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जमीन रिकॉर्ड में गड़बड़ी पर हाई कोर्ट सख्त, अब CO की डिजिटल मुहर के बाद ही ऑनलाइन दिखेगा रिकॉर्ड l

झारखंड में ऑनलाइन भूमि अभिलेखों में लगातार सामने आ रही त्रुटियों और नाम संबंधी विसंगतियों को लेकर झारखंड हाई कोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाया है।

जमीन रिकॉर्ड में गड़बड़ी पर हाई कोर्ट सख्त, अब CO की डिजिटल मुहर के बाद ही ऑनलाइन दिखेगा रिकॉर्ड l

रांची : झारखंड में ऑनलाइन भूमि अभिलेखों में लगातार सामने आ रही त्रुटियों और नाम संबंधी विसंगतियों को लेकर झारखंड हाई कोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाया है। अदालत ने स्पष्ट किया है कि ऑनलाइन उपलब्ध भूमि रिकॉर्ड पूरी तरह से भौतिक अभिलेखों के अनुरूप होना चाहिए। इसके लिए अब सभी डिजिटल भूमि अभिलेखों का संबंधित अंचल अधिकारी (CO) द्वारा सत्यापन अनिवार्य होगा और सत्यापन के बाद डिजिटल हस्ताक्षर होने पर ही रिकॉर्ड पोर्टल पर प्रदर्शित किए जाएंगे।

भूमि रिकॉर्ड की गलतियों पर हाई कोर्ट की कड़ी टिप्पणी

झारखंड हाई कोर्ट के न्यायमूर्ति आनंद सेन की अदालत ने सुनवाई के दौरान कहा कि ऑनलाइन रिकॉर्ड और मूल दस्तावेजों के बीच किसी प्रकार का अंतर नहीं होना चाहिए। अदालत ने पाया कि डिजिटल रिकॉर्ड में लगातार हो रही त्रुटियों के कारण आम नागरिकों को गंभीर परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है और उन्हें न्यायालय की शरण लेनी पड़ रही है।

अदालत ने राजस्व, निबंधन एवं भूमि सुधार विभाग के सचिव को निर्देश दिया है कि आदेश का तत्काल अनुपालन सुनिश्चित किया जाए और सभी संबंधित अधिकारियों को आवश्यक प्रशासनिक दिशा-निर्देश जारी किए जाएं।

एक याचिका से सामने आया बड़ा मामला

यह मामला राम प्रकाश भगत द्वारा दायर याचिका की सुनवाई के दौरान सामने आया। याचिकाकर्ता ने अदालत को बताया कि उसके पूर्वजों के नाम पर दर्ज भूमि का रिकॉर्ड भौतिक दस्तावेजों में सही है, लेकिन ऑनलाइन रजिस्टर और डिजिटल पोर्टल पर किसी अन्य व्यक्ति का नाम दर्ज हो गया है। इस त्रुटि के कारण उसे लगातार परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।

मामले की गंभीरता को देखते हुए अदालत ने याचिकाकर्ता को तीन सप्ताह के भीतर कुड़ू अंचल अधिकारी के समक्ष आवेदन प्रस्तुत करने का निर्देश दिया। साथ ही संबंधित अधिकारी को 12 सप्ताह के भीतर मामले का निपटारा करने का आदेश दिया गया।

राज्यभर से आ रही हैं ऐसी शिकायतें

सुनवाई के दौरान अदालत ने यह भी टिप्पणी की कि बड़ी संख्या में रैयत और भूमि स्वामी इसी प्रकार की शिकायतों को लेकर हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटा रहे हैं। अदालत के अनुसार डेटा एंट्री के दौरान हुई मानवीय त्रुटियां और पर्याप्त सत्यापन व्यवस्था की कमी के कारण ऑनलाइन रिकॉर्ड और मूल भूमि अभिलेखों में अंतर उत्पन्न हो रहा है।

इस स्थिति से न केवल नागरिकों को अनावश्यक मुकदमेबाजी का सामना करना पड़ रहा है, बल्कि सरकारी रिकॉर्ड की विश्वसनीयता पर भी सवाल उठ रहे हैं।

अब हर डिजिटल एंट्री का होगा भौतिक रिकॉर्ड से मिलान

हाई कोर्ट ने भविष्य के लिए स्पष्ट निर्देश जारी करते हुए कहा है कि भूमि संबंधी सभी डिजिटल प्रविष्टियों का संबंधित अंचल अधिकारी रजिस्टर-दो तथा अन्य मूल अभिलेखों से मिलान करेंगे। दस्तावेजों का सत्यापन पूरा होने के बाद ही अधिकारी डिजिटल हस्ताक्षर करेंगे और केवल प्रमाणित रिकॉर्ड को ही ऑनलाइन पोर्टल पर अपलोड किया जाएगा।

पुराने रिकॉर्ड भी होंगे दोबारा जांच के दायरे में

अदालत ने पहले से पोर्टल पर अपलोड किए गए डिजिटल भूमि रिकॉर्ड की भी दोबारा जांच करने का निर्देश दिया है। यदि किसी रिकॉर्ड में त्रुटि या विसंगति पाई जाती है तो उसे सुधारने की प्रक्रिया तत्काल शुरू की जाएगी। माना जा रहा है कि इस फैसले से राज्य के लाखों भूमि धारकों को राहत मिलेगी और ऑनलाइन जमीन रिकॉर्ड की विश्वसनीयता बढ़ेगी।

जमीन मालिकों को मिलेगी बड़ी राहत

विशेषज्ञों का मानना है कि हाई कोर्ट का यह आदेश झारखंड में भूमि अभिलेखों के डिजिटलीकरण को अधिक पारदर्शी और भरोसेमंद बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकता है। अब ऑनलाइन रिकॉर्ड में गलत नाम, खाता या प्लॉट विवरण दर्ज होने की शिकायतों में कमी आने की उम्मीद है, जिससे आम लोगों को बार-बार सरकारी कार्यालयों और अदालतों के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे।

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