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झामुमो के बैनर तले किया प्रशासनिक भवन का धेराव:पुलिस छावनी में तबदील,जानिए क्या था वजह

बिजली पानी समस्या को लेकर विस्थापतो ने झामुमो के बैनर तले किया प्रशासनिक भवन का धेराव:पुलिस छावनी में तबदील।

बिजली पानी समस्या को लेकर विस्थापतो ने झामुमो के बैनर तले किया प्रशासनिक भवन का धेराव:पुलिस छावनी में तबदील।

धनबाद: मलय गोप

धनबाद: पूर्व नियोजित कार्यक्रम के तहत निरसा विधानसभा के मैथन गोगना गाँव के ग्रामीणों ने बिजली पानी एवं सड़क की मांग को लेकर सोमवार को झामुमो के बैनर तले दामोदर वैली कारपोरेशन मैथन के प्रशासनिक भवन का घेराव किया जिसका नेतृत्व जीप क्षेत्र संख्या 29 के जिला परिषद सदस्य गुलाम कुरैशी कर रहे थे,मैथन गोगना गाँव से सैकड़ों की संख्या में विस्थापित ग्रमीणों ने डुगडुगी तीर धनुष एवं प्रारंपरिक हथियारों लैश होकर प्रशासनिक भवन पहुंचे और अपनी मांगों को लेकर नारेबाजी करने लगे डीवीसी द्वारा पहले से ही भीड़ से निपटने को लेकर मुस्तैद थे भारी संख्या में बीएसएफ के जवान स्थानीय पुलिस प्रशासन काफी संख्या में मौजूद थे प्रशासनिक भवन के सामने वेरीकेटिंग लगा दिया गया ताकि अनधिकृत लोग अंदर प्रवेश न कर सकें प्रदर्शनकारी घंटों कड़ी धूप में बाहर खड़े रहे परंतु डीवीसी के कोई भी अधिकारी उनसे वार्ता करने नहीं पहुंचा जिसके कारण ग्रामीणों में काफी रोष देखा गया वहीं

विस्थापित महिला सुमित्रा टुडू ने बताया कि हम सभी विस्थापित हैं और हम सबों का जमीन डीवीसी में गया है परंतु डीवीसी के द्वारा जो हम ग्रामीणों को सुविधा मिलना चाहिए था वह सुविधा आज तक हमसबों को नहीं मिला है सबसे बड़ी बात यह है कि इतनी बड़ी डैम रहने के बावजूद भी हमसबों को पेयजल की घोर किल्लत है बिजली भी हमसबों को नहीं मिलता है सड़क भी नहीं है बच्चों के खेल कूद के लिए कोई ग्राउंड भी नहीं है परंतु डीवीसी प्रबंधन द्वारा हम विस्थापितों का दर्द कभी समझा ही नहीं बाहरी लोगों को सारे सुख सुविधा मुहैया कराई जाती है परंतु विस्थापितों को नहीं।

इस मुद्दे पर जिला परिषद क्षेत्र संख्या 29 के जिला परिषद सदस्य गुलाम कुरैशी ने कहा कि पिछले 7-8 महीने से डीवीसी को पत्राचार के माध्यम से लगातार समस्या का के बारे में अवगत कराता रहा परंतु डीवीसी हमेशा टालमटोल करती रही ग्रामीण जो विस्थापित है उन्हें आज तक कोई सुविधा मुहैया नहीं कराई गई जिसे थक हार कर आज ग्रामीणों के साथ धरना दे रहे हैं मैथन के विस्थापित रैयतो के साथ जो डीवीसी द्वारा समझौता किया गया था उस समझौते के अनुरूप डीवीसी कार्य नहीं कर रही है विस्थापित के आंगन से ही बिजली का उत्पादन होता है परंतु विस्थापित आज बिजली से कोसों दूर है मैथन में सड़कों की स्थिति काफी जर्जर है डीवीसी 8 किलोमीटर के दायरे में उन्हें विकास करना है परंतु धरातल पर वास्तविकता कुछ और ही है झारखंड में आदिवासियों की सरकार है और झारखंड मुक्ति मोर्चा आदिवासियों पर अत्याचार कभी बर्दाश्त नहीं करेगी और अपने हक की लड़ाई लड़ते रहेगी अगर प्रबंधन बात मानने को तैयार हैं तो ठीक है अन्यथा इससे भी बड़ी आंदोलन करने के लिए झामुमो बाध्य होगा।

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