आदिवासी संघर्ष और उनके जीवन की कथा की रचयिता थीं महाश्वेता देवी
जंगल का दावेदार उपन्यास महाश्वेता देवी के समर्पण और लेखनी का देता है परिचय

आदिवासी संघर्ष और उनके जीवन की कथा की रचयिता थीं महाश्वेता देवी
जंगल का दावेदार उपन्यास महाश्वेता देवी के समर्पण और लेखनी का देता है परिचय
ब्यूरो रिपोर्ट
मेदिनीनगर (पलामू) : संस्कृतिक पाठशाला की 62वीं कड़ी में बांग्ला एवं हिंदी की लोकप्रिय जन लेखिका ज्ञानपीठ पुरस्कार विजेता महाश्वेता देवी की जन्म शताब्दी वर्ष की पूर्व संध्या पर महाश्वेता देवी के व्यक्तित्व और कृतित्व पर यहां परिचर्चा का आयोजन किया गया। यह परिचर्चा ज्ञान विज्ञान समिति के प्रांतीय अध्यक्ष शिवशंकर प्रसाद एवं साहित्य प्रेमी ललन प्रजापति की संयुक्त अध्यक्षता में प्रारंभ हुई।
परिचर्चा की शुरुआत में प्रेम प्रकाश ने विषय प्रवेश करते हुए कहा कि महाश्वेता देवी का जीवन बेहतर दुनिया बनाने वाले लोगों और उनके अधिकारों को समर्पित था। जब भी हम महाश्वेता देवी को याद करते हैं तो पलामू के प्रख्यात पत्रकार रामेश्वरम जी की भी याद आती है। महाश्वेता देवी का अधिकांश साहित्य संघर्ष और दर्द की कथा कहता है।
महाश्वेता देवी द्वारा लिखित उपन्यास जंगल के दावेदार की चर्चा करते हुए प्रेम प्रकाश ने कहा कि यह उपन्यास बिरसा मुंडा के संघर्ष की कथा कहता है। इस उपन्यास का नाट्य रूपांतरण इप्टा के राष्ट्रीय कार्यकारिणी सदस्य उपेंद्र कुमार मिश्रा ने किया था। इसकी प्रस्तुति उनके आगमन पर उनके स्वागत में स्थानीय गांधी स्मृति भवन (टाउन हॉल) में किया गया था। इस दौरान दर्शकों में उपस्थित महाश्वेता देवी नाटक के अंत में उछलकर मंच पर चढ़ गई और कलाकारों को अपने गले लगा लिया था। अपने उद्गार को व्यक्त करते हुए उन्होंने मंच से कहा था कि पलामू इप्टा के कलाकार यंग सोल्जर हैं। उनकी कई कहानियों में पलामू के पत्र शामिल हैं। संपूर्णता में देखें तो उनके साहित्य के केंद्र में आदिवासी और जनजाति के जीवन की कथा देखने को मिलती है।
इस क्रम को आगे बढ़ते हुए जंगल के दावेदार नाटक में सिब्बन की भूमिका अदा कर रहे प्रेम कुमार ने कहा महाश्वेता देवी ने नाटक के पश्चात जिस प्रकार से कलाकारों को गले लगाया था उस से लगा उनकी लेखनी के द्वारा लिखित संवादों का अभिनय सटीक हुआ है।
कुलदीप राम ने महाश्वेता द्वारा लिखित ‘द्रोपदी’ कहानी की चर्चा विस्तार से करते हुए कहा कि यह कहानी महाभारत के पात्र द्रोपदी से प्रेरित है। इस कहानी में जिस प्रकार से द्रोपदी के साथ अत्याचार किया गया था, उससे कहीं ज्यादा अत्याचार एक संथाली महिला द्रोपदी के साथ समाज के दबंग सामंत ने किया। यह कहानी बहुत ही मार्मिक और कारुणिक है।
गोविंद प्रसाद ने कहा कि महाश्वेता देवी की रचना सिर्फ भारत ही नहीं, बल्कि पूरी दुनिया में चर्चित है। उन्होंने जिस प्रकार से रचनाधर्मिता को निभाया है, इसके लिए उन्हें कई पुरस्कारों से भी नवाजा गया। एक पुरस्कार के दौरान जब उन्हें ₹ 5 लाख की राशि जब प्रदान की गई तो उन्होंने उस राशि को एक आदिवासी समुदाय के संगठन के विकास के लिए दान कर दिया।युवा कवि घनश्याम कुमार ने नामवर सिंह के वक्तव्य को उकेरते हुए कहा कि नामवर सिंह ने महाश्वेता देवी की कहानी “चैत्री” को “धुलाई वाली” कहानी के समक्ष रखा था। इस तरह रेनेसा के प्रारंभिक दौर में लिखी जाने वाली कहानियों में उनकी कहानी को भी शामिल किया गया।

अध्यक्षीय वक्तव्य के दौरान ललन प्रजापति ने कहा कि महाश्वेता देवी का संबंध पलामू, संथाल परगना, झारखंड के आदिवासी क्षेत्र, बंगाल का वीरभूम, बांकुड़ा, उड़ीसा का कालाहांडी, छत्तीसगढ़ का बस्तर, दंतेवाड़ा के संघर्ष से रहा है। वहां आदिवासियों के साथ खासकर महिलाओं के साथ अत्याचार की कथा देखने को आज भी मिल जाती है। महाश्वेता देवी का साहित्य आज भी प्रासंगिक है और उनका साहित्य आज भी साहित्यकर्मियों को एक दिशा प्रदान करता है।
कार्यक्रम के अंत में शिवशंकर प्रसाद ने विमर्श को समेकित करते हुए कहा कि एक कार्यक्रम में जब महाश्वेता देवी पलामू आई थी, तो डालटनगंज स्टेशन पर उतरते ही उन्होंने देखा एक पगली महिला ने एक बच्ची को जन्म दिया है। महाश्वेता देवी ने उस बच्ची को देखते ही कहा था कि इस बच्ची को सही स्थान पर जब तक नहीं रखा जाएगा, तब तक मैं कहीं नहीं जाऊंगी। मैं और केडी सिंह महाश्वेता जी को रिसीव करने स्टेशन पर गए थे। उस बच्ची को मिशन के अनाथालय में रखा गया। जब वह संतुष्ट हो गईं कि बच्ची अब सुरक्षित है, तब वह रामेश्वरम जी के घर चलने को तैयार हुईं। उनका व्यक्तित्व और उनकी शैली यह प्रतिबिंबित करती है कि एक साहित्यकार का संबंध समाज में चल रहे सकारात्मक आंदोलन से होना ही चाहिए। साहित्य राजनीति से निरपेक्ष नहीं हो सकती।
मौके पर प्रगतिशील लेखक संघ के सचिव नुदरत नवाज, संजीव कुमार संजू, अजीत कुमार, भोला कुमार, चंद्रकांति कुमारी सहित अन्य लोग उपस्थित थे।




