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Muzaffarnagar Bonded Labour Case: सूखी रोटी, कोड़े और कुत्तों का खौफ… कोर्ट में मजदूरों ने सुनाई डेढ़ साल की दर्दनाक कहानी

उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर जिले के तितावी थाना क्षेत्र के मांडी गांव में संचालित एक दोना फैक्टरी से जुड़े कथित बंधुआ मजदूरी मामले में चौंकाने वाले खुलासे सामने आए हैं।

Muzaffarnagar Bonded Labour Case: सूखी रोटी, कोड़े और कुत्तों का खौफ… कोर्ट में मजदूरों ने सुनाई डेढ़ साल की दर्दनाक कहानी

मुजफ्फरनगर : उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर जिले के तितावी थाना क्षेत्र के मांडी गांव में संचालित एक दोना फैक्टरी से जुड़े कथित बंधुआ मजदूरी मामले में चौंकाने वाले खुलासे सामने आए हैं। पुलिस द्वारा मुक्त कराए गए मजदूरों में से चार के बयान अदालत में दर्ज कराए गए, जिनमें उन्होंने डेढ़ साल तक झेली गई अमानवीय यातनाओं का विस्तृत ब्योरा दिया।

पीड़ितों का आरोप है कि उन्हें 10 से 12 हजार रुपये मासिक वेतन, रहने और खाने की सुविधा का लालच देकर अलग-अलग राज्यों से बुलाया गया था, लेकिन फैक्टरी पहुंचते ही उन्हें बंधक बना लिया गया और जबरन काम कराया गया।

दीवार फांदकर भागे मजदूर ने खोला पूरा राज

मामले का खुलासा राजस्थान निवासी मजदूर विक्रम के फैक्टरी से भाग निकलने के बाद हुआ। मजदूरों के अनुसार, जिस समय सुपरवाइजर शिवा शराब पीने बाहर गया हुआ था और फैक्टरी मालिक भी मौके पर मौजूद नहीं था, उसी दौरान साथियों ने विक्रम को तिरपाल में छिपाकर बाहर निकाला। बाद में उसने दीवार फांदकर जान बचाई और गन्ने के खेतों में छिपते हुए तितावी थाने पहुंच गया।

विक्रम की शिकायत के आधार पर पुलिस ने कार्रवाई करते हुए फैक्टरी में छापा मारा और कई मजदूरों को मुक्त कराया। मजदूरों का कहना है कि विक्रम के भागने की जानकारी मिलने के बाद सुपरवाइजर ने बाकी मजदूरों की बेरहमी से पिटाई की थी।

हमेशा बंद रहता था फैक्टरी का गेट

पीड़ित मजदूरों ने बताया कि फैक्टरी का मुख्य गेट लगभग हर समय बंद रखा जाता था। केवल माल की आवाजाही या संचालकों के आने-जाने पर ही उसे खोला जाता था। गेट पर “कुत्तों से सावधान” का बोर्ड लगा हुआ था, जिससे बाहरी लोगों का वहां पहुंचना भी मुश्किल हो जाता था।

एक मजदूर ने पुलिस को बताया कि वह आठ महीने से वहां काम कर रहा था, लेकिन उसे यह तक नहीं पता था कि उसे किस गांव और किस इलाके में रखा गया है।

सूखी रोटी और लगातार मारपीट का आरोप

मजदूरों ने अदालत और पुलिस के सामने आरोप लगाया कि उन्हें भरपेट भोजन नहीं दिया जाता था। कई बार केवल चोकर मिली सूखी रोटियां देकर पूरे दिन काम कराया जाता था। थकान जताने या विरोध करने पर कोड़े मारे जाते थे।

कुछ मजदूरों ने यह भी आरोप लगाया कि उन्हें डराने के लिए कुत्तों से कटवाया जाता था और शरीर पर नुकीले हथियार या गर्म बल्लम जैसी चीजों से दागा जाता था।

कोर्ट में दर्ज हुए चार मजदूरों के बयान

पुलिस ने मजदूर रंजीत, साहिल, विक्रम और जगदीश के बयान न्यायालय में दर्ज करा दिए हैं। बिहार निवासी संतोष और उज्ज्वल को भी अदालत ले जाया गया था, लेकिन समय की कमी के कारण उनके बयान दर्ज नहीं हो सके।

अधिकारियों के अनुसार अन्य मजदूरों के बयान भी जल्द दर्ज कराए जाएंगे और मामले की जांच आगे बढ़ाई जाएगी।

फैक्टरी मालिक अब भी फरार

पुलिस के मुताबिक फैक्टरी मालिक अंकित बालियान और उसका एक सहयोगी अभी फरार हैं। दोनों की तलाश में लगातार दबिश दी जा रही है और जल्द गिरफ्तारी की उम्मीद जताई जा रही है।

इस बीच बिहार, राजस्थान, उत्तराखंड और अन्य राज्यों से मजदूरों के परिजन तितावी थाने पहुंचने लगे हैं। पुलिस ने सभी परिवारों को सूचना दे दी है और मजदूरों को सुरक्षित उनके घर भेजने की तैयारी की जा रही है।

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