मरांग बुरु की धरती पर उमड़ा आस्था का सैलाब! मधुबन में देश-विदेश के हजारों श्रद्धालुओं का महाजुटान, मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन और कल्पना सोरेन ने बढ़ाई महासम्मेलन की भव्यता
पारसनाथ की पवित्र तलहटी में स्थित मधुबन गुरुवार को आदिवासी आस्था, संस्कृति और परंपरा के महासंगम का गवाह बना। मरांग बुरु धोरोमगाढ़ महासम्मेलन में देश-विदेश से हजारों की संख्या में श्रद्धालुओं का जनसैलाब उमड़ पड़ा।

मरांग बुरु की धरती पर उमड़ा आस्था का सैलाब! मधुबन में देश-विदेश के हजारों श्रद्धालुओं का महाजुटान, मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन और कल्पना सोरेन ने बढ़ाई महासम्मेलन की भव्यता
गिरिडीह, मनोज कुमार।
गिरिडीह : पारसनाथ की पवित्र तलहटी में स्थित मधुबन गुरुवार को आदिवासी आस्था, संस्कृति और परंपरा के महासंगम का गवाह बना। मरांग बुरु धोरोमगाढ़ महासम्मेलन में देश-विदेश से हजारों की संख्या में श्रद्धालुओं का जनसैलाब उमड़ पड़ा। पारंपरिक ढोल-नगाड़ों की गूंज, सांस्कृतिक गीतों और धार्मिक जयघोष से पूरा मधुबन क्षेत्र भक्तिमय नजर आया।

इस ऐतिहासिक महासम्मेलन में झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन और गांडेय विधायक कल्पना सोरेन की मौजूदगी ने आयोजन की भव्यता को और बढ़ा दिया। मुख्यमंत्री और कल्पना सोरेन के पहुंचने पर श्रद्धालुओं और आदिवासी समाज के लोगों में खासा उत्साह देखने को मिला।

महासम्मेलन की शुरुआत दिशोम मांझीथान में पारंपरिक आदिवासी रीति-रिवाजों के अनुसार पूजा-अर्चना के साथ हुई। इस दौरान समाज के लोगों ने अपने आराध्य मरांग बुरु के प्रति श्रद्धा प्रकट करते हुए पारंपरिक विधि-विधान से धार्मिक अनुष्ठान में भाग लिया।
इस महासम्मेलन में झारखंड के अलावा पश्चिम बंगाल, ओडिशा, बिहार, असम समेत देश के विभिन्न राज्यों से श्रद्धालु पहुंचे हैं। वहीं विदेशों से भी धार्मिक प्रतिनिधियों और समाज के लोगों की भागीदारी ने इस आयोजन को अंतरराष्ट्रीय स्वरूप प्रदान किया है।

आयोजन का मुख्य उद्देश्य आदिवासी समाज की समृद्ध संस्कृति, भाषा, परंपरा और धार्मिक पहचान को संरक्षित करना तथा मरांग बुरु की पवित्रता और आस्था से जुड़े विषयों पर सामूहिक विचार-विमर्श करना है। महासम्मेलन के मंच से आदिवासी समाज की एकजुटता और सांस्कृतिक विरासत को मजबूत करने का संदेश भी दिया जा रहा है।

इधर, इतने बड़े आयोजन को देखते हुए जिला प्रशासन भी सुरक्षा और विधि-व्यवस्था को लेकर पूरी तरह सतर्क नजर आया। श्रद्धालुओं की सुविधा और कार्यक्रम के सुचारू संचालन के लिए आवश्यक व्यवस्थाएं की गई हैं।
बहरहाल, मधुबन में उमड़ा यह जनसैलाब सिर्फ एक धार्मिक आयोजन की तस्वीर नहीं है, बल्कि आदिवासी समाज की आस्था, अस्मिता, एकजुटता और सांस्कृतिक स्वाभिमान की मजबूत आवाज बनकर उभरा है। मरांग बुरु की धरती से उठी यह गूंज अब देश की सीमाओं से आगे वैश्विक पहचान की ओर बढ़ती दिखाई दे रही है।

वही मौके पर मरांगबुरू बचाओ संघर्ष समिति के अध्यक्ष फागु बेसरा, महासचिव हीरालाल मांझी, डॉ. जगजीवन मुर्मू, सोमय टुडू, जंशाई मारडी, दुर्गा चरण मुर्मू, रमेश टुडू, सोनाराम हेंब्रम, एतो बास्के, नारायण मुर्मू और महावीर बास्के दिलीप मुर्मू ,दीपीन सोरेन, चन्द्रमोहन मुर्मू, शनिवार बेसरा, अशोक मुर्मू, भगवान किस्कू और राजेश हांसदा मौजूद थे।




