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बिहार में धान खरीद और उसना चावल की मिलिंग पर बड़ा फैसला, हर जिले में तैयार होगा अधिकतम उसना चावल; GPS से होगी ढुलाई की निगरानी

बिहार में खरीफ विपणन मौसम 2026-27 के दौरान धान अधिप्राप्ति और चावल मिलिंग की व्यवस्था को अधिक पारदर्शी और तकनीक आधारित बनाने की तैयारी शुरू हो गई है।

बिहार में धान खरीद और उसना चावल की मिलिंग पर बड़ा फैसला, हर जिले में तैयार होगा अधिकतम उसना चावल; GPS से होगी ढुलाई की निगरानी

पटना : बिहार में खरीफ विपणन मौसम 2026-27 के दौरान धान अधिप्राप्ति और चावल मिलिंग की व्यवस्था को अधिक पारदर्शी और तकनीक आधारित बनाने की तैयारी शुरू हो गई है। राज्य सरकार ने विकेन्द्रीकृत अधिप्राप्ति व्यवस्था के तहत प्रदेश के सभी जिलों में अधिकतम संभव मात्रा में उसना चावल तैयार करने का निर्णय लिया है। इसके लिए खाद्य एवं उपभोक्ता संरक्षण विभाग ने जरूरी तैयारियां शुरू कर दी हैं।

इस पूरी व्यवस्था में धान की खरीद से लेकर मिलिंग और परिवहन तक की प्रक्रिया पर तकनीक के जरिए निगरानी बढ़ाई जाएगी। चावल मिलों की बिजली खपत की सीधे निगरानी करने के साथ-साथ धान और चावल की ढुलाई में केवल GPS युक्त वाहनों के इस्तेमाल को अनिवार्य किया गया है। वाहनों की आवाजाही पर बिहार राज्य खाद्य निगम के Vehicle Tracking System (VTS) के जरिए नजर रखी जाएगी।

चावल मिलरों के लिए 15 अक्टूबर तक ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन का मौका

खरीफ विपणन मौसम 2026-27 में धान अधिप्राप्ति कार्यक्रम के तहत मिलिंग कार्य में शामिल होने के इच्छुक चावल मिलरों के लिए ऑनलाइन निबंधन की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। बिहार राज्य खाद्य एवं असैनिक आपूर्ति निगम की ओर से e-Sahkari Bihar पोर्टल के माध्यम से 16 अगस्त 2026 से ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन किया जा रहा है।

चावल मिलरों के लिए ऑनलाइन निबंधन की अंतिम तारीख 15 अक्टूबर 2026 निर्धारित की गई है। विभाग ने राज्य के सभी चावल मिल संचालकों से अपील की है कि वे धान अधिप्राप्ति और मिलिंग से संबंधित आवश्यक तैयारियां समय रहते पूरी कर लें तथा निर्धारित समय-सीमा के भीतर अपना ऑनलाइन निबंधन जरूर करा लें।

किसानों से धान खरीद की व्यवस्था को पारदर्शी बनाने पर जोर

खाद्य एवं उपभोक्ता संरक्षण विभाग के मंत्री अशोक चौधरी ने कहा कि राज्य सरकार किसानों से धान की सुगम और पारदर्शी तरीके से अधिप्राप्ति सुनिश्चित करने के लिए लगातार व्यवस्था को मजबूत कर रही है। खरीफ विपणन मौसम 2026-27 में बिहार के प्रत्येक जिले में अधिकतम संभव मात्रा में उसना चावल तैयार करने की दिशा में आवश्यक कदम उठाए गए हैं।

मंत्री के अनुसार, अधिप्राप्ति, मिलिंग और परिवहन की निगरानी को मजबूत करने के लिए तकनीक का प्रभावी इस्तेमाल किया जाएगा। मिलों की विद्युत खपत की सीधी निगरानी और GPS आधारित परिवहन व्यवस्था लागू होने से पूरी प्रक्रिया में पारदर्शिता तथा जवाबदेही बढ़ाने का प्रयास किया जा रहा है।

उन्होंने सभी चावल मिल संचालकों से निर्धारित अवधि के भीतर ऑनलाइन निबंधन पूरा करने और धान अधिप्राप्ति से जुड़े कार्यों के लिए समय रहते आवश्यक तैयारियां करने की अपील की।

चावल मिलों में कार्यशील बिजली कनेक्शन अनिवार्य

खरीफ विपणन मौसम 2026-27 में धान की मिलिंग करने वाली चावल मिलों के लिए कार्यशील विद्युत संयोजन अनिवार्य कर दिया गया है। मिलों में होने वाली बिजली की खपत की मासिक जानकारी संबंधित विद्युत वितरण कंपनियों से सीधे प्राप्त की जाएगी।

इस व्यवस्था के जरिए मिलों की वास्तविक संचालन क्षमता और वहां होने वाली मिलिंग गतिविधियों की निगरानी को और प्रभावी बनाने का प्रयास किया जाएगा। बिजली खपत से संबंधित जानकारी सीधे प्राप्त होने के कारण मिलों के संचालन और मिलिंग कार्य की निगरानी तकनीकी आधार पर की जा सकेगी।

GPS वाले वाहनों से ही होगी धान और चावल की ढुलाई

धान और चावल के परिवहन को लेकर भी इस बार निगरानी व्यवस्था को सख्त और तकनीक आधारित बनाया गया है। पिछले वर्ष की व्यवस्था के अनुरूप खरीफ विपणन मौसम 2026-27 में धान और चावल का परिवहन करने वाले वाहनों का ऑनलाइन निबंधन, सत्यापन और GPS ट्रैकिंग अनिवार्य किया गया है।

सरकार की निर्धारित व्यवस्था के अनुसार धान और चावल की ढुलाई केवल GPS युक्त वाहनों से ही की जाएगी। परिवहन में इस्तेमाल होने वाले वाहनों के दस्तावेजों का सत्यापन भारत सरकार के वाहन सारथी पोर्टल के माध्यम से किया जाएगा।

चावल मिलों को जियो-फेंसिंग के दायरे में लाया जाएगा

परिवहन व्यवस्था की निगरानी को और मजबूत करने के लिए चावल मिलों के मिल परिसर को जियो-फेंसिंग के अंतर्गत लाया जाएगा। इसका उद्देश्य मिल परिसर और वहां होने वाली धान-चावल की आवाजाही पर तकनीक के माध्यम से निगरानी रखना है।

धान एवं चावल के परिवहन के दौरान वाहनों की आवाजाही को बिहार राज्य खाद्य निगम के व्हीकल ट्रैकिंग सिस्टम (VTS) के माध्यम से ट्रैक किया जाएगा। GPS आधारित यह निगरानी व्यवस्था परिवहन के दौरान वाहनों की गतिविधियों पर नजर रखने में इस्तेमाल की जाएगी।

धान से चावल बनने तक पूरी प्रक्रिया पर रहेगी तकनीकी नजर

राज्य सरकार की इस नई व्यवस्था में धान अधिप्राप्ति से लेकर मिलिंग और फिर चावल के परिवहन तक की प्रक्रिया को अधिक तकनीक आधारित बनाने पर जोर दिया गया है। बिजली खपत की निगरानी, GPS युक्त वाहनों का इस्तेमाल, दस्तावेजों का ऑनलाइन सत्यापन, मिल परिसरों की जियो-फेंसिंग और VTS के जरिए वाहन ट्रैकिंग जैसे कदमों को इसी उद्देश्य से जोड़ा गया है।

सरकार का लक्ष्य खरीफ विपणन मौसम 2026-27 में बिहार के सभी जिलों में अधिकतम संभव मात्रा में उसना चावल तैयार करना है। विभाग के अनुसार, तकनीक के इस्तेमाल से अधिप्राप्ति, मिलिंग और परिवहन की निगरानी अधिक प्रभावी होगी तथा पूरी प्रक्रिया में पारदर्शिता, जवाबदेही और नियंत्रण को मजबूत किया जा सकेगा।

चावल मिलरों के लिए क्या है महत्वपूर्ण?

धान अधिप्राप्ति और मिलिंग प्रक्रिया में शामिल होने वाले चावल मिल संचालकों के लिए 15 अक्टूबर 2026 की तारीख महत्वपूर्ण है। इच्छुक मिलरों को निर्धारित अवधि के भीतर ऑनलाइन निबंधन कराना होगा। इसके अलावा मिलों में कार्यशील विद्युत संयोजन होना अनिवार्य रहेगा और धान-चावल की ढुलाई के लिए GPS युक्त वाहनों का इस्तेमाल करना होगा।

बिहार सरकार की यह व्यवस्था खरीफ विपणन मौसम 2026-27 में धान अधिप्राप्ति और चावल मिलिंग की पूरी प्रक्रिया को तकनीक के जरिए अधिक निगरानी योग्य बनाने की दिशा में लागू की जा रही है। परिवहन से लेकर मिलिंग तक डिजिटल निगरानी के जरिए प्रक्रिया में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने पर विशेष जोर दिया गया है।

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