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बिहार के 20 हजार डेयरी किसानों की बढ़ेगी आमदनी! जीविका और आगा खान फाउंडेशन ने शुरू किया ‘प्रोजेक्ट धेनु धारा’

बिहार में छोटे और सीमांत डेयरी किसानों की आय बढ़ाने, दूध उत्पादन में सुधार करने और पशुओं के बेहतर स्वास्थ्य प्रबंधन को बढ़ावा देने के लिए ‘प्रोजेक्ट धेनु धारा’ की शुरुआत की गई है।

बिहार के 20 हजार डेयरी किसानों की बढ़ेगी आमदनी! जीविका और आगा खान फाउंडेशन ने शुरू किया ‘प्रोजेक्ट धेनु धारा’

पटना: बिहार में छोटे और सीमांत डेयरी किसानों की आय बढ़ाने, दूध उत्पादन में सुधार करने और पशुओं के बेहतर स्वास्थ्य प्रबंधन को बढ़ावा देने के लिए ‘प्रोजेक्ट धेनु धारा’ की शुरुआत की गई है। जीविका (BRLPS) और आगा खान फाउंडेशन की साझेदारी से शुरू की गई यह दो वर्षीय परियोजना ग्रामीण बिहार में डेयरी आधारित आजीविका को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है। इसके तहत मुजफ्फरपुर और नालंदा जिलों में लगभग 20,000 डेयरी किसानों तक पहुंचने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। परियोजना के माध्यम से दूध उत्पादन में 10 प्रतिशत तक और छोटे डेयरी किसानों की आय में 20 प्रतिशत तक वृद्धि लाने का प्रयास किया जाएगा।

जीविका और आगा खान फाउंडेशन के बीच हुआ समझौता

‘प्रोजेक्ट धेनु धारा’ के शुभारंभ के अवसर पर पटना में एक कार्यशाला का सफल आयोजन किया गया। परियोजना के प्रभावी और सुचारू क्रियान्वयन के लिए जीविका (BRLPS) तथा आगा खान फाउंडेशन के बीच समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए गए। इस साझेदारी का उद्देश्य तकनीकी विशेषज्ञता और सामुदायिक नेटवर्क के सहयोग से डेयरी किसानों के लिए बेहतर पशुपालन सेवाएं उपलब्ध कराना है।

कार्यशाला में जीविका के निदेशक (उद्यम) श्री विनय कुमार राय, डॉ. राकेश (एसपीएम–लाइवस्टॉक), परियोजना प्रबंधक श्री सुमित कपूर, डॉ. अजय, नालंदा के डीपीएम श्री संजय, मुजफ्फरपुर की डीपीएम सुश्री अनीशा, आगा खान फाउंडेशन इंडिया की सीईओ सुश्री टिन्नी, रफे एजाज हुसैन (एसपीएम), नवनीत और डॉ. सरोज सहित अन्य प्रमुख प्रतिनिधि उपस्थित रहे।

डेयरी किसानों की उत्पादकता और आय बढ़ाना मुख्य लक्ष्य

कार्यशाला को संबोधित करते हुए जीविका के निदेशक (उद्यम) श्री विनय कुमार राय ने कहा कि ‘प्रोजेक्ट धेनु धारा’ के माध्यम से डेयरी आधारित आजीविका को सुदृढ़ करने की दिशा में काम किया जाएगा। परियोजना का प्रमुख उद्देश्य छोटे एवं सीमांत डेयरी किसानों की उत्पादकता और आय में वृद्धि करना तथा समुदाय आधारित पशुपालन सेवाओं को मजबूत बनाना है।

उन्होंने कहा कि जीविका के व्यापक सामुदायिक नेटवर्क और आगा खान फाउंडेशन की तकनीकी विशेषज्ञता के समन्वय से एक प्रभावी एवं टिकाऊ डेयरी विकास मॉडल तैयार करने की दिशा में प्रयास किया जाएगा। इससे किसानों की आमदनी बढ़ाने के साथ महिला पशु सखियों के लिए भी स्थायी आजीविका के अवसर विकसित करने में मदद मिलेगी।

मुजफ्फरपुर और नालंदा के 20 हजार किसानों तक पहुंचेगी परियोजना

कार्यशाला के दौरान आगा खान फाउंडेशन इंडिया की सीईओ सुश्री टिन्नी ने परियोजना की विस्तृत रूपरेखा प्रस्तुत की। उन्होंने बताया कि ‘प्रोजेक्ट धेनु धारा’ को बिहार के मुजफ्फरपुर और नालंदा जिलों में लागू किया जाएगा।

परियोजना के तहत पहले से प्रशिक्षित 200 महिला पशु सखियों के माध्यम से करीब 20,000 डेयरी किसानों तक पहुंच बनाने का लक्ष्य रखा गया है। ये महिला पशु सखियां किसानों को पशुओं के पोषण, स्वास्थ्य देखभाल, संतुलित आहार और स्थानीय ज्ञान आधारित पशु चिकित्सा पद्धतियों के बारे में जानकारी एवं तकनीकी सहयोग प्रदान करेंगी।

इस व्यवस्था के माध्यम से गांवों में ही पशुपालन संबंधी सेवाओं की उपलब्धता बेहतर बनाने और किसानों को वैज्ञानिक तरीकों से डेयरी व्यवसाय संचालित करने के लिए प्रोत्साहित करने पर जोर दिया जाएगा।

संतुलित आहार और पशु स्वास्थ्य प्रबंधन पर रहेगा विशेष जोर

‘प्रोजेक्ट धेनु धारा’ के अंतर्गत पशुओं के पोषण और स्वास्थ्य में सुधार लाने के लिए वैज्ञानिक तकनीकों के साथ स्थानीय ज्ञान पर आधारित पद्धतियों को बढ़ावा दिया जाएगा। इसमें मुख्य रूप से राशन संतुलन कार्यक्रम (Ration Balancing Programme–RBP) और एथनो-वेटरनरी मेडिसिन (Ethno-Veterinary Medicine–EVM) को शामिल किया गया है।

राशन संतुलन कार्यक्रम के माध्यम से पशुओं को उनकी पोषण संबंधी जरूरतों के अनुरूप संतुलित आहार उपलब्ध कराने पर ध्यान दिया जाएगा। वहीं, एथनो-वेटरनरी मेडिसिन के तहत स्थानीय ज्ञान और पारंपरिक पशु देखभाल पद्धतियों के उपयोग को प्रोत्साहित किया जाएगा।

राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड (NDDB) के तकनीकी सहयोग से संचालित होने वाली इस परियोजना का उद्देश्य पशुओं के पोषण एवं स्वास्थ्य प्रबंधन को बेहतर बनाना और डेयरी व्यवसाय को अधिक लाभकारी तथा टिकाऊ बनाना है।

दूध उत्पादन में 10% और किसानों की आय में 20% वृद्धि का लक्ष्य

परियोजना के तहत डेयरी किसानों को आर्थिक रूप से मजबूत बनाने के लिए स्पष्ट लक्ष्य निर्धारित किए गए हैं। इसके अंतर्गत दूध उत्पादन में 10 प्रतिशत तक वृद्धि और छोटे डेयरी किसानों की आय में 20 प्रतिशत तक बढ़ोतरी का लक्ष्य रखा गया है।

इन लक्ष्यों को हासिल करने के लिए पशुओं के संतुलित पोषण, बेहतर स्वास्थ्य प्रबंधन और वैज्ञानिक पशुपालन पद्धतियों को अपनाने पर जोर दिया जाएगा। परियोजना में पशुओं के ड्राई पीरियड यानी दो दुग्ध उत्पादन अवधियों के बीच के शुष्क समय को कम करने पर भी विशेष ध्यान दिया जाएगा।

इसके साथ ही पशुओं के बेहतर पोषण और स्वास्थ्य देखभाल के माध्यम से एंटीबायोटिक्स के अनावश्यक उपयोग को कम करने का प्रयास किया जाएगा। इससे पशुओं की देखभाल की गुणवत्ता में सुधार लाने और डेयरी व्यवसाय को अधिक टिकाऊ बनाने में मदद मिलने की उम्मीद है।

महिला पशु सखियों के लिए खुलेंगे आजीविका के नए अवसर

इस परियोजना का एक महत्वपूर्ण उद्देश्य ग्रामीण महिलाओं के लिए स्थायी रोजगार और आजीविका के अवसरों को मजबूत करना भी है। प्रशिक्षित महिला पशु सखियां गांवों में डेयरी किसानों को पशु पोषण, स्वास्थ्य प्रबंधन, संतुलित आहार और एथनो-वेटरनरी सेवाओं से जुड़ा तकनीकी सहयोग प्रदान करेंगी।

इससे एक ओर किसानों को पशुपालन संबंधी जरूरी जानकारी और सेवाएं मिल सकेंगी, वहीं दूसरी ओर महिला पशु सखियों को अपनी विशेषज्ञता के माध्यम से आजीविका के अवसर विकसित करने में सहायता मिलेगी। इस पहल में महिलाओं की भागीदारी को ग्रामीण अर्थव्यवस्था और डेयरी क्षेत्र के विकास से जोड़ने पर विशेष ध्यान दिया गया है।

ग्रामीण बिहार में टिकाऊ डेयरी विकास को मिलेगा बढ़ावा

‘प्रोजेक्ट धेनु धारा’ को ग्रामीण बिहार में समुदाय आधारित, महिला-नेतृत्व वाले और टिकाऊ डेयरी विकास मॉडल को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। जीविका और आगा खान फाउंडेशन की साझेदारी से छोटे एवं सीमांत किसानों तक तकनीकी जानकारी पहुंचाने, पशुओं के स्वास्थ्य और पोषण में सुधार करने तथा डेयरी व्यवसाय की लाभप्रदता बढ़ाने की दिशा में काम किया जाएगा।

दो वर्षीय इस परियोजना के माध्यम से मुजफ्फरपुर और नालंदा में डेयरी किसानों, महिला पशु सखियों और पशुपालन से जुड़े अन्य हितधारकों को दीर्घकालिक लाभ पहुंचाने का लक्ष्य रखा गया है। बेहतर पशु प्रबंधन, महिला नेतृत्व और समुदाय आधारित सेवाओं के समन्वय से बिहार के ग्रामीण क्षेत्रों में डेयरी आधारित आजीविका को नई मजबूती मिलने की उम्मीद है।

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