मरांगबुरू की धरती पर गूंजा आदिवासी एकजुटता का संदेश, दो दिवसीय धोरोमगाढ़ महासम्मेलन का भव्य आगाज
गिरिडीह विश्व प्रसिद्ध मरांगबुरू की पावन धरती मधुबन, पीरटांड़ में मरांगबुरू बचाओ समिति के तत्वावधान में आयोजित दो दिवसीय विश्व स्तरीय मरांगबुरू धोरोमगाढ़ महासम्मेलन का बुधवार, 04 नवंबर को भव्य आगाज हुआ।

मरांगबुरू की धरती पर गूंजा आदिवासी एकजुटता का संदेश, दो दिवसीय धोरोमगाढ़ महासम्मेलन का भव्य आगाज
मधुबन के दिशोम मांझीथान में जुटे झारखंड समेत कई राज्यों और पड़ोसी देशों के आदिवासी प्रतिनिधि, पारंपरिक पूजा-अर्चना और सांस्कृतिक झंडोलन से गूंजा मरांगबुरू क्षेत्र
गिरिडीह, मनोज कुमार।
गिरिडीह : विश्व प्रसिद्ध मरांगबुरू की पावन धरती मधुबन, पीरटांड़ में मरांगबुरू बचाओ समिति के तत्वावधान में आयोजित दो दिवसीय विश्व स्तरीय मरांगबुरू धोरोमगाढ़ महासम्मेलन का बुधवार, 04 नवंबर को भव्य आगाज हुआ। महासम्मेलन के पहले दिन दिशोम मांझीथान में पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ पूजा-अर्चना कर कार्यक्रम की शुरुआत की गई। इस दौरान पूरा क्षेत्र आदिवासी आस्था, परंपरा और सांस्कृतिक एकजुटता के रंग में रंगा नजर आया।

पूजा-अर्चना में मरांगबुरू बचाओ संघर्ष समिति के अध्यक्ष फागु बेसरा, महासचिव हीरालाल मांझी, डॉ. जगजीवन मुर्मू, सोमय टुडू, जंशाई मारडी, दुर्गा चरण मुर्मू, रमेश टुडू, सोनाराम हेंब्रम, एतो बास्के, नारायण मुर्मू और महावीर बास्के सहित कई गणमान्य लोग शामिल हुए।
पूजा-अर्चना के उपरांत दिशोम मांझीथान के समीप पारंपरिक तरीके से आदिवासी सांस्कृतिक झंडोलन किया गया। इस अवसर पर बड़ी संख्या में आदिवासी श्रद्धालुओं और प्रतिनिधियों की मौजूदगी ने महासम्मेलन को खास बना दिया।

महासम्मेलन में झारखंड के सभी जिलों के अलावा बिहार, पश्चिम बंगाल, ओडिशा, असम, नेपाल और बांग्लादेश से भी आदिवासी प्रतिनिधियों का जुटान हुआ। विभिन्न क्षेत्रों से पहुंचे प्रतिनिधियों की भागीदारी ने इस आयोजन को अंतरराष्ट्रीय स्वरूप प्रदान किया।
कार्यक्रम के सफल संचालन में सुरेंद्र टुडू (जमशेदपुर), गिरिडीह जिला अध्यक्ष महावीर मुर्मू, सचिव विष्णु किस्कू, विदेश सोरेन, सनातन सोरेन, अजय हेंब्रम, सोनाराम हेंब्रम, अनिल टुडू, महेश सोरेन और रमेश हेंब्रम सहित अन्य लोगों की सराहनीय भूमिका रही।
वहीं, सांस्कृतिक मंडली की अगुवाई दीपीन सोरेन, चन्द्रमोहन मुर्मू, शनिवार बेसरा, अशोक मुर्मू, भगवान किस्कू और राजेश हांसदा ने की।
महासम्मेलन के पहले दिन उमड़ी भारी भीड़ और विभिन्न राज्यों के साथ पड़ोसी देशों से पहुंचे प्रतिनिधियों की भागीदारी ने यह संदेश दिया कि मरांगबुरू आदिवासी समाज की आस्था, पहचान और सांस्कृतिक विरासत का महत्वपूर्ण केंद्र है। अब सभी की निगाहें महासम्मेलन के दूसरे दिन होने वाले कार्यक्रमों पर टिकी हैं।



