बरकट्ठा में स्वास्थ्य विभाग की जांच पर बड़ा सवाल!
बरकट्ठा प्रखंड क्षेत्र में संचालित निजी नर्सिंग होम, अस्पताल, क्लिनिक एवं मेडिकल दुकानों को लेकर उठी शिकायत अब स्वास्थ्य विभाग के लिए भी एक गंभीर परीक्षा बन गई है।

बरकट्ठा में स्वास्थ्य विभाग की जांच पर बड़ा सवाल!
निजी नर्सिंग होम, अस्पताल और मेडिकल संचालकों में बेचैनी का दावा; शिकायत के बाद विभागीय आदेश, फिर भी जमीन पर जांच का इंतजार
बरकट्ठा/हजारीबाग : बरकट्ठा प्रखंड क्षेत्र में संचालित निजी नर्सिंग होम, अस्पताल, क्लिनिक एवं मेडिकल दुकानों को लेकर उठी शिकायत अब स्वास्थ्य विभाग के लिए भी एक गंभीर परीक्षा बन गई है। मामला मुख्यमंत्री जन शिकायत पोर्टल तक पहुंचने के बाद हजारीबाग स्वास्थ्य विभाग ने कार्रवाई की दिशा में पत्र जारी किया, लेकिन विभागीय निर्देश के बावजूद वास्तविक स्थल जांच कब होगी—यही अब सबसे बड़ा सवाल बन गया है।
शिकायतकर्ता संतोष कुमार मंडल द्वारा मुख्यमंत्री जन शिकायत पोर्टल पर दर्ज शिकायत संख्या GOVJH/E/2026/0006759 के मामले में हजारीबाग स्वास्थ्य विभाग के कार्यालय से पत्रांक 1694, दिनांक 24 सितंबर 2026 जारी किया गया। पत्र में संबंधित अधिकारियों को शिकायत में अंकित तथ्यों की जांच कर आवश्यक सूचना कार्यालय को उपलब्ध कराने का निर्देश दिया गया है।

जांच की आहट से बढ़ी हलचल?
शिकायतकर्ता के अनुसार, विभागीय जांच की चर्चा के बाद बरकट्ठा क्षेत्र में निजी स्वास्थ्य संस्थानों के बीच काफी बेचैनी देखी जा रही है। उनका दावा है कि कुछ स्थानों पर बैनर हटाए जाने और प्रतिष्ठानों की बाहरी पहचान में बदलाव जैसी गतिविधियां देखने को मिली हैं। हालांकि, इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
शिकायतकर्ता का आरोप है कि बरकट्ठा में ऐसे भी निजी स्वास्थ्य संस्थान संचालित होने की शिकायतें हैं, जहां डॉक्टर की उपलब्धता, चिकित्सकीय योग्यता, फार्मासिस्ट, पंजीकरण एवं आवश्यक लाइसेंस जैसे महत्वपूर्ण बिंदुओं का मौके पर सत्यापन जरूरी है। कुछ संस्थानों के संबंध में तो बिना योग्य चिकित्सक के मरीजों के इलाज किए जाने तक के आरोप लगाए गए हैं।

अगर बारीकी से जांच हुई तो सामने आ सकती है असली तस्वीर
पूरे मामले में सबसे गंभीर सवाल यही है कि यदि स्वास्थ्य विभाग द्वारा बिना पूर्व सूचना के व्यापक और भौतिक सत्यापन कराया जाए तो बरकट्ठा के निजी नर्सिंग होम, अस्पताल, क्लिनिक एवं मेडिकल दुकानों की वास्तविक स्थिति क्या सामने आएगी?
शिकायतकर्ता का कहना है कि यदि प्रत्येक संस्थान के पंजीकरण, डॉक्टर, फार्मासिस्ट, लाइसेंस, भवन एवं अन्य अनिवार्य मानकों की बारीकी से जांच की जाए तो नियमों के विपरीत संचालित पाए जाने वाले संस्थानों पर कार्रवाई की स्थिति बन सकती है।
कागज पर जांच या जमीन पर कार्रवाई?
यहीं से स्वास्थ्य विभाग की भूमिका पर सबसे बड़ा सवाल खड़ा होता है।
जब शिकायत पर विभागीय पत्र जारी हो चुका है, तो फिर वास्तविक जांच में देरी क्यों?
शिकायतकर्ता का आरोप है कि मामले को केवल कागजी प्रक्रिया पूरी कर समाप्त करने का प्रयास किया जा सकता है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया है कि कुछ निजी संस्थानों से जुड़े लोग जांच को प्रभावित करने के लिए प्रखंड से लेकर जिला स्तर तक संपर्क साध रहे हैं। इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है और संबंधित अधिकारियों/संस्थानों का पक्ष सामने आना बाकी है।
लेकिन यदि ये आरोप निराधार हैं तो इसका सबसे बेहतर जवाब भी निष्पक्ष और पारदर्शी स्थल जांच ही हो सकता है।
बरकट्ठा के स्वास्थ्य पदाधिकारी और सिविल सर्जन के सामने सीधा सवाल
अब निगाहें बरकट्ठा के संबंधित स्वास्थ्य पदाधिकारियों और सिविल सर्जन, हजारीबाग पर हैं।
क्या जांच टीम वास्तव में बरकट्ठा पहुंचकर निजी नर्सिंग होम, अस्पताल, क्लिनिक एवं मेडिकल दुकानों का भौतिक सत्यापन करेगी?
क्या जांच से पहले सूचना दिए बिना मौके पर दस्तावेज, डॉक्टर, फार्मासिस्ट और लाइसेंस की जांच होगी?
और यदि कोई संस्थान नियमों के विरुद्ध संचालित पाया जाता है, तो क्या उसके विरुद्ध नियमानुसार तत्काल कार्रवाई होगी?
अब गेंद स्वास्थ्य विभाग के पाले में
यह मामला अब केवल एक शिकायतकर्ता की शिकायत का नहीं रह गया है। विभाग ने स्वयं जांच के लिए पत्र जारी किया है। इसलिए अब बरकट्ठा के लोगों की नजर इस बात पर है कि विभागीय आदेश फाइलों में चलता है या जमीन पर भी दिखाई देता है।
यदि सभी संस्थान नियमों के अनुसार संचालित पाए जाते हैं तो निष्पक्ष जांच से उनकी स्थिति भी साफ हो जाएगी। लेकिन यदि कहीं नियमों का उल्लंघन मिलता है तो कार्रवाई करना स्वास्थ्य विभाग की जिम्मेदारी होगी।
बरकट्ठा में अब सवाल एक ही है—जांच होगी तो निष्पक्ष होगी या सिर्फ कागज पर पूरी कर दी जाएगी?
स्वास्थ्य विभाग की अगली कार्रवाई ही इस पूरे मामले की वास्तविक तस्वीर सामने लाएगी।




