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आज कृष्णमय होगा गिरिडीह, धूमधाम से मनाई जाएगी श्रीकृष्ण जन्माष्टमी

गिरिडीह में आज श्रीकृष्ण जन्माष्टमी का त्योहार पूरे उत्साह और भक्तिभाव के साथ मनाया जाएगा। जन्माष्टमी को लेकर शहर के विभिन्न मंदिरों में विशेष तैयारियां की गई हैं।

आज कृष्णमय होगा गिरिडीह, धूमधाम से मनाई जाएगी श्रीकृष्ण जन्माष्टमी

बांसुरी की धुन बजेगी… मंदिरों में गूंजेंगे कान्हा के जयकारे… फूलों और रोशनी से सजे मंदिर… और आधी रात को होगा नंदलाल का जन्मोत्सव।

गिरिडीह, मनोज कुमार।

गिरिडीह : गिरिडीह में आज श्रीकृष्ण जन्माष्टमी का त्योहार पूरे उत्साह और भक्तिभाव के साथ मनाया जाएगा। जन्माष्टमी को लेकर शहर के विभिन्न मंदिरों में विशेष तैयारियां की गई हैं। मंदिरों को आकर्षक ढंग से सजाया गया है और भगवान श्रीकृष्ण की बाल लीलाओं पर आधारित झांकियां भी सजाई जा रही हैं।

मान्यता है कि भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को मध्यरात्रि में भगवान श्रीकृष्ण का जन्म हुआ था।

कहानी द्वापर युग की है… जब मथुरा पर अत्याचारी कंस का आतंक था। कंस को आकाशवाणी हुई कि उसकी बहन देवकी की आठवीं संतान ही उसके अंत का कारण बनेगी। इसके बाद कंस ने देवकी और वसुदेव को कारागार में बंद कर दिया।

और फिर आई वो पावन रात…
जब मध्यरात्रि में भगवान श्रीकृष्ण ने देवकी और वसुदेव के घर जन्म लिया।

मान्यता के अनुसार, वसुदेव बाल कृष्ण को लेकर यमुना पार करते हुए गोकुल पहुंचे और उन्हें माता यशोदा के पास पहुंचाया। इसके बाद गोकुल और वृंदावन में कृष्ण की बाल लीलाओं ने सभी का मन मोह लिया।

आगे चलकर भगवान श्रीकृष्ण ने कंस का वध कर अत्याचार का अंत किया और धर्म की स्थापना का संदेश दिया।

इसी आस्था के साथ आज जन्माष्टमी के अवसर पर गिरिडीह के मंदिरों में दिनभर पूजा-अर्चना, भजन-कीर्तन और धार्मिक कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। रात में जैसे ही घड़ी की सुइयां मध्यरात्रि की ओर बढ़ेंगी, श्रद्धालु कान्हा के जन्म की शुभ घड़ी का इंतजार करेंगे।

मध्यरात्रि में भगवान श्रीकृष्ण का जन्मोत्सव मनाया जाएगा। शंख और घंटियों की गूंज के बीच भक्त भगवान का अभिषेक करेंगे और उन्हें पालने में झुलाएंगे।

यानी आज गिरिडीह में सिर्फ जन्माष्टमी नहीं मनाई जाएगी… बल्कि पूरा शहर कृष्ण भक्ति के रंग में रंगता नजर आएगा।

और जब आधी रात को कान्हा का जन्म होगा…
तो मंदिरों में एक साथ गूंजेगा—

“नंद के घर आनंद भयो… जय कन्हैया लाल की!”

भगवान श्रीकृष्ण का संदेश है—
धर्म के मार्ग पर चलिए, सत्य का साथ दीजिए और अपने कर्म को पूरी निष्ठा से निभाइए।

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