ईरान-अमेरिका में ठनी: परमाणु कार्यक्रम और होर्मुज की घेराबंदी पर तेहरान का दोटूक जवाब, क्या छिड़ेगा महायुद्ध?

नई दिल्ली/तेहरान: पश्चिम एशिया में बारूद की गंध एक बार फिर गहरी हो गई है। परमाणु संवर्धन और सामरिक रूप से महत्वपूर्ण होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को लेकर ईरान ने अमेरिका और पश्चिमी देशों के सामने झुकने से साफ इनकार कर दिया है। तेहरान ने स्पष्ट कर दिया है कि वह अपने परमाणु अधिकारों पर किसी भी तरह का समझौता नहीं करेगा, चाहे दबाव कितना भी अधिक क्यों न हो।
परमाणु अधिकारों पर ‘नो कॉम्प्रोमाइज’: तेहरान का सख्त रुख
ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बगाई ने गुरुवार को अंतरराष्ट्रीय समुदाय को कड़ा संदेश देते हुए कहा कि परमाणु ऊर्जा का अधिकार अंतरराष्ट्रीय कानून और परमाणु अप्रसार संधि (NPT) के तहत सुरक्षित है। उन्होंने पश्चिमी मीडिया की उन अटकलों को सिरे से खारिज कर दिया जिनमें कहा जा रहा था कि ईरान अपने अधिकारों के बदले ‘रियायतें’ देने को तैयार है। बगाई के अनुसार, शांतिपूर्ण परमाणु संवर्धन ईरान का कानूनी हक है और इसे किसी सौदेबाजी का हिस्सा नहीं बनाया जा सकता।
20 साल बनाम 5 साल: अमेरिका और ईरान के बीच फंसा पेच
सूत्रों के अनुसार, शांति समझौते की मेज पर अमेरिका और ईरान के बीच गहरी खाई नजर आ रही है। अमेरिका चाहता है कि ईरान अगले 20 वर्षों के लिए अपने परमाणु कार्यक्रम को पूरी तरह स्थगित कर दे और उच्चस्तरीय संवर्धित यूरेनियम को देश से बाहर भेजे। वहीं, ईरान केवल 5 साल की अवधि पर अड़ा है और उसकी पहली शर्त अपने ऊपर लगे अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों को पूरी तरह हटाना है। पाकिस्तान में हुई हालिया वार्ता में भी कोई ठोस नतीजा नहीं निकल सका, क्योंकि ईरान पहले एक व्यापक और पारदर्शी समझौते का ढांचा चाहता है।
होर्मुज जलडमरूमध्य: ‘पीछे हटने का सवाल ही नहीं’
रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर तनाव चरम पर है। ईरान के सर्वोच्च नेता के सैन्य सलाहकार मोहसिन रेजाई ने अमेरिका को चेतावनी दी है कि जब तक ईरान के अधिकार सुरक्षित नहीं होते, वे इस जलमार्ग से पीछे नहीं हटेंगे। रेजाई ने अमेरिका पर आर्थिक और समुद्री गतिविधियों पर ‘गैरकानूनी प्रतिबंध’ लगाने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि ईरान लंबे युद्ध के लिए अनुभवी और तैयार है, जबकि अमेरिका युद्ध से बचना चाहता है। उनके अनुसार, अब वार्ता की शर्तें तेहरान तय कर रहा है।
इजरायल की भीषण बमबारी की चेतावनी
इस बीच, इजरायल ने ईरान के खिलाफ अपने तेवर और कड़े कर लिए हैं। इजरायली रक्षा मंत्री इजरायल काट्ज ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि ईरान अमेरिकी प्रस्ताव को नहीं मानता, तो उसके ठिकानों पर और भी विनाशकारी हमले किए जाएंगे। काट्ज ने कहा कि ईरान आज एक ऐतिहासिक मोड़ पर खड़ा है—एक तरफ आतंकवाद और परमाणु हथियारों का रास्ता है और दूसरी तरफ विनाश की गहरी खाई।



