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26 जनवरी गणतंत्र दिवस के पावन अवसर पर एनपीयू कुलपति डॉ. दिनेश कुमार सिंह का प्रेरक संदेश

नीलांबर-पीतांबर विश्वविद्यालय (एनपीयू), पलामू में 77वां गणतंत्र दिवस समारोह गरिमामय एवं राष्ट्रभक्ति से ओत-प्रोत वातावरण में मनाया गया।

26 जनवरी गणतंत्र दिवस के पावन अवसर पर एनपीयू कुलपति डॉ. दिनेश कुमार सिंह का प्रेरक संदेश

मेदिनीनगर : नीलांबर-पीतांबर विश्वविद्यालय (एनपीयू), पलामू में 77वां गणतंत्र दिवस समारोह गरिमामय एवं राष्ट्रभक्ति से ओत-प्रोत वातावरण में मनाया गया। इस अवसर पर विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. दिनेश कुमार सिंह ने शहीद नीलांबर-पीतांबर के चित्र पर माल्यार्पण कर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की।

इसके पश्चात विभिन्न संबद्ध कॉलेजों की एनसीसी टुकड़ियों द्वारा प्रस्तुत आकर्षक परेड का उन्होंने निरीक्षण किया तथा कैडेट्स के अनुशासन, समर्पण एवं राष्ट्रभक्ति की भावना की सराहना की।

इसके उपरांत कुलपति डॉ. दिनेश कुमार सिंह ने विश्वविद्यालय परिवार, विद्यार्थियों, शोधार्थियों, शिक्षकों, कर्मियों एवं आम नागरिकों को गणतंत्र दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं देते हुए अपना प्रेरक संदेश दिया। उन्होंने कहा कि भारत का गणतंत्र दिवस हमारे लोकतांत्रिक मूल्यों, संविधान की सर्वोच्चता और राष्ट्रीय एकता का प्रतीक है।

डॉ. सिंह ने कहा कि 26 जनवरी 1950 भारतीय इतिहास का स्वर्णिम दिन है, जब भारत एक संपूर्ण स्वतंत्र, संप्रभु, समाजवादी, धर्मनिरपेक्ष एवं लोकतांत्रिक गणराज्य के रूप में स्थापित हुआ। डॉ. भीमराव अंबेडकर के नेतृत्व में निर्मित भारतीय संविधान ने देश के प्रत्येक नागरिक को समान अधिकार, न्याय, स्वतंत्रता और समान अवसर प्रदान किए हैं।

उन्होंने कहा कि आज भारत आर्थिक, सामाजिक, सांस्कृतिक और राजनीतिक सभी क्षेत्रों में निरंतर प्रगति के पथ पर अग्रसर है। विश्व के सबसे बड़े लोकतंत्र के रूप में हमारा देश महान जननायकों, अमर शहीदों, वैज्ञानिकों और विचारकों के सपनों को साकार कर रहा है। झारखंड की वीर धरती पर जन्मे भगवान बिरसा मुंडा एवं शहीद नीलांबर-पीतांबर जैसे महान नायकों की गौरवशाली परंपरा हम सभी को राष्ट्र निर्माण के लिए निरंतर प्रेरणा देती है।

कुलपति ने कहा कि वैश्विक स्तर पर कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) जैसी नई चुनौतियों के दौर में संविधानिक मूल्यों के अनुरूप लोकतंत्र को और अधिक सुदृढ़ करना समय की आवश्यकता है। इस दिशा में शिक्षा की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। नीलांबर-पीतांबर विश्वविद्यालय राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) 2020 के अनुरूप गुणवत्तापूर्ण, रोजगारोन्मुखी एवं नवाचार आधारित शिक्षा प्रदान करने के लिए सतत प्रयासरत है।

उन्होंने बताया कि विश्वविद्यालय में कला, विज्ञान, वाणिज्य, विधि, शिक्षा, सामाजिक विज्ञान, मेडिकल, होटल मैनेजमेंट, पत्रकारिता, एमबीए, एमसीए, बायोटेक्नोलॉजी सहित अनेक आधुनिक एवं व्यावसायिक पाठ्यक्रम संचालित किए जा रहे हैं। साथ ही विश्वविद्यालय में समृद्ध पुस्तकालय, डिजिटल लैब, ई-लर्निंग संसाधन, संगोष्ठी एवं सेमिनार हॉल जैसी शैक्षणिक सुविधाओं का निरंतर विस्तार किया जा रहा है, जिससे विद्यार्थियों एवं शोधार्थियों को बेहतर शैक्षणिक वातावरण उपलब्ध हो सके।

डॉ. सिंह ने कहा कि एनपीयू आज अपनी एक नई पहचान स्थापित कर रहा है और यहां के विद्यार्थी एवं शोधार्थी वैश्विक प्रतिस्पर्धा में स्वयं को सिद्ध करने के लिए पूरी तरह सक्षम हैं। विश्वविद्यालय का उद्देश्य पलामू सहित लातेहार, गढ़वा एवं संथाल परगना जैसे दूरस्थ एवं पिछड़े क्षेत्रों के विद्यार्थियों को भी उच्च शिक्षा की मुख्यधारा से जोड़ना है।

कार्यक्रम के दौरान विश्वविद्यालय के कुलसचिव डॉ. नफीस अहमद द्वारा उपस्थित सभी अधिकारियों, शिक्षकों, कर्मचारियों एवं विद्यार्थियों को संविधान की शपथ दिलाई गई। इस अवसर पर कुलानुशासक डॉ. आर.के. झा, डीएसडब्ल्यू डॉ. एस.के. पांडेय, सीसीडीसी डॉ. मनोरमा सिंह, विभिन्न विभागाध्यक्ष, संकायाध्यक्ष, संबद्ध कॉलेजों के प्राचार्य, शिक्षक, शिक्षकेतर कर्मचारी एवं बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे।

अपने संदेश के अंत में कुलपति ने विश्वविद्यालय के सभी शिक्षक, कर्मचारी, विद्यार्थी एवं शोधार्थियों के योगदान की सराहना करते हुए कहा कि डिजिटल इंडिया, स्टार्टअप इंडिया, आत्मनिर्भर भारत एवं विकसित भारत–2047 के संकल्प को साकार करने में युवा वर्ग की भूमिका सर्वाधिक महत्वपूर्ण है। उन्होंने सभी से संविधान की गरिमा बनाए रखने तथा शिक्षा, सेवा एवं अनुशासन के माध्यम से राष्ट्र को सशक्त, समृद्ध और विकसित बनाने में सक्रिय योगदान देने का आह्वान किया।

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