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सरकार ने बढ़ाया समाधान का हाथ, फिर भी जारी है छात्रों का धरना
सरकार ने बढ़ाया समाधान का हाथ, फिर भी जारी है छात्रों का धरना

सरकार ने बढ़ाया समाधान का हाथ, फिर भी जारी है छात्रों का धरना

रांची: जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम में पिछले कई दिनों से चल रहे छात्र आंदोलन के बीच झारखंड सरकार ने छात्रों की अधिकांश मांगों को स्वीकार कर समाधान की दिशा में महत्वपूर्ण पहल की है। मुख्यमंत्री की घोषणा के बाद सोमवार को आंदोलनकारी छात्रों ने भी खुशी जाहिर की थी और इसे अपनी आवाज की जीत बताया था। इसके बाद आम लोगों के बीच यह उम्मीद बनी थी कि धरना-प्रदर्शन समाप्त हो जाएगा, लेकिन सरकार के सकारात्मक कदमों के बावजूद छात्र अब भी धरनास्थल पर डटे हुए हैं।
राज्य सरकार का कहना है कि उसने छात्रों की चिंताओं को गंभीरता से लेते हुए कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए हैं। भर्ती परीक्षाओं में पारदर्शिता, अनियमितताओं की जांच तथा दोषियों के खिलाफ कार्रवाई को लेकर सरकार ने स्पष्ट रुख अपनाया है। यही कारण है कि मुख्यमंत्री की घोषणाओं के बाद आंदोलन को लेकर सकारात्मक माहौल भी बना था।
हालांकि आंदोलन के जारी रहने से अब यह सवाल उठने लगा है कि जब सरकार अधिकांश मांगों पर सहमत हो चुकी है, तब भी धरना जारी रखने की आवश्यकता क्या है। सरकार का पक्ष है कि वह छात्रों के हितों के प्रति पूरी तरह संवेदनशील है और किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा। सरकार का दावा है कि वर्तमान में सीआईडी द्वारा की जा रही जांच तेजी से आगे बढ़ रही है और जांच एजेंसी कई महत्वपूर्ण तथ्यों तक पहुंच चुकी है।
सीबीआई जांच की मांग पर सरकार ने अपने पुराने अनुभवों का हवाला दिया है। सरकार का कहना है कि पूर्व में द्वितीय जेपीएससी परीक्षा मामले की जांच सीबीआई को सौंपी गई थी, लेकिन वर्षों बाद भी उसका अंतिम निष्कर्ष सामने नहीं आ सका। इसके विपरीत वर्तमान जांच में सीआईडी ने कम समय में उल्लेखनीय प्रगति की है। सरकार का मानना है कि जांच को उसके तार्किक निष्कर्ष तक पहुंचने देना ही युवाओं के हित में होगा।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि लोकतंत्र में आंदोलन और संवाद दोनों महत्वपूर्ण हैं, लेकिन जब सरकार बातचीत के माध्यम से अधिकांश मांगों को स्वीकार कर चुकी हो, तब समाधान की प्रक्रिया को आगे बढ़ाने पर भी विचार किया जाना चाहिए। मुख्यमंत्री द्वारा किए गए फैसलों को कई लोगों ने युवाओं के प्रति सरकार की जवाबदेही और संवेदनशीलता का प्रमाण माना है।
फिलहाल सरकार की ओर से संवाद के दरवाजे खुले हुए हैं। ऐसे में यह देखना दिलचस्प होगा कि छात्रों का आंदोलन आगे किस दिशा में बढ़ता है। वहीं सरकार का दावा है कि उसकी प्राथमिकता आंदोलन नहीं, बल्कि युवाओं को न्याय, पारदर्शी भर्ती प्रक्रिया और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई सुनिश्चित करना है।




