अभिभावकों ने भाग लिया।

कार्यक्रम का प्रवेश कराते हुए श्री मारकेण्डेय मिश्रा ने कहा कि अध्ययन के माध्यम से माइका प्रभावित गाँवों में रहने वाले लोगों के आर्थिक, शैक्षणिक, स्वास्थ्य, आजीविका के बारे में जानकारी उपलब्ध हुआ है। अब हमें प्रभावित परिवारों को मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराने हेतु काम करने की आवश्यकता है। सरकार को इन लोगों के लिए पालिसी बनाने की आवश्यकता है ताकि लोगों को उसके मेहनत के हिसाब से मेहनताना मिल सके।

ग्लोबल माइका कमेटी के सदस्य बैधनाथ ने कहा हमलोगों ने 809 गाँवों में अध्ययन करके एक रिर्पोट तैयार किया है जिसे आज आप सबों को प्रेजनटेसन के माध्यम से आपलोगों के बीच साझा की जायगी। डनहोंने कहा कि झारखण्ड में अभी तक अपना माइका पाॅलिसी नहीं बन पाया है लेकिन ग्लोबल माइका कमिटि इसके लिए प्रतिबध है और राज्य स्तर तक के पदाधिकारियों तक अपनी आवाज पहुँचाने में सक्षम हुए हैं। ग्लोबल माइका कमिटि में कुल 32 संस्थाएं जुड़े हुए हैं, सभी का उदेश्य माइका प्रभावित लोगों को सुरक्षित जीवन यापन कराना है।

जिला बाल संरक्षण पदाधिकारी श्री जीतु कुमार ने कहा कि गिरिडीह एवं कोडरमा में देखा जाय तो 50 से 60 प्रतिशत परिवार पूर्णरूपेण माइका पर आश्रित है। इससे बच्चों की पढ़ाई बाधित होती है। जो बच्चे विद्यालय से जुड़े हुए हैं वे तो सुरक्षित हैं लेकिन जो विद्यालय से बाहर हैं वह बच्चे असुरक्षित हैं और कहीं न कहीं वे बाल मजदुरी में लगे हुए हैं। बाल मजदुरी में लगे बच्चों को चिन्हित कर विद्यालय से जोड़ने के लिए प्रयास करने की आवश्यकता है। सरकार भी इस पर कार्य कर रही है। अभी कोविड में प्रभावित 269 बच्चों को स्र्पोन्सरशीप योजना से जोड़ा गया है। इसके अलावे हमलोग बाल विवाह, बाल मजदुरी रोकथाम के लिए लगातार जागरूकता कार्यक्रम करते रहते है।

बाल कल्याण समिति के अध्यक्ष श्रीमती पूजा सिन्हा ने कहा कि कठिन परिस्थिति में रहने वाले बच्चों की पहचान कर उसे सरकारी योजनाओं से जोड़ने के लिए प्रयास किया जा रहा है। अभी अक्षय तृतीया को देखते हुए बाल विवाह रोकथाम जागरूकता अभियान चलाया जा रहा है। अगर आपलोगों को कोई भी बच्चा कठिन परिस्थिति या मदद की जरूरत है तो हमारे पास लायें हमलोग उन्हें मदद करेंगे।

डालसा के पैनल अधिवक्ता राजकिशोर वर्मा ने कहा कि ग्लोबल माइका कमिटि द्वारा किया गया अध्ययन एक सार्थक पहल है। इसमें जुड़े सभी संस्थाओं को मैं अपनी ओर से धन्यवाद देता हूँ। माइका का पाॅलिसी अभी तक नहीं बनना दु‘खद है। माइका में काम करने वाले परिवारों को उनके मौलिक अधिकार मिलना चाहिए जिससे उसका एवं उसके बच्चें को सर्वांगीण विकास हो सके।

व्रिष्ठ अधिवक्ता विपीन कुमार ने कहा कि अंग्रेजों के जमाने से इस क्षेत्र में ढ़िबरा चुनने का काम हो रहा है। 1980 में वन अधिनियम बनने के बाद से ढ़िबरा गैरकानूनी हो गया है। लेकिन लोग चोरी छुपे अभी भी ढ़िबरा से रोजगार चला रहे हैं। उसके मन में हमेशा कानून का डर लगा हुआ रहता है।

जिला परिषद सदस्य श्रीमती प्रभा वर्मा ने कहा कि अभी भी क्षेत्र में बाल विवाह हो रहा है जो काफी शर्मनाक है। महिलाओं को जागरूक होने की आवश्यकता है ताकि बाल विवाह को रोका जा सके। अभी सरकार द्वारा कक्षा आठवीं से बारहवीं कक्षा तक पढ़ने वाली बच्चियों को सावित्री बाई फुले किशोरी समृद्धि योजना के तहत लाभ दे रही है।

इस मौके पर श्री बैधनाथ, उमेश तिवारी, सुरेश शक्ति, अमित पाण्डेय, मुकेश कुमार के अलावे माइका प्रभावित क्षेत्र के अभिभावकों ने भाग लिया।

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