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लंगटा बाबा की समाधि पर उमड़ा आस्था का जनसैलाब, पौष पूर्णिमा पर चादरपोशी को लेकर श्रद्धालुओं का तांता

गिरिडीह जिले के जमुआ–देवघर मुख्य मार्ग पर उसरी नदी तट स्थित खरगडीहा में लंगेश्वरी बाबा उर्फ लंगटा बाबा की समाधि पर पौष पूर्णिमा के अवसर पर आस्था का सैलाब उमड़ पड़ा।

लंगटा बाबा की समाधि पर उमड़ा आस्था का जनसैलाब, पौष पूर्णिमा पर चादरपोशी को लेकर श्रद्धालुओं का तांता

गिरिडीह, मनोज कुमार।

गिरिडीह : गिरिडीह जिले के जमुआ–देवघर मुख्य मार्ग पर उसरी नदी तट स्थित खरगडीहा में लंगेश्वरी बाबा उर्फ लंगटा बाबा की समाधि पर पौष पूर्णिमा के अवसर पर आस्था का सैलाब उमड़ पड़ा। अहले सुबह से ही बाबा की समाधि पर चादरपोशी एवं पूजा-अर्चना के लिए श्रद्धालुओं की लंबी कतारें देखने को मिलीं।

लंगटा बाबा का समाधि स्थल सांप्रदायिक सौहार्द की अनूठी मिसाल है, जहां सभी धर्मों और संप्रदायों के लोग समान श्रद्धा के साथ नतमस्तक होते हैं। पौष पूर्णिमा के दिन बाबा की समाधि पर चादर चढ़ाने की परंपरा लगभग 116 वर्षों से चली आ रही है। मान्यता है कि इसी दिन वर्ष 1910 में बाबा ने यहीं समाधि ली थी, जिसके बाद से चादरपोशी और शिरनी प्रसाद चढ़ाने की परंपरा शुरू हुई।

शनिवार तड़के सुबह 3:15 बजे परंपरा के अनुसार सबसे पहले जमुआ थाना प्रभारी ने बाबा की समाधि पर चादरपोशी की। इस दौरान पुलिस प्रशासन के अन्य अधिकारी भी उपस्थित रहे। इसके बाद श्रद्धालुओं ने कतारबद्ध होकर चादर चढ़ाई और बाबा से मन्नतें मांगीं।
लंगटा बाबा के प्रति श्रद्धालुओं की आस्था केवल झारखंड तक सीमित नहीं है। पौष पूर्णिमा के अवसर पर बिहार, बंगाल समेत अन्य राज्यों से भी बड़ी संख्या में भक्त यहां पहुंचे। परंपरा के अनुसार पहले पहर में हिंदू श्रद्धालु एवं दूसरे पहर में मुस्लिम धर्मावलंबी चादरपोशी करते हैं, जिसका हर वर्ष विधिवत पालन किया जाता है।

भारी भीड़ को देखते हुए पुलिस प्रशासन द्वारा व्यापक सुरक्षा व्यवस्था की गई है। बैरिकेडिंग कर महिला एवं पुरुष श्रद्धालुओं के लिए अलग-अलग प्रवेश मार्ग बनाए गए हैं। पूरे मेला परिसर में चाक-चौबंद सुरक्षा व्यवस्था तैनात है। खोरीमहुआ के एसडीएम अनिमेष रंजन एवं एसडीपीओ राजेंद्र कुमार के नेतृत्व में बीडीओ, सीओ समेत विभिन्न थानों की पुलिस बल मौके पर तैनात है।

स्थानीय मान्यताओं के अनुसार, ब्रिटिश शासन काल में साधु-संतों के साथ देवघर जा रहे लंगटा बाबा खरगडीहा थाना में रुके थे। तत्कालीन थाना प्रभारी द्वारा बाबा को आगे बढ़ने को कहने पर बाबा ने भविष्यवाणी की थी कि “तू ही यहां से जाएगा”, और कुछ समय बाद थाना खरगडीहा से हटकर जमुआ स्थानांतरित हो गया। बाबा का पशु-पक्षियों और मानव मात्र के प्रति विशेष स्नेह था, और कहा जाता है कि उनके पास आने वाले लोगों के कष्ट दूर हो जाते थे। यही कारण है कि आज भी बाबा की समाधि सभी धर्मों के लोगों के लिए आस्था का केंद्र बनी हुई है।

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