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करम पर्व झारखण्ड की सांस्कृतिक अस्मिता का जीवंत प्रतीक है – डॉ. मनोज

मारवाड़ी महाविद्यालय, राँची में जनजातीय एवं क्षेत्रीय भाषा विभाग द्वारा "करम पूर्व संध्या महोत्सव" अत्यंत ही हर्षोल्लास एवं धूमधाम के साथ मनाया गया।

करम पर्व झारखण्ड की सांस्कृतिक अस्मिता का जीवंत प्रतीक है – डॉ. मनोज

राँची : आज मारवाड़ी महाविद्यालय, राँची में जनजातीय एवं क्षेत्रीय भाषा विभाग द्वारा “करम पूर्व संध्या महोत्सव” अत्यंत ही हर्षोल्लास एवं धूमधाम के साथ मनाया गया। इस महोत्सव में विभाग के अन्तर्गत सभी भाषाओं के छात्र-छात्राओं ने अपनी-अपनी पारंपरिक नृत्य प्रस्तुतियां दीं । कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित मारवाड़ी महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. मनोज कुमार ने कहा कि करमा पर्व झारखण्ड की सांस्कृतिक अस्मिता का जीवंत प्रतीक है।

यह पर्व न केवल आदिवासी समाज के लोकजीवन की समृद्ध परम्परा को उजागर करता है, बल्कि पर्यावरण संरक्षण, भाईचारा, सहयोग और सामूहिक आनंद का भी महत्त्वपूर्ण संदेश देता है। यह पर्व झारखण्ड की सांस्कृतिक पहचान है, जो आदिवासी समाज की आस्था, लोकगीत, लोकनृत्य और सामूहिक चेतना को एक सूत्र में बाँधता है। विशिष्ट अतिथि के रूप में मौजूद जनजातीय एवं क्षेत्रीय भाषा विभाग मारवाड़ी महाविद्यालय, राँची के पूर्व विभागाध्यक्ष डॉ. वृन्दावन महतो ने पर्व की शुभकामनाएँ प्रेषित करते हुए करम-कथा प्रस्तुत की और कहा कि भाई-बहन का स्नेह, प्रकृति के प्रति आदर तथा सामूहिक एकता करम पर्व का मुख्य संदेश है ।

यह पर्व केवल धार्मिक अनुष्ठान भर नहीं है, बल्कि सामाजिक समरसता और पारस्परिक सहयोग की भी अभिव्यक्ति है । खेतों में अच्छी फसल, परिवार की समृद्धि और भाई की दीर्घायु की कामना इस उत्सव से जुड़ी रहती है । कार्यक्रम की शुरुआत जनजातीय एवं क्षेत्रीय भाषा विभाग के छात्र-छात्राओं के द्वारा अतिथियों का स्वागत स्थानीय परम्परा के अनुसार परीछकर किया गया ।

कार्यक्रम में उपस्थित अतिथियों के लिए स्वागत भाषण विभागाध्यक्ष डॉ. खातिर हेम्ब्रम के द्वारा तथा धन्यवाद ज्ञापन विभाग के सहायक प्राध्यापक लेफ्टिनेंट डॉ. अवध बिहारी महतो के द्वारा किया गया । उन्होंने प्रकृति को स्वच्छ रखने के लिए प्रकृति पर्व करम की पूजा कर धर्म निभाते रहने के लिए सभी के प्रति आभार प्रकट किया गया । आज के करम पूर्व संध्या महोत्सव को सफल बनाने में सभी की योगदान के लिए धन्यवाद दिया गया । अंत में सामूहिकता को प्रदर्शित करता प्रतीक नृत्य प्रस्तुति ने सभी का मन मोहा यह हमारी संस्कृति की पहचान है ।

इस अवसर पर महाविद्यालय के सहायक प्राध्यापक डॉ. राहुल कुमार, श्री संतोष रजवार, श्रीमती सुमन्ती तिर्की, श्रीमती संगीता तिग्गा, डॉ. अमित कुमार, डॉ. अशोक कुमार महतो, श्री जुरा होरो, श्री कृष्ण कान्त, श्री संतोष लाल, श्री महानन्द महतो तथा महाविद्यालय के विद्यार्थी उपस्थित थे ।

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