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Patna News: 81,730 एकड़ में बनेगा पाटलिपुत्र ग्रीनफील्ड टाउनशिप! 273 गांवों को जोड़कर बदलने की तैयारी, रोजगार-निवेश को मिलेगा बड़ा मौका

बिहार की राजधानी पटना के भविष्य को नई दिशा देने के लिए प्रस्तावित पाटलिपुत्र ग्रीनफील्ड सैटेलाइट टाउनशिप विकास योजना 2047 को लेकर सरकार ने हितधारकों के साथ संवाद की प्रक्रिया शुरू कर दी है।

Patna News: 81,730 एकड़ में बनेगा पाटलिपुत्र ग्रीनफील्ड टाउनशिप! 273 गांवों को जोड़कर बदलने की तैयारी, रोजगार-निवेश को मिलेगा बड़ा मौका

पटना, 22 अगस्त 2026: बिहार की राजधानी पटना के भविष्य को नई दिशा देने के लिए प्रस्तावित पाटलिपुत्र ग्रीनफील्ड सैटेलाइट टाउनशिप विकास योजना 2047 को लेकर सरकार ने हितधारकों के साथ संवाद की प्रक्रिया शुरू कर दी है। नगर विकास एवं आवास विभाग की ओर से तैयार प्रारूप पर आम लोगों और विभिन्न हितधारकों से सुझाव एवं आपत्तियां मांगी गई हैं। इसी क्रम में पटना के ऊर्जा ऑडिटोरियम में नगर विकास एवं आवास मंत्री नीतीश मिश्रा की अध्यक्षता में महत्वपूर्ण हितधारक परामर्श बैठक आयोजित की गई।

बैठक में प्रस्तावित टाउनशिप के विकास मॉडल, भूमि व्यवस्था, परिवहन, आवास, रोजगार, निवेश, पर्यावरण और नागरिक सुविधाओं जैसे मुद्दों पर विस्तार से चर्चा हुई। सरकार का जोर इस बात पर है कि परियोजना केवल कागज पर तैयार शहरी योजना न रहकर स्थानीय लोगों, किसानों और भू-स्वामियों की भागीदारी के साथ आगे बढ़े।

‘नागरिक हित सर्वोपरि’, किसानों और भू-स्वामियों से भी होगा सीधा संवाद

बैठक के दौरान नगर विकास एवं आवास मंत्री नीतीश मिश्रा ने कहा कि ग्रीनफील्ड सैटेलाइट टाउनशिप केवल नया शहर बसाने की योजना नहीं है, बल्कि बिहार के भविष्य के शहरी विकास को बेहतर तरीके से नियोजित करने का प्रयास है। उन्होंने कहा कि योजना की सफलता के लिए व्यापक जनभागीदारी और लगातार संवाद जरूरी है।

मंत्री के मुताबिक, विभाग ने योजना को ज्यादा व्यापक और सहभागी बनाने के लिए हितधारकों के साथ संवाद का विस्तृत कार्यक्रम तैयार किया है। आगे किसानों और भू-स्वामियों के बीच जाकर योजना के अलग-अलग पहलुओं की जानकारी दी जाएगी और उनके सुझावों को सुना जाएगा।

उन्होंने विशेष रूप से उन भू-स्वामियों के साथ प्रत्यक्ष संवाद की बात कही, जिनकी जमीन प्रस्तावित योजना के दायरे में आती है। सरकार की कोशिश है कि उनकी चिंताओं और सुझावों को समझते हुए उनकी सहभागिता और सहमति के साथ योजना को आगे बढ़ाया जाए।

273 गांव और 9 प्रखंडों तक फैला होगा प्रस्तावित टाउनशिप क्षेत्र

पाटलिपुत्र ग्रीनफील्ड सैटेलाइट टाउनशिप का प्रस्तावित क्षेत्र काफी विस्तृत है। योजना के अनुसार, इसका क्षेत्रफल लगभग 81,730 एकड़ होगा और यह 9 प्रखंडों के 273 गांवों में फैलेगा।

इसमें पुनपुन, नौबतपुर, मसौढ़ी, फतुहा, संपतचक, पटना ग्रामीण, धनरुआ, दनियावां और फुलवारी प्रखंड के क्षेत्र शामिल हैं। प्रस्तावित विशेष क्षेत्र में दो शहरी क्षेत्र भी रखे गए हैं। इनमें नौबतपुर नगर पंचायत का आंशिक क्षेत्र और पुनपुन नगर पंचायत का पूरा क्षेत्र शामिल है।

योजना में करीब 3,008 एकड़ का कोर एरिया प्रस्तावित किया गया है। इस कोर एरिया में पुनपुन प्रखंड के 19 गांवों को शामिल किया गया है।

टाउनशिप में आवास से लेकर रोजगार तक की होगी समेकित व्यवस्था

सरकार की योजना के मुताबिक, ग्रीनफील्ड टाउनशिप का उद्देश्य केवल नई इमारतों का निर्माण करना नहीं है। प्रस्तावित मॉडल में आवास के साथ सड़क, सार्वजनिक परिवहन, शिक्षा, स्वास्थ्य, बाजार, पार्क, जलापूर्ति, सीवरेज, जल निकासी और अन्य बुनियादी सुविधाओं को एक साथ विकसित करने की परिकल्पना की गई है।

बढ़ती आबादी और आर्थिक गतिविधियों के कारण पटना समेत बिहार के मौजूदा शहरी क्षेत्रों पर दबाव बढ़ रहा है। ऐसे में नई नियोजित टाउनशिप के जरिए शहरी विस्तार को व्यवस्थित करने और लोगों को नए आवास, रोजगार, कारोबार तथा निवेश के अवसर उपलब्ध कराने का लक्ष्य रखा गया है।

भूमि पूलिंग से लेकर भूमि पुनर्संयोजन तक पर जोर

पाटलिपुत्र टाउनशिप के विकास में विकास योजना, भूमि उपयोग योजना और टाउन प्लानिंग स्कीम को महत्वपूर्ण आधार माना गया है। योजना में भूमि पूलिंग, भूमि पुनर्संयोजन या लागू भूमि व्यवस्था के माध्यम से भू-स्वामियों को विकास प्रक्रिया में सहभागी बनाने की संभावना पर जोर दिया गया है।

छोटे भू-स्वामियों, किसानों और स्थानीय समुदाय के हितों को ध्यान में रखते हुए विकास प्रक्रिया को सहभागी और न्यायसंगत बनाना महत्वपूर्ण बताया गया है। जहां आवश्यक होगा, वहां सहमति आधारित व्यवस्था या लागू कानून के अनुसार भूमि अर्जन की प्रक्रिया अपनाई जा सकती है।

यही वजह है कि सरकार ने योजना के प्रारूप पर सुझाव और आपत्तियां आमंत्रित की हैं, ताकि स्थानीय स्तर पर सामने आने वाले मुद्दों को योजना को अंतिम रूप देने से पहले समझा जा सके।

TOD मॉडल से बेहतर होगी कनेक्टिविटी

प्रस्तावित टाउनशिप में TOD यानी Transit-Oriented Development को भी बढ़ावा देने की योजना है। इसका उद्देश्य सार्वजनिक परिवहन के आसपास नियोजित विकास को प्रोत्साहित करना है, ताकि लोगों की निजी वाहनों पर निर्भरता कम हो और शहर के अलग-अलग हिस्सों के बीच बेहतर कनेक्टिविटी विकसित हो।

योजना में पैदल चलने वालों और साइकिल से आवागमन करने वालों के लिए बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराने की भी परिकल्पना की गई है। इसके साथ मिश्रित और संतुलित भूमि उपयोग के जरिए आवास, रोजगार और आवश्यक सेवाओं को एक-दूसरे से बेहतर तरीके से जोड़ने की कोशिश की जाएगी।

पार्क, हरित गलियारे और जल निकाय भी होंगे विकास मॉडल का हिस्सा

पाटलिपुत्र टाउनशिप के प्रस्तावित मॉडल में पर्यावरण और जीवन गुणवत्ता को भी महत्व दिया गया है। इसके लिए सेक्टर पार्क, सामुदायिक पार्क, हरित गलियारे और खेल क्षेत्रों के विकास की योजना पर जोर दिया गया है।

इसके अलावा जल निकायों के संरक्षण को भी शहरी विकास मॉडल का हिस्सा बनाया जा सकता है। इसका उद्देश्य आधुनिक शहरी सुविधाओं के साथ पर्यावरणीय संतुलन बनाए रखना और भविष्य में लोगों को बेहतर एवं स्वस्थ रहने का वातावरण उपलब्ध कराना है।

पटना में निवेश और रोजगार को मिल सकती है नई रफ्तार

प्रस्तावित ग्रीनफील्ड टाउनशिप को पटना के आर्थिक विस्तार के लिहाज से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। सरकार का मानना है कि योजना के विकसित होने के साथ सार्वजनिक और निजी दोनों क्षेत्रों से निवेश आकर्षित हो सकता है।

निवेश बढ़ने के साथ निर्माण, रियल एस्टेट, कारोबार, सेवाओं, परिवहन और अन्य क्षेत्रों में रोजगार के नए अवसर पैदा होने की संभावना है। इससे पटना के सुनियोजित विस्तार के साथ आसपास के क्षेत्रों में भी आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा मिल सकता है।

बैठक में कई प्रमुख संस्थाओं और संगठनों की भागीदारी

हितधारक परामर्श बैठक में नगर विकास एवं आवास विभाग के प्रधान सचिव विनय कुमार, विभाग के सचिव संदीप कुमार आर पुडकलकट्टी, प्रबंध निदेशक-सह-सचिव अनिमेष कुमार पराशर, बिहार राज्य आवास बोर्ड के प्रबंध निदेशक-सह-विशेष सचिव निलेश रामचन्द्र देवरे, पटना नगर निगम के नगर आयुक्त यशपाल मीणा, विशेष सचिव शाहिद परवेज और अपर सचिव मनोज कुमार समेत कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।

इसके अलावा नगर एवं क्षेत्रीय नियोजन संगठन के अधिकारियों, विभिन्न नगर निगमों के नगर आयुक्तों, CREDAI बिहार, बिहार इंडस्ट्रीज एसोसिएशन, बिहार चैंबर ऑफ कॉमर्स, स्टेट लेवल बैंकर्स कमेटी से जुड़े बैंकों, ITPI, IIA और IEI के प्रतिनिधियों ने भी बैठक में हिस्सा लिया।

बैठक में पाटलिपुत्र ग्रीनफील्ड सैटेलाइट टाउनशिप के प्रस्तावित विकास मॉडल का विस्तृत प्रस्तुतीकरण किया गया। इसके बाद हितधारकों की ओर से सामने आए सुझावों और विचारों पर चर्चा की गई।

सरकार के लिए सबसे बड़ी चुनौती होगी जनभागीदारी

पाटलिपुत्र टाउनशिप जैसी विशाल परियोजना में जमीन, स्थानीय आबादी, बुनियादी ढांचे और पर्यावरण से जुड़े कई महत्वपूर्ण पहलू शामिल होंगे। ऐसे में सरकार के लिए योजना को जमीन पर उतारने के साथ स्थानीय लोगों का भरोसा बनाए रखना भी बड़ी चुनौती होगी।

विभाग का कहना है कि हितधारकों से मिलने वाले सुझाव और आपत्तियां योजना को अधिक व्यावहारिक, समावेशी और नागरिक-केंद्रित बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगी। खासतौर पर जमीन रखने वाले लोगों और किसानों के साथ लगातार संवाद को योजना की सफलता का अहम आधार माना जा रहा है।

2047 के विजन के साथ तैयार हो रहा है नया शहरी मॉडल

पाटलिपुत्र ग्रीनफील्ड सैटेलाइट टाउनशिप विकास योजना 2047 को बिहार के भविष्य के शहरी विकास से जोड़कर देखा जा रहा है। इसका उद्देश्य ऐसा आधुनिक शहरी क्षेत्र तैयार करना है, जहां आवास, रोजगार, शिक्षा, स्वास्थ्य, बाजार, परिवहन और नागरिक सुविधाएं एक समेकित व्यवस्था के तहत उपलब्ध हों।

सरकार की परिकल्पना के अनुसार, यह टाउनशिप पटना के सुनियोजित विस्तार के साथ आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा देने और नागरिकों के जीवन स्तर में सुधार की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।

आने वाले समय में किसानों, भू-स्वामियों, स्थानीय समुदायों और अन्य हितधारकों के साथ संवाद की प्रक्रिया जारी रहेगी। योजना पर मिलने वाले सुझावों और आपत्तियों को शामिल करते हुए इसे अधिक सहभागी और जनहित आधारित बनाने की कोशिश की जाएगी। अगर परियोजना निर्धारित विजन के अनुरूप आगे बढ़ती है, तो पाटलिपुत्र ग्रीनफील्ड सैटेलाइट टाउनशिप बिहार में आधुनिक, टिकाऊ और नागरिक-केंद्रित शहरी विकास का एक बड़ा मॉडल बन सकती है।

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