Bihar News: कचरे से कमाई का कमाल! पश्चिम चंपारण की डुमरी पंचायत ने 1700 क्विंटल जैविक खाद बेचकर बनाया आत्मनिर्भरता का मॉडल
बिहार के पश्चिम चंपारण जिले की डुमरी ग्राम पंचायत ने कचरे को समस्या मानने के बजाय उसे कमाई और जैविक खेती का जरिया बनाकर एक मिसाल पेश की है।

Bihar News: कचरे से कमाई का कमाल! पश्चिम चंपारण की डुमरी पंचायत ने 1700 क्विंटल जैविक खाद बेचकर बनाया आत्मनिर्भरता का मॉडल
West Champaran News : बिहार के पश्चिम चंपारण जिले की डुमरी ग्राम पंचायत ने कचरे को समस्या मानने के बजाय उसे कमाई और जैविक खेती का जरिया बनाकर एक मिसाल पेश की है। लोहिया स्वच्छ बिहार अभियान के तहत पंचायत में घर-घर से एकत्र किए जा रहे गीले कचरे, गोबर और कृषि अपशिष्ट से अब तक करीब 1700 क्विंटल जैविक खाद तैयार की जा चुकी है। इस खाद को स्थानीय किसानों को बाजार की तुलना में सस्ते दाम पर उपलब्ध कराया जा रहा है। खास बात यह है कि खाद की बिक्री से मिलने वाली राशि पंचायत के ठोस एवं तरल अपशिष्ट प्रबंधन (SLWM) खाते में जमा की जा रही है, जिसका इस्तेमाल स्वच्छता व्यवस्था को बनाए रखने में किया जा रहा है।
पश्चिम चंपारण के योगापट्टी प्रखंड मुख्यालय से करीब पांच किलोमीटर दूर स्थित डुमरी पंचायत में कुछ वर्ष पहले तक कचरा प्रबंधन बड़ी चुनौती हुआ करता था। घरों, दुकानों और सार्वजनिक जगहों से निकलने वाला कचरा इधर-उधर जमा हो जाता था। इससे गांव की स्वच्छता प्रभावित होने के साथ-साथ स्थानीय पर्यावरण पर भी असर पड़ता था। दूसरी ओर किसान फसलों के लिए महंगे रासायनिक उर्वरकों पर निर्भर थे। अब इसी कचरे को संसाधन में बदलकर पंचायत ने स्वच्छता और कृषि दोनों क्षेत्रों में बदलाव की शुरुआत की है।

1700 क्विंटल जैविक खाद तैयार, किसानों को मिल रहा सस्ता विकल्प
डुमरी पंचायत में घर-घर से इकट्ठा होने वाले गीले कचरे, गोबर और कृषि अवशेषों को वैज्ञानिक तरीके से प्रसंस्करण के लिए भेजा जाता है। पंचायत की अपशिष्ट प्रसंस्करण इकाई यानी Waste Processing Unit (WPU) में इन जैविक सामग्री को संसाधित करके खाद तैयार की जाती है।
अब तक करीब 1700 क्विंटल जैविक खाद तैयार हो चुकी है। पंचायत इसे स्थानीय किसानों को कम कीमत पर उपलब्ध करा रही है। इससे किसानों को अपेक्षाकृत सस्ता जैविक विकल्प मिल रहा है और रासायनिक उर्वरकों पर निर्भरता कम करने की दिशा में भी मदद मिल रही है।

3,430 परिवारों वाले गांव में शुरू हुआ कचरा प्रबंधन का बड़ा अभियान
डुमरी पंचायत में करीब 3,430 परिवार रहते हैं। वर्ष 2023 में ग्रामीण विकास विभाग के अंतर्गत संचालित स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण) और लोहिया स्वच्छ बिहार अभियान के तहत यहां ठोस एवं तरल अपशिष्ट प्रबंधन का काम शुरू किया गया।
पंचायत प्रशासन ने कचरे को केवल निपटाने वाली वस्तु के रूप में देखने के बजाय इसे उपयोगी संसाधन बनाने की दिशा में काम शुरू किया। इसके तहत पंचायत के सभी 15 वार्डों में रोजाना घर-घर कचरा संग्रहण की व्यवस्था बनाई गई।

15 ठेला रिक्शा और एक बैटरी रिक्शा से हो रहा घर-घर कचरा संग्रहण
कचरा संग्रहण को व्यवस्थित बनाने के लिए पंचायत के सभी 15 वार्डों में 15 ठेला रिक्शा और एक बैटरी रिक्शा लगाए गए हैं। इन वाहनों के जरिए घरों से नियमित रूप से कचरा एकत्र किया जाता है और फिर उसे अपशिष्ट प्रसंस्करण इकाई तक पहुंचाया जाता है।
पंचायत के प्रत्येक वार्ड में एक-एक स्वच्छता कर्मी की व्यवस्था की गई है। वहीं पंचायत स्तर पर स्वच्छता से जुड़े कार्यों की निगरानी के लिए एक स्वच्छता पर्यवेक्षक भी योगदान दे रहे हैं। इस व्यवस्था से कचरा संग्रहण और उसके प्रबंधन को नियमित रूप देने की कोशिश की गई है।
गीले और सूखे कचरे का वैज्ञानिक तरीके से हो रहा प्रबंधन
घर-घर से एकत्र किए गए गीले और सूखे कचरे को अलग-अलग तरीके से संसाधित करने की प्रक्रिया अपनाई जा रही है। जैविक कचरे, गोबर और कृषि अपशिष्ट को खाद तैयार करने के लिए इस्तेमाल किया जाता है।
इस व्यवस्था से कचरे को खुले में फेंकने या बेतरतीब तरीके से जमा करने की समस्या को कम करने में मदद मिल रही है। वहीं जैविक कचरे का दोबारा उपयोग होने से यह संसाधन के रूप में पंचायत के लिए उपयोगी साबित हो रहा है।

खाद बेचकर पंचायत की स्वच्छता व्यवस्था को भी मिल रहा सहारा
डुमरी पंचायत की पहल की सबसे खास बात यह है कि जैविक खाद तैयार करने के बाद उसकी बिक्री से मिलने वाली राशि को सीधे SLWM खाते में जमा किया जा रहा है। यानी कचरे से तैयार खाद की बिक्री से होने वाली आय का इस्तेमाल दोबारा गांव की स्वच्छता व्यवस्था को मजबूत करने में किया जा रहा है।
इस राशि से कचरा संग्रहण में इस्तेमाल होने वाले पैडल रिक्शा और ई-रिक्शा की मरम्मत कराई जा रही है। इसके साथ ही स्वच्छता से जुड़ी परिसंपत्तियों के रखरखाव पर भी खर्च किया जा रहा है। इस तरह पंचायत ने कचरा प्रबंधन को एक ऐसी व्यवस्था में बदलने की कोशिश की है, जिसमें स्वच्छता और आय दोनों एक-दूसरे से जुड़े हुए हैं।
डीडीसी बोले- ‘कचरे से समृद्धि’ का उल्लेखनीय उदाहरण
पश्चिम चंपारण के उप विकास आयुक्त काजले विभव नितिन के मुताबिक, डुमरी ग्राम पंचायत ‘कचरे से समृद्धि’ पहल के तहत उल्लेखनीय काम कर रही है। उनके अनुसार पंचायत में घर-घर नियमित कचरा संग्रहण किया जा रहा है और गीले कचरे, गोबर तथा कृषि अपशिष्ट से जैविक खाद तैयार की जा रही है।
उन्होंने बताया कि अब तक करीब 1700 क्विंटल जैविक खाद तैयार हो चुकी है, जिसे स्थानीय किसानों को कम दर पर उपलब्ध कराया जा रहा है। इससे किसानों की उत्पादन लागत को कम करने और जैविक खेती को बढ़ावा देने में मदद मिल रही है।
किसानों की लागत घटाने से लेकर जैविक खेती को बढ़ावा देने तक फायदा
जैविक खाद की स्थानीय स्तर पर उपलब्धता किसानों के लिए कई मायनों में उपयोगी हो सकती है। उन्हें पंचायत स्तर पर तैयार खाद कम कीमत में मिल रही है, वहीं कृषि अपशिष्ट और गोबर जैसे स्थानीय संसाधनों का उपयोग भी बढ़ रहा है।
पंचायत की इस व्यवस्था से एक तरफ कचरे के बेहतर प्रबंधन को बढ़ावा मिल रहा है, तो दूसरी तरफ जैविक खेती के लिए जरूरी इनपुट स्थानीय स्तर पर उपलब्ध हो रहा है। इससे कृषि लागत कम करने और टिकाऊ खेती को प्रोत्साहित करने की दिशा में भी मदद मिल सकती है।
डुमरी पंचायत ने दिखाया कचरे को कमाई में बदलने का रास्ता
डुमरी पंचायत का मॉडल यह दिखाता है कि अगर गांवों में कचरे का व्यवस्थित और वैज्ञानिक प्रबंधन किया जाए, तो उसका इस्तेमाल स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के लिए भी किया जा सकता है। यहां कचरा संग्रहण से लेकर प्रसंस्करण, खाद निर्माण और बिक्री तक पूरी प्रक्रिया को पंचायत की स्वच्छता व्यवस्था से जोड़ा गया है।
खाद से मिलने वाली आय का इस्तेमाल फिर स्वच्छता संसाधनों के रखरखाव में किया जा रहा है। इस तरह एक तरफ गांव में साफ-सफाई को बढ़ावा मिल रहा है, दूसरी तरफ पंचायत के लिए अतिरिक्त आय का स्रोत तैयार हुआ है और किसानों को सस्ती जैविक खाद उपलब्ध हो रही है।
स्वच्छ गांव और आत्मनिर्भर पंचायत की दिशा में बड़ी पहल
डुमरी पंचायत की पहल केवल कचरा निपटाने तक सीमित नहीं है। यह स्वच्छता, रोजगार, कृषि और स्थानीय आर्थिक आत्मनिर्भरता को एक साथ जोड़ने की कोशिश है। घर-घर कचरा संग्रहण से लेकर जैविक खाद बनाने और उसकी बिक्री से प्राप्त राशि को दोबारा स्वच्छता व्यवस्था पर खर्च करने तक, पूरी प्रक्रिया एक सर्कुलर मॉडल की तरह काम कर रही है।
अगर इस तरह की व्यवस्था को अन्य ग्रामीण क्षेत्रों में भी स्थानीय जरूरतों के अनुसार लागू किया जाता है, तो कचरा प्रबंधन को लेकर गांवों की चुनौतियों को कम करने के साथ-साथ जैविक खेती और पंचायत स्तर पर आर्थिक गतिविधियों को भी बढ़ावा दिया जा सकता है। पश्चिम चंपारण की डुमरी पंचायत ने फिलहाल इसी दिशा में एक प्रभावी उदाहरण पेश किया है।




