गिरिडीह कॉलेज में सात दिवसीय राष्ट्रीय संकाय विकास कार्यक्रम का समापन, भारतीय ज्ञान परंपरा और एआई के समन्वय पर हुआ मंथन l
गिरिडीह कॉलेज में इंटर यूनिवर्सिटी सेंटर फॉर टीचर एजुकेशन (आईयूसीटीई), बीएचयू वाराणसी एवं विनोबा भावे विश्वविद्यालय हजारीबाग के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित सात दिवसीय राष्ट्रीय संकाय विकास कार्यक्रम का सोमवार को सफलतापूर्वक समापन हो गया।

गिरिडीह कॉलेज में सात दिवसीय राष्ट्रीय संकाय विकास कार्यक्रम का समापन, भारतीय ज्ञान परंपरा और एआई के समन्वय पर हुआ मंथन l
गिरिडीह: मनोज कुमार।
गिरिडीह : कॉलेज में इंटर यूनिवर्सिटी सेंटर फॉर टीचर एजुकेशन (आईयूसीटीई), बीएचयू वाराणसी एवं विनोबा भावे विश्वविद्यालय हजारीबाग के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित सात दिवसीय राष्ट्रीय संकाय विकास कार्यक्रम का सोमवार को सफलतापूर्वक समापन हो गया। “समानतामूलक उच्च शिक्षा : भारतीय ज्ञान परंपरा और कृत्रिम बुद्धिमत्ता का एकीकरण” विषय पर आयोजित इस कार्यक्रम में शिक्षकों, शिक्षाविदों और विशेषज्ञों ने भारतीय ज्ञान परंपरा तथा आधुनिक तकनीक के समन्वय पर व्यापक चर्चा की।

समापन दिवस पर प्रतिभागियों द्वारा समूह प्रस्तुतियां दी गईं और सात दिनों के प्रशिक्षण कार्यक्रम के प्रमुख निष्कर्षों एवं उपलब्धियों को साझा किया गया। कार्यक्रम के प्रथम एवं द्वितीय तकनीकी सत्र के मुख्य वक्ता प्रो. आशीष श्रीवास्तव ने सुशासन, नेतृत्व और संस्थागत योजना निर्माण में कृत्रिम बुद्धिमत्ता की भूमिका पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि किसी भी शैक्षणिक संस्थान की सफलता उसके सुशासन, दूरदर्शी नेतृत्व और मजबूत संस्थागत ढांचे पर निर्भर करती है।
प्रो. श्रीवास्तव ने डिजिटल युग में सूचना के सत्यापन की आवश्यकता पर बल देते हुए कहा कि आज भ्रामक और झूठी खबरें शोध आधारित ज्ञान से अधिक तेजी से फैलती हैं, इसलिए किसी भी सूचना को साझा करने से पहले उसकी सत्यता की जांच आवश्यक है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता न तो नेतृत्व का विकल्प है और न ही कोई चमत्कारी शक्ति, बल्कि यह एक सहायक तकनीक है जिसका प्रभावी उपयोग निरंतर अभ्यास और अनुभव से सीखा जा सकता है।

समापन सत्र में कार्यक्रम संयोजक एवं पीएम-उषा नोडल पदाधिकारी डॉ. अरुण कुमार मिश्रा ने सभी प्रतिभागियों, संसाधन व्यक्तियों और आयोजकों का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि प्रशिक्षण के दौरान प्राप्त सुझावों को व्यवहारिक स्तर पर लागू करने का प्रयास किया जाएगा।
मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित डॉ. पुष्पा सिन्हा ने शिक्षकों से भारतीय ज्ञान परंपरा और आधुनिक तकनीक के संतुलित उपयोग के माध्यम से विद्यार्थियों के समग्र विकास के लिए कार्य करने का आह्वान किया। वहीं ऑनलाइन माध्यम से जुड़े आईयूसीटीई, बीएचयू के निदेशक प्रो. प्रेम नारायण सिंह ने कहा कि नई शिक्षा व्यवस्था में भारतीय ज्ञान परंपरा और कृत्रिम बुद्धिमत्ता का समन्वय उच्च शिक्षा को अधिक समावेशी, प्रासंगिक और भविष्य उन्मुख बनाएगा।
कार्यक्रम के संरक्षक एवं विनोबा भावे विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. चंद्र भूषण शर्मा ने भी ऑनलाइन जुड़कर सभी प्रतिभागियों और आयोजकों को सफल आयोजन के लिए बधाई दी तथा ऐसे प्रशिक्षण कार्यक्रमों की आवश्यकता पर जोर दिया।
प्रतिभागियों की ओर से डॉ. मिथिलेश महत्ता और डॉ. कृष्ण कुमार ने छह दिनों के प्रशिक्षण के प्रमुख निष्कर्ष प्रस्तुत करते हुए शिक्षण एवं शोध में कृत्रिम बुद्धिमत्ता के उपयोग, भारतीय ज्ञान परंपरा की प्रासंगिकता तथा समानतामूलक उच्च शिक्षा के विभिन्न पहलुओं पर प्रकाश डाला।
कार्यक्रम का संचालन डॉ. बलभद्र सिंह ने किया, जबकि गिरिडीह कॉलेज के प्राचार्य डॉ. मृगेन्द्र नारायण सिंह ने इसे शिक्षकों के लिए ज्ञानवर्धक, प्रेरणादायी और व्यावहारिक दृष्टि से अत्यंत उपयोगी बताया। उन्होंने सभी प्रतिभागियों, अतिथियों एवं आयोजन समिति के सदस्यों के प्रति धन्यवाद ज्ञापित किया।
सात दिनों तक चले इस राष्ट्रीय संकाय विकास कार्यक्रम में गिरिडीह कॉलेज, आदर्श कॉलेज राजधनवार, एल.बी. कॉलेज सहित जिले के विभिन्न उच्च शिक्षण संस्थानों के शिक्षकों ने सक्रिय सहभागिता की। भारतीय ज्ञान परंपरा, राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020, समावेशी शिक्षा, शोध संस्कृति, शैक्षिक प्रशासन तथा कृत्रिम बुद्धिमत्ता जैसे विषयों पर गहन विमर्श के साथ कार्यक्रम का सफल समापन हुआ।
कार्यक्रम की सफलता में आयोजन, स्वागत, पंजीकरण, आवासन, साज-सज्जा, अल्पाहार एवं प्रेस-रिपोर्टिंग समितियों के सदस्यों की महत्वपूर्ण भूमिका रही। डॉ. बी. सिंह, डॉ. जी. समदानी, बी.एस. त्रिपाठी, डॉ. पी.एम. पाठक, श्वेता कुमारी, सुशीला चन्द्रा, आदित्य बेसरा सहित सभी शैक्षणिक एवं गैर-शैक्षणिक कर्मियों के सहयोग से कार्यक्रम सफलतापूर्वक संपन्न हुआ।




