जीवन के उजास का लोक पर्व है छठः डॉ नीतू कुमारी नवगीत
जीवन के उजास का लोक पर्व है छठः डॉ नीतू कुमारी नवगीत

जीवन के उजास का लोक पर्व है छठः डॉ नीतू कुमारी नवगीत
पटना: अनूप नारायण सिंह
बिहार: पूरी आस्था और उल्लास के साथ मनाया जाने वाला लोक पर्व छठ जीवन के उजास का पर्व है ।

बिहार की प्रसिद्ध लोक गायिका डॉ नीतू कुमारी नवगीत ने कहा कि पूरे विश्व में अपनी विशिष्ट पहचान बना चुका और बिहार एवं पूर्वी उत्तर प्रदेश में विशेष तौर पर मनाया जाने वाला यह पर्व प्रकृति के स्नेह बंधन पर आधारित है। शास्त्रीयता की जगह लोक मान्यताओं को विशेष महत्व देने वाला यह पर्व संदेश देता है कि किताबों के बाहर भी एक दुनिया है, कि ज्ञान की पोथियों की तुलना में पारंपरिक ज्ञान कोई कम महत्वपूर्ण नहीं है। यह संदेश देता है कि शुभ कार्य से मंत्रों के साथ संपन्न नहीं कराए जाते, लोकगीतों के साथ भी बड़ी ही सहजता और सरलता के साथ संपन्न होते हैं।

छठ पर्व हमें बताता है कि प्रकृति के साथ ही हमारा जीवन है। जल,जीवन और हरियाली एक दूसरे के सहचर हैं। डॉ नीतू कुमारी नवगीत ने कहा कि पारंपरिक लोक गीतों की धुन पर जब पूरा समाज अपनी सांस्कृतिक विरासत को आंचल में समेटे प्रकृति के साथ आबद्ध होकर पूरी सादगी और स्वच्छता के साथ एकजुट खड़ा हो जाता है, तब छठ होता है ।पूर्वी भारत में जितने भी लोक त्यौहार मनाये जाते हैं, सब में महिलाएं एक साथ मिलकर गीत गाती हैं । लेकिन छठ की बात ही कुछ और है ।लोक आस्था के महापर्व के गीत पूरी तरह प्रकृति को समर्पित हैं । पारंपरिक धुनों पर सुरुज देव और छठी मैया की महिमा का बखान इन चीजों में होता है। साथ ही उन सभी प्राकृतिक सामग्रियों का भी बखान छठ गीतों में होता है जिनका उपयोग छठ पर्व के दौरान किया जाता है ।

नीतू कुमारी नवगीत ने कहा कि जिस प्रकार आत्मा के बिना शरीर का अस्तित्व नहीं हो सकता, उसी प्रकार इस चराचर जगत की सत्ता भगवान भास्कर पर ही अवलंबित है । धरती यदि हमारी माता हैं तो सूर्य पिता हैं । यह पर हम सबको प्रकृति के साथ सही तालमेल, स्वच्छता और समर्पण के लिए प्रेरित करता है। प्रकृति,स्वच्छता और प्रभु के प्रति आस्था से ही पूरे जगत का कल्याण संभव है।



