Breaking Newsझारखण्डटेक्नोलॉजीताजा खबरदुनियादेशलाइफस्टाइललाइव न्यूज़

बड़े ही श्रद्धा भाव से गिरिडीह में मनाया गया अक्षय नवमी

गिरिडीह में अक्षय नवमी का पर्व श्रद्धा और विधि-विधान के साथ मनाया गया। कार्तिक मास की शुक्ल पक्ष की नवमी को मनाई जाने वाली अक्षय नवमी को आंवला नवमी भी कहते हैं। इस दौरान महिलाओं ने आंवले के पेड़ की पूजा की और परिवार की सुख-समृद्धि के लिए कामना की।

बड़े ही श्रद्धा भाव से गिरिडीह में मनाया गया अक्षय नवमी

गिरिडीह, मनोज कुमार।

गिरिडीह में अक्षय नवमी का पर्व श्रद्धा और विधि-विधान के साथ मनाया गया। कार्तिक मास की शुक्ल पक्ष की नवमी को मनाई जाने वाली अक्षय नवमी को आंवला नवमी भी कहते हैं। इस दौरान महिलाओं ने आंवले के पेड़ की पूजा की और परिवार की सुख-समृद्धि के लिए कामना की। नगर निगम क्षेत्र के सिहोडीह आम बागान में महिलाएं आंवले के पेड़ के नीचे इकट्ठा हुईं,

जिसे भगवान विष्णु का प्रतीक माना जाता है। पूजा के दौरान, उन्होंने आंवले के पेड़ की परिक्रमा की, भजन गाए और परिवार की खुशहाली की कामना की। पूजा में मूली, खिचड़ी, बैंगन, जल, दूध, धूप और नैवेद्य जैसी सामग्रियाँ अर्पित की गईं।इस दिन दान-पुण्य करने से अक्षय फल मिलता है, ऐसा माना जाता है। पारंपरिक भोजन: कई जगहों पर आंवले के पेड़ के नीचे खिचड़ी बनाकर खाने की परंपरा है।

 

शास्त्रों के अनुसार, कार्तिक नवमी से पूर्णिमा तक भगवान विष्णु आंवले के पेड़ में निवास करते हैं।इस दिन आंवला खाने से शरीर स्वस्थ रहता है और धार्मिक कार्यों से अक्षय फलों की प्राप्ति होती है, जिससे मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं।लक्ष्मी जी ने आंवले के पेड़ को विष्णु और शिव का प्रतीक मानकर उसकी पूजा की, जिससे प्रसन्न होकर दोनों देवता प्रकट हुए।

देवी लक्ष्मी ने आंवले के पेड़ के नीचे भोजन बनाया और दोनों देवताओं को भोजन कराया, फिर खुद प्रसाद ग्रहण किया। जिस दिन यह घटना हुई, वह कार्तिक शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि थी, इसीलिए तब से यह पर्व मनाया जाता है।इस अवसर पर प्रभात कुमार के आवास पर आंवला पेड़़ कि विधि संवंत पुजा किया गया। जहाँ महिलाओं ने आंवला पेड़ कि परिक्रमा करते हुए कुष्मांडा दान किया।सुमन सिन्हा, संगीता सिन्हा, नीता कुमारी, सुचेता वर्मा,प्रचेता वर्मा आदि ने श्रद्धा से पुजा मे शामिल हुए।

Related Articles

Back to top button