चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर झामुमो का हल्लाबोल, ज्ञानेश कुमार को हटाने की मांग; रांची राजभवन के सामने जोरदार प्रदर्शन
भारत निर्वाचन आयोग की कार्यप्रणाली और चुनावी प्रक्रिया की निष्पक्षता को लेकर झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) ने बुधवार को रांची स्थित राजभवन के समक्ष जोरदार विरोध-प्रदर्शन किया।

चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर झामुमो का हल्लाबोल, ज्ञानेश कुमार को हटाने की मांग; रांची राजभवन के सामने जोरदार प्रदर्शन
रांची : भारत निर्वाचन आयोग की कार्यप्रणाली और चुनावी प्रक्रिया की निष्पक्षता को लेकर झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) ने बुधवार को रांची स्थित राजभवन के समक्ष जोरदार विरोध-प्रदर्शन किया। झामुमो नेताओं ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर पद के कथित दुरुपयोग और एकतरफा निर्णय लेने के आरोप लगाए और उन्हें तत्काल पद से हटाने की मांग की।

14 औपचारिक आपत्तियों का मुद्दा बना प्रदर्शन का केंद्र
प्रदर्शन के दौरान झामुमो नेताओं ने हाल में सामने आई मीडिया रिपोर्टों और दस्तावेजों का हवाला देते हुए चुनाव आयोग के भीतर निर्णय लेने की प्रक्रिया पर सवाल उठाए। पार्टी का कहना है कि चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने पिछले करीब 10 महीनों के दौरान आयोग के कई फैसलों को लेकर 14 बार औपचारिक आपत्तियां दर्ज कराई हैं।
मीडिया रिपोर्टों में भी नवंबर 2025 से सितंबर 2026 के बीच दोनों चुनाव आयुक्तों की ओर से 14 मौकों पर आपत्तियां दर्ज किए जाने की बात सामने आई है। इनमें मतदाता सूची, वोटर डेटाबेस तक पहुंच, फॉर्म-6 में बदलाव और चुनावी तकनीकी व्यवस्था से जुड़े मुद्दे शामिल बताए गए हैं।
हालांकि, चुनाव आयोग के अधिकारियों ने इन रिपोर्टों के बाद कहा है कि विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) समेत आयोग के फैसलों को तीनों चुनाव आयुक्तों की मंजूरी प्राप्त थी। यानी इस मुद्दे पर झामुमो और निर्वाचन आयोग के पक्ष अलग-अलग हैं।

वोटर लिस्ट को लेकर झामुमो ने उठाए सवाल
झामुमो नेताओं ने विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR के दौरान मतदाता सूची में हुए बदलावों को लेकर गंभीर आपत्ति जताई। पार्टी का आरोप है कि इस प्रक्रिया के दौरान बड़ी संख्या में पात्र मतदाताओं के नाम सूची से हटाए गए और ऐसा सहयोगी चुनाव आयुक्तों की आपत्तियों के बावजूद किया गया।
झामुमो ने इसे मतदाताओं के अधिकार से जोड़ते हुए कहा कि मतदाता सूची में किसी भी तरह की गड़बड़ी का सीधा असर नागरिकों के मतदान के अधिकार पर पड़ सकता है। पार्टी ने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच और जवाबदेही तय करने की मांग की।
हालिया रिपोर्टों में भी SIR और मतदाता सूची से जुड़े बदलावों को लेकर चुनाव आयोग के भीतर मतभेदों का उल्लेख हुआ है। आयोग ने इन विवादों के बीच अपने वोटर-रोल सॉफ्टवेयर और संबंधित प्रक्रियाओं की समीक्षा के लिए समिति गठित करने की जानकारी दी है।

रांची में कई जिला समितियां एक साथ आईं
झामुमो का यह प्रदर्शन रांची जिला समिति, रांची महानगर समिति, खूंटी जिला समिति, लोहरदगा जिला समिति और रामगढ़ जिला समिति के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित किया गया। पार्टी कार्यकर्ताओं ने चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली को लेकर विरोध दर्ज कराया और अपनी मांगों के समर्थन में नारेबाजी की।
प्रदर्शन में झामुमो के केंद्रीय महासचिव सुप्रियो भट्टाचार्य, राज्यसभा सांसद महुआ माजी, विधायक विकास मुंडा, अमित महतो, सुदीप गुड़िया और रामसूर्या मुंडा समेत पार्टी के कई नेता और कार्यकर्ता शामिल हुए। स्थानीय रिपोर्ट के मुताबिक कार्यक्रम में बड़ी संख्या में पार्टी कार्यकर्ता मौजूद रहे।
‘मतदाता के अधिकार से जुड़ा है मामला’
झामुमो नेताओं ने कहा कि मतदाता सूची केवल प्रशासनिक दस्तावेज नहीं, बल्कि लोकतांत्रिक प्रक्रिया का महत्वपूर्ण आधार है। पार्टी का आरोप है कि यदि किसी पात्र नागरिक का नाम मतदाता सूची से हटता है तो उसके मतदान के अधिकार पर असर पड़ सकता है।
राज्यसभा सांसद महुआ माजी ने भी प्रदर्शन के दौरान SIR प्रक्रिया को लेकर चिंता जताई। उन्होंने आरोप लगाया कि वास्तविक मतदाताओं को मतदान के अधिकार से वंचित किए जाने की स्थिति पैदा हो रही है और मतदाता सूची में नाम दर्ज कराने के लिए पर्याप्त अवसर दिया जाना चाहिए।
चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर देशभर में बहस
मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के नेतृत्व वाले निर्वाचन आयोग को लेकर पिछले कुछ दिनों में राष्ट्रीय स्तर पर राजनीतिक बहस तेज हुई है। रिपोर्टों में सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी की ओर से 14 मौकों पर आपत्ति दर्ज किए जाने की बात सामने आने के बाद आयोग की आंतरिक निर्णय प्रक्रिया चर्चा में आई है।
इन आपत्तियों से जुड़े मुद्दों में नए मतदाताओं के पंजीकरण के लिए इस्तेमाल होने वाले Form-6 में बदलाव, मतदाता डेटाबेस तक पहुंच, पश्चिम बंगाल में मतदाता नाम हटाने से जुड़ी अपील और गोवा में पात्र मतदाताओं के नाम जोड़ने में तकनीकी समस्याएं जैसे विषय शामिल बताए गए हैं।
वहीं, चुनाव आयोग ने आंतरिक मतभेदों की खबरों के बीच स्पष्ट किया है कि SIR समेत सभी फैसले आयोग के तीनों सदस्यों की मंजूरी से लिए गए थे। इससे पूरे विवाद में झामुमो के आरोपों और निर्वाचन आयोग के स्पष्टीकरण के बीच स्पष्ट अंतर दिखाई देता है।
ज्ञानेश कुमार को हटाने की मांग पर अड़ा झामुमो
रांची में हुए प्रदर्शन के दौरान झामुमो ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को तत्काल पद से हटाने की मांग दोहराई। पार्टी नेताओं ने कहा कि निर्वाचन आयोग जैसी संवैधानिक संस्था की विश्वसनीयता और निर्णय प्रक्रिया में पारदर्शिता बनाए रखना जरूरी है।
झामुमो केंद्रीय समिति के महासचिव विनोद कुमार पांडेय ने कहा कि पार्टी मतदाता सूची और निर्वाचन प्रक्रिया से जुड़े मुद्दों को लेकर अपना विरोध जारी रखेगी। उन्होंने कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में मतदाताओं के अधिकार और चुनावी संस्थाओं की निष्पक्षता को लेकर किसी भी आशंका का समाधान पारदर्शी तरीके से होना चाहिए।
बड़ी संख्या में नेता और कार्यकर्ता रहे मौजूद
प्रदर्शन में झामुमो के केंद्रीय सदस्य पवन जेडिया, हेमलाल मेहता, अश्विनी शर्मा, अन्तु तिर्की, राधा तिर्की, निरु शांति भगत, रांची जिला संयोजक प्रमुख मुस्ताक आलम, रामगढ़ जिला संयोजक प्रमुख विनोद किस्कू, लोहरदगा जिला अध्यक्ष मोजम्मील अहमद, खूंटी जिला अध्यक्ष जुबेर अहमद, रांची जिला संयोजक धर्मेंद्र सिंह, रांची महानगर संयोजक फरीद खान समेत कई पदाधिकारी और कार्यकर्ता मौजूद रहे।
इसके अलावा रोशन कुमार, मनिन्द्र सिंह, अफरोज अंसारी, अंकिता वर्मा, विक्रम सिंह, अरुण वर्मा, आशुतोष वर्मा, विजय महतो, भोलु मल्लिक, साजिद कौसर, उत्तम यादव, महादेव मुंडा, राजू गोप, उमेश साहू, रंजन माथुर, प्रेम प्रतीक बमबारी, अनुराग तिर्की, लालंती देवी, आदम मुंडा, कुलदीपक, जितनन्दन महतो, कुदरत अंसारी, फारूख अंसारी, लाला महली, मुरसीय लाल मांझी, शमीम अंसारी, श्यामजी महतो, नन्दु मेहता, चामु बेक, सुरेश महतो, बलराम महतो, नवीन तिर्की और संजू माथुर समेत बड़ी संख्या में पार्टी कार्यकर्ताओं ने प्रदर्शन में भाग लिया।




