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पद्मश्री बुलू इमाम की मौजूदगी में सोहराय महोत्सव का भव्य शुभारंभ, झारखंडी संस्कृति के रंग में रंगा संत कोलंबा मैदान

झारखंड की समृद्ध लोककला, संस्कृति और परंपरा को संरक्षित एवं प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से बुधवार को संत कोलंबा कॉलेज मैदान में दो दिवसीय सोहराय महोत्सव का भव्य शुभारंभ हुआ।

पद्मश्री बुलू इमाम की मौजूदगी में सोहराय महोत्सव का भव्य शुभारंभ, झारखंडी संस्कृति के रंग में रंगा संत कोलंबा मैदान

लोकगीत, लोकनृत्य और फैशन शो ने मोहा मन, 5 नवंबर को खोरठा-नागपुरी के उभरते कलाकारों की प्रस्तुतियों के साथ होगा समापन

हजारीबाग : झारखंड की समृद्ध लोककला, संस्कृति और परंपरा को संरक्षित एवं प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से बुधवार को संत कोलंबा कॉलेज मैदान में दो दिवसीय सोहराय महोत्सव का भव्य शुभारंभ हुआ। हो एंटरटेनमेंट कल्चरल टीम एवं सोहराय महोत्सव आयोजन समिति की ओर से आयोजित इस महोत्सव में मुख्य अतिथि पद्मश्री बुलू इमाम उपस्थित रहे। कार्यक्रम में गुस्ताख इमाम,, हो एंटरटेनमेंट के संरक्षक चंदन सिंह, झामुमो युवा नेता रामा सोनीसदर अंचल प्रभारी आशुतोष, एसी महेंद्र छोटन उरांव, हजारीबाग युवा नेता विक्की कुमार धान, पवन सिंह सहित जिला प्रशासन के प्रतिनिधि एवं कई गणमान्य लोग मौजूद रहे।

पद्मश्री बुलू इमाम की धर्मपत्नी भी कार्यक्रम में उपस्थित रहीं। महोत्सव के पहले दिन सोलो सिंगिंग, ग्रुप सिंगिंग, सोलो डांस, ग्रुप डांस और फैशन शो के माध्यम से कलाकारों ने अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन किया। सोलो सिंगिंग में भीम आर्या, आरती कुमारी, किरण देवी, नूतन, सृष्टि चंद्रवंशी, रीना लिंडा, लक्ष्मी कुमारी, काव्या राज और प्रतिमा यादव ने अपनी प्रस्तुतियां दीं। वहीं ग्रुप सिंगिंग में रेनबो म्यूजिकल एवं एमडी ग्रुप ऑफ थिएटर ने प्रस्तुति देकर दर्शकों का मनोरंजन किया।

सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने दर्शकों का मन मोह लिया। हस्तशिल्प प्रदर्शनी और झारखंडी खानपान के स्टॉल भी लोगों के आकर्षण का केंद्र बने। पूरे परिसर में झारखंडी कला, संस्कृति और परंपरा की अनूठी झलक देखने को मिली। मुख्य अतिथि पद्मश्री बुलू इमाम ने कहा कि झारखंड की सोहराय और कोहबर कला को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिल रही है। अब भारत में आयोजित होने वाले बिनाले में भी सोहराय कला की प्रदर्शनी लगाई जाएगी। उन्होंने कहा कि विदेशों में अब तक सोहराय कला की 70 प्रदर्शनियां लगाई जा चुकी हैं। बिनाले का भारत आना उनके लिए खुशी की बात है।

उन्होंने इसकी तुलना ऑस्कर जैसी प्रतिष्ठित पहचान से करते हुए कहा कि सोहराय कला आज दुनिया में अपनी अलग पहचान बना रही है। गुस्ताख इमाम ने आयोजन में सहयोग के लिए हो एंटरटेनमेंट की पूरी टीम और जिला प्रशासन का आभार जताया। उन्होंने कहा कि हमारी परंपरा का पहला अंग मिट्टी के घरों में जीवित है। सोहराय कला को देश-विदेश में पहचान दिलाने का प्रयास लगातार जारी है।उन्होंने बताया कि 4 दिसंबर को आयोजित होने वाले इंडिया बिनाले में भी सोहराय कला की गैलरी प्रदर्शित की जाएगी।

झामुमो युवा नेता रामा सोनी ने कहा कि हजारीबाग में सोहराय महोत्सव के आयोजन के लिए हो एंटरटेनमेंट की टीम बधाई की पात्र है। पद्मश्री बुलू इमाम के प्रयासों से लोगों को सोहराय कला और इसके महत्व को जानने-समझने का अवसर मिला है। उन्होंने लोगों से झारखंड की कला एवं संस्कृति को बचाने और इसके संरक्षण के लिए आगे आने की अपील की।

वहीं हो एंटरटेनमेंट के संरक्षक चंदन सिंह ने कहा कि झारखंड की संस्कृति को दुनिया के सामने लाना इस महोत्सव का मुख्य उद्देश्य है। यहां के पारंपरिक नृत्य, संगीत और फैशन को राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिलनी चाहिए। उन्होंने जिलेवासियों से दो दिवसीय महोत्सव में शामिल होकर कलाकारों का उत्साह बढ़ाने की अपील की। सदर अंचल प्रभारी आशुतोष ने पहली बार हजारीबाग में इस तरह के आयोजन के लिए हो एंटरटेनमेंट की पूरी टीम को धन्यवाद दिया।

महोत्सव में हो एंटरटेनमेंट के निदेशक रोहित वर्मा, शशिकांत कुमार, पवन तन्मय, प्रीतीश प्रियांश, बादल, राहुल कुमार, धनंजय डीके, सूरज वर्मा, अमित वर्मा, मनोज पांडे, किट्टू सिंह, अंकित सिंह, दीपक, शशि, उज्ज्वल सिन्हा, सनोज और अंशु सिंह सहित कई युवा सक्रिय रूप से मौजूद रहे। महोत्सव का समापन 5 नवंबर को होगा। दूसरे दिन खोरठा और नागपुरी के उभरते हुए गायक कलाकार अपनी प्रस्तुतियों से दर्शकों का मनोरंजन करेंगे। स्थानीय लोगों में इन कलाकारों को सुनने को लेकर खासा उत्साह है। आयोजन समिति ने जिलेवासियों से अधिक से अधिक संख्या में पहुंचकर झारखंड की कला, संस्कृति और परंपरा के इस उत्सव का हिस्सा बनने की अपील की है।

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