बिहार के डेयरी किसानों की बढ़ेगी कमाई! जीविका और आगा खान फाउंडेशन ने शुरू किया ‘प्रोजेक्ट धेनु धारा’, 20 हजार किसानों को मिलेगा लाभ
बिहार में छोटे और सीमांत डेयरी किसानों की आय बढ़ाने, दूध उत्पादन में सुधार लाने और पशुओं के स्वास्थ्य को बेहतर बनाने के उद्देश्य से जीविका और आगा खान फाउंडेशन ने महत्वपूर्ण पहल की है।

बिहार के डेयरी किसानों की बढ़ेगी कमाई! जीविका और आगा खान फाउंडेशन ने शुरू किया ‘प्रोजेक्ट धेनु धारा’, 20 हजार किसानों को मिलेगा लाभ
पटना: बिहार में छोटे और सीमांत डेयरी किसानों की आय बढ़ाने, दूध उत्पादन में सुधार लाने और पशुओं के स्वास्थ्य को बेहतर बनाने के उद्देश्य से जीविका और आगा खान फाउंडेशन ने महत्वपूर्ण पहल की है। दोनों संस्थाओं के सहयोग से ‘प्रोजेक्ट धेनु धारा’ के शुभारंभ के लिए कार्यशाला का सफल आयोजन किया गया। दो वर्ष की इस परियोजना के माध्यम से बिहार में डेयरी आधारित आजीविका को मजबूत करने, वैज्ञानिक पशुपालन पद्धतियों को बढ़ावा देने और ग्रामीण महिलाओं के लिए रोजगार के नए अवसर विकसित करने पर जोर दिया जाएगा।
परियोजना के तहत मुजफ्फरपुर और नालंदा जिलों में काम किया जाएगा। इसके माध्यम से पहले से प्रशिक्षित 200 महिला ‘पशु सखियों’ की मदद से लगभग 20,000 डेयरी किसानों तक पहुंचने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। परियोजना में दूध उत्पादन और किसानों की आमदनी बढ़ाने के साथ पशुओं के पोषण, स्वास्थ्य प्रबंधन तथा डेयरी व्यवसाय को अधिक लाभकारी और टिकाऊ बनाने पर विशेष ध्यान दिया जाएगा।

जीविका और आगा खान फाउंडेशन के बीच हुआ समझौता
‘प्रोजेक्ट धेनु धारा’ के प्रभावी और व्यवस्थित क्रियान्वयन के लिए जीविका यानी बिहार ग्रामीण आजीविका संवर्द्धन सोसाइटी (BRLPS) और आगा खान फाउंडेशन के बीच समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए गए। इस साझेदारी का उद्देश्य दोनों संस्थाओं के अनुभव, सामुदायिक नेटवर्क और तकनीकी विशेषज्ञता का उपयोग कर डेयरी क्षेत्र में एक प्रभावी एवं टिकाऊ मॉडल विकसित करना है।
कार्यशाला में जीविका के निदेशक (उद्यम) श्री विनय कुमार राय, डॉ. राकेश (एसपीएम–लाइवस्टॉक), परियोजना प्रबंधक श्री सुमित कपूर, डॉ. अजय, नालंदा के डीपीएम श्री संजय, मुजफ्फरपुर की डीपीएम सुश्री अनीशा, आगा खान फाउंडेशन इंडिया की सीईओ सुश्री टिन्नी, रफे एजाज हुसैन (एसपीएम), नवनीत और डॉ. सरोज समेत अन्य प्रमुख प्रतिनिधि उपस्थित रहे।

छोटे और सीमांत डेयरी किसानों की आय बढ़ाने पर जोर
कार्यक्रम के दौरान जीविका के निदेशक (उद्यम) श्री विनय कुमार राय ने ‘प्रोजेक्ट धेनु धारा’ को डेयरी आधारित आजीविका मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल बताया। उन्होंने कहा कि परियोजना का प्रमुख उद्देश्य छोटे एवं सीमांत डेयरी किसानों की उत्पादकता और आय में वृद्धि करना तथा समुदाय आधारित पशुपालन सेवाओं को सशक्त बनाना है।
उन्होंने बताया कि जीविका के व्यापक सामुदायिक नेटवर्क और आगा खान फाउंडेशन की तकनीकी विशेषज्ञता के समन्वय से एक प्रभावी और टिकाऊ डेयरी विकास मॉडल तैयार करने की दिशा में काम किया जाएगा। इससे किसानों को डेयरी व्यवसाय में बेहतर परिणाम प्राप्त करने में मदद मिलने के साथ महिला पशु सखियों के लिए भी स्थायी आजीविका के अवसर पैदा किए जा सकेंगे।
मुजफ्फरपुर और नालंदा के 20 हजार किसानों तक पहुंचने का लक्ष्य
कार्यशाला में आगा खान फाउंडेशन इंडिया की सीईओ सुश्री टिन्नी ने परियोजना की विस्तृत रूपरेखा प्रस्तुत की। उन्होंने बताया कि ‘प्रोजेक्ट धेनु धारा’ का क्रियान्वयन बिहार के मुजफ्फरपुर और नालंदा जिलों में किया जाएगा।
परियोजना के तहत 200 प्रशिक्षित महिला पशु सखियों के माध्यम से लगभग 20,000 डेयरी किसानों तक पहुंच बनाने की योजना है। ये पशु सखियां किसानों को पशुओं के पोषण, स्वास्थ्य और बेहतर देखभाल से संबंधित जानकारी एवं तकनीकी सहयोग प्रदान करेंगी। इससे ग्रामीण क्षेत्रों में पशुपालन सेवाओं की पहुंच बढ़ाने और किसानों को वैज्ञानिक तरीकों से डेयरी व्यवसाय संचालित करने में सहायता मिलने की उम्मीद है।
वैज्ञानिक पशुपालन पद्धतियों से सुधरेगा पशुओं का पोषण और स्वास्थ्य
‘प्रोजेक्ट धेनु धारा’ के अंतर्गत पशुओं के बेहतर पोषण और स्वास्थ्य प्रबंधन के लिए वैज्ञानिक तरीकों के साथ स्थानीय ज्ञान पर आधारित प्रथाओं को भी प्रोत्साहित किया जाएगा। परियोजना में मुख्य रूप से राशन संतुलन कार्यक्रम (Ration Balancing Programme–RBP) और एथनो-वेटरनरी मेडिसिन (Ethno-Veterinary Medicine–EVM) पर ध्यान दिया जाएगा।
राशन संतुलन कार्यक्रम के माध्यम से पशुओं को उनकी पोषण संबंधी जरूरतों के अनुरूप संतुलित आहार देने की पद्धति को बढ़ावा मिलेगा। वहीं, एथनो-वेटरनरी मेडिसिन के अंतर्गत स्थानीय ज्ञान और पारंपरिक पशु चिकित्सा संबंधी प्रथाओं का उपयोग किया जाएगा।
राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड (NDDB) के तकनीकी सहयोग से संचालित होने वाली यह पहल पशुओं के पोषण एवं स्वास्थ्य प्रबंधन को बेहतर बनाने के साथ डेयरी व्यवसाय की उत्पादकता और स्थिरता बढ़ाने पर केंद्रित है।
दूध उत्पादन में 10% और किसानों की आय में 20% वृद्धि का लक्ष्य
परियोजना के तहत डेयरी किसानों के लिए उत्पादन और आमदनी बढ़ाने के स्पष्ट लक्ष्य निर्धारित किए गए हैं। इसके अंतर्गत दूध उत्पादन में 10 प्रतिशत तक वृद्धि और छोटे डेयरी किसानों की आय में 20 प्रतिशत तक बढ़ोतरी का लक्ष्य रखा गया है।
इन लक्ष्यों को हासिल करने के लिए पशुओं के संतुलित पोषण, उचित आहार प्रबंधन, स्वास्थ्य देखभाल और वैज्ञानिक पशुपालन पद्धतियों को बढ़ावा दिया जाएगा। बेहतर पोषण और स्वास्थ्य प्रबंधन के माध्यम से एंटीबायोटिक्स के अनावश्यक इस्तेमाल को कम करने पर भी विशेष ध्यान दिया जाएगा।
इसके अलावा, पशुओं के ड्राई पीरियड यानी दो दुग्ध उत्पादन अवधियों के बीच दूध न देने की अवधि को कम करने की दिशा में भी काम किया जाएगा। इन प्रयासों का उद्देश्य पशुओं के स्वास्थ्य को बेहतर बनाए रखने के साथ किसानों के डेयरी व्यवसाय को अधिक उत्पादक और लाभकारी बनाना है।
महिला पशु सखियों के लिए बनेंगे रोजगार और स्वरोजगार के अवसर
‘प्रोजेक्ट धेनु धारा’ की एक अहम विशेषता ग्रामीण महिलाओं के लिए स्थायी आजीविका के अवसर पैदा करना है। परियोजना के अंतर्गत प्रशिक्षित महिला पशु सखियां डेयरी किसानों को पशु पोषण, स्वास्थ्य प्रबंधन, राशन संतुलन और एथनो-वेटरनरी सेवाओं से जुड़ा तकनीकी सहयोग देंगी।
इस व्यवस्था से किसानों को स्थानीय स्तर पर पशुपालन संबंधी मार्गदर्शन प्राप्त करने में मदद मिलेगी। साथ ही, महिला पशु सखियों को अपनी विशेषज्ञता के माध्यम से आजीविका के अवसर विकसित करने का मौका मिलेगा। इससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था में महिलाओं की भागीदारी और समुदाय आधारित सेवाओं को भी मजबूती मिलने की उम्मीद है।
ग्रामीण बिहार में टिकाऊ डेयरी विकास की दिशा में पहल
जीविका और आगा खान फाउंडेशन की साझेदारी से शुरू की गई ‘प्रोजेक्ट धेनु धारा’ का लक्ष्य किसानों की आमदनी बढ़ाने तक सीमित नहीं है। यह पहल पशुओं के स्वास्थ्य, संतुलित पोषण, वैज्ञानिक पशुपालन, महिला सशक्तीकरण और समुदाय आधारित सेवाओं को एक साथ मजबूत करने पर केंद्रित है।
मुजफ्फरपुर और नालंदा में परियोजना के क्रियान्वयन के माध्यम से छोटे और सीमांत डेयरी किसानों, महिला पशु सखियों और व्यापक डेयरी इकोसिस्टम को दीर्घकालिक लाभ पहुंचाने की उम्मीद है। दो वर्षीय इस परियोजना के जरिए ग्रामीण बिहार में महिला-नेतृत्व वाले, समुदाय आधारित और टिकाऊ डेयरी विकास मॉडल को मजबूत करने की दिशा में काम किया जाएगा।




