किसानों की समृद्धि और खाद्य तेल में आत्मनिर्भरता के लिए बिहार में ऑयल पाम की खेती को मिलेगा बढ़ावा
बिहार सरकार के कृषि विभाग द्वारा राज्य में किसानों की आर्थिक स्थिति सुदृढ़ करने तथा देश को खाद्य तेल के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने के उद्देश्य से “नेशनल मिशन ऑन एडिबल ऑयल–ऑयल पाम (NMEO-OP)” योजना का राज्य में विस्तार किया जा रहा है।

किसानों की समृद्धि और खाद्य तेल में आत्मनिर्भरता के लिए बिहार में ऑयल पाम की खेती को मिलेगा बढ़ावा
ऑयल पाम किसानों को देगा लंबे समय तक उत्पादन और स्थिर आय का अवसर
किसानों की खुशहाली के साथ देश की खाद्य तेल आवश्यकता पूरी करने में बिहार निभाएगा महत्वपूर्ण भूमिका
~ श्री विजय कुमार सिन्हा
पटना : बिहार सरकार के कृषि विभाग द्वारा राज्य में किसानों की आर्थिक स्थिति सुदृढ़ करने तथा देश को खाद्य तेल के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने के उद्देश्य से “नेशनल मिशन ऑन एडिबल ऑयल–ऑयल पाम (NMEO-OP)” योजना का राज्य में विस्तार किया जा रहा है। योजना के माध्यम से राज्य के उपयुक्त जलवायु वाले क्षेत्रों में ऑयल पाम की वैज्ञानिक खेती को प्रोत्साहित करने के साथ किसानों को दीर्घकालिक एवं स्थिर आय का अवसर उपलब्ध कराने, रोजगार सृजन तथा तेल मिलों एवं प्रसंस्करण इकाइयों में निजी निवेश को बढ़ावा देने पर विशेष जोर दिया जा रहा है।

कृषि मंत्री श्री विजय कुमार सिन्हा ने कहा कि बिहार के किसानों की आय बढ़ाने और कृषि को अधिक लाभकारी एवं विविधतापूर्ण बनाने के लिए राज्य सरकार लगातार नई संभावनाओं पर काम कर रही है। ऑयल पाम ऐसी ही एक दीर्घकालिक फसल है, जिसके माध्यम से उपयुक्त क्षेत्रों के किसानों को अतिरिक्त एवं स्थिर आय का अवसर मिल सकता है। साथ ही, देश की खाद्य तेल की आवश्यकता को पूरा करने और आयात पर निर्भरता कम करने की दिशा में भी यह पहल महत्वपूर्ण है। हमारा प्रयास है कि किसानों को केवल फसल उत्पादन तक सीमित न रखकर पौध सामग्री, सिंचाई, उत्पादन, खरीद, प्रसंस्करण और बाजार तक एक समग्र व्यवस्था उपलब्ध कराई जाए।
भारत वर्तमान में अपनी खाद्य तेल की आवश्यकता का लगभग 56 से 57 प्रतिशत हिस्सा आयात करता है। खाद्य तेल के आयात पर निर्भरता कम करने के उद्देश्य से बिहार के उपयुक्त जलवायु वाले जिलों में ऑयल पाम की वैज्ञानिक खेती को प्रोत्साहित किया जाएगा। प्रथम चरण में अररिया, पूर्णिया, किशनगंज, पूर्वी चंपारण एवं पश्चिमी चंपारण जिलों को इसके लिए चिन्हित किया गया है।
NMEO-OP योजना के अंतर्गत ऑयल पाम की खेती अपनाने वाले किसानों को पौध सामग्री की खरीद के लिए ₹29,000 प्रति हेक्टेयर तक की वित्तीय सहायता प्रदान की जाएगी। इसके अतिरिक्त, पौधों के रोपण के बाद शुरुआती चार वर्षों के दौरान फसल के रखरखाव तथा रिक्त भूमि में अंतरवर्ती फसलों की खेती के लिए ₹10,500 प्रति हेक्टेयर का विशेष अनुदान भी उपलब्ध कराया जाएगा। इससे किसानों को ऑयल पाम की स्थापना एवं शुरुआती वर्षों में फसल प्रबंधन के लिए आवश्यक सहायता प्राप्त होगी।
अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे पाम तेल की कीमतों में होने वाले उतार-चढ़ाव से किसानों को संभावित मूल्य जोखिम से सुरक्षा प्रदान करने के लिए ‘Viability Price’ की व्यवस्था की गई है। बाजार मूल्य में गिरावट की स्थिति में निर्धारित प्रावधानों के अनुसार केंद्र सरकार द्वारा अंतर राशि की भरपाई की जाएगी। इसके साथ ही, ऑयल पाम की खेती में जल प्रबंधन को सुदृढ़ करने के लिए ड्रिप सिंचाई प्रणाली तथा कटाई एवं प्रसंस्करण से संबंधित कृषि यंत्रों पर भारत सरकार के निर्धारित मानदंडों के अनुसार अनुदान उपलब्ध कराया जाएगा।
किसानों को उनकी उपज के लिए बेहतर एवं व्यवस्थित बाजार उपलब्ध कराने के उद्देश्य से उनके द्वारा उत्पादित ऑयल पाम के Fresh Fruit Bunches (FFBs) की खरीद के लिए संबंधित उद्योगों एवं प्रसंस्करण इकाइयों के साथ सीधा एवं स्थिर समन्वय स्थापित किया जाएगा। इससे किसानों को उत्पादन के साथ-साथ अपनी उपज की बिक्री के लिए भी बेहतर बाजार व्यवस्था उपलब्ध होगी तथा राज्य में ऑयल पाम की उत्पादन से प्रसंस्करण तक पूरी मूल्य श्रृंखला को विकसित करने में मदद मिलेगी।
कृषि मंत्री श्री विजय कुमार सिन्हा ने कहा कि “ऑयल पाम की खेती को बढ़ावा देना केवल एक नई फसल को अपनाने की पहल नहीं है, बल्कि किसानों को दीर्घकालिक आय, बाजार से जुड़ाव और कृषि क्षेत्र में नए निवेश के अवसर उपलब्ध कराने की दिशा में एक व्यापक प्रयास है। बिहार सरकार का प्रयास है कि किसानों को योजना का लाभ देने के साथ-साथ उन्हें आवश्यक तकनीकी मार्गदर्शन और बाजार की बेहतर व्यवस्था भी उपलब्ध कराई जाए।”
उन्होंने कहा कि ऑयल पाम एक दीर्घकालिक फसल है और शुरुआती स्थापना एवं देखभाल के बाद लगभग 25–30 वर्षों तक उत्पादन देने में सक्षम होती है। ऐसे में उपयुक्त जलवायु एवं भूमि वाले किसान पारंपरिक फसलों के साथ ऑयल पाम की खेती अपनाकर अपनी कृषि आय के स्रोतों में विविधता ला सकते हैं। इससे किसानों को दीर्घकालिक आय का अवसर मिलने के साथ राज्य में खाद्य तेल के उत्पादन को बढ़ाने में भी मदद मिलेगी।
कृषि मंत्री ने राज्य के किसानों से अपील करते हुए कहा कि “जहाँ भूमि और जलवायु ऑयल पाम की खेती के लिए अनुकूल है, वहाँ किसान पारंपरिक फसलों के साथ इस फसल को भी अपनाने पर विचार करें। राज्य सरकार किसानों को आवश्यक सहायता, तकनीकी मार्गदर्शन और बाजार से जोड़ने के लिए हरसंभव प्रयास करेगी।”
उन्होंने बताया कि योजना से जुड़ने एवं आवेदन करने के इच्छुक किसान अपने नजदीकी जिला उद्यान कार्यालय/प्रखंड उद्यान पदाधिकारी से संपर्क कर सकते हैं। इसके अतिरिक्त विभागीय आधिकारिक DBT पोर्टल एवं बिहार कृषि ऐप के माध्यम से भी योजना से संबंधित जानकारी प्राप्त कर आवेदन किया जा सकता है।



