पूर्व विधायक का खेती प्रेम धान की रोपाई करते नजर आए पूर्व विधायक केदार हाज़रा। कहा करे जैविक रसायन खाद से खेती
गिरिडीह, जहाँ एक ओर अधिकतर जनप्रतिनिधि गर्मियों की छुट्टियों में राजनीतिक दौरों या कार्यक्रमों में व्यस्त रहते हैं, वहीं जमुआ विधानसभा क्षेत्र से तीन बार विधायक रहे केदार हाज़रा कुछ अलग ही उदाहरण पेश कर रहे हैं।

पूर्व विधायक का खेती प्रेम धान की रोपाई करते नजर आए पूर्व विधायक केदार हाज़रा। कहा करे जैविक रसायन खाद से खेती
गिरिडीह, मनोज कुमार।
गिरिडीह : जहाँ एक ओर अधिकतर जनप्रतिनिधि गर्मियों की छुट्टियों में राजनीतिक दौरों या कार्यक्रमों में व्यस्त रहते हैं, वहीं जमुआ विधानसभा क्षेत्र से तीन बार विधायक रहे केदार हाज़रा कुछ अलग ही उदाहरण पेश कर रहे हैं। इन दिनों वे सादगी के साथ खेतों में पसीना बहाते नज़र आ रहे हैं। उन्होंने अपने गांव के खेतों में इस बार भी परंपरागत रासायनिक खेती की बजाय प्राकृतिक खेती को तरजीह दी है।

पूर्व विधायक केदार हाज़रा ने इस बार फिर कई एकड़ जमीन में धान की फसल प्राकृतिक विधि से लगाई है, जिसमें न तो कोई रासायनिक खाद डाली गई है और न ही कीटनाशक दवाइयों का इस्तेमाल किया गया है। खेत में ही गाय के गोबर से तैयार किया गया जीवामृत और देशी तरीकों से बनाई गई औषधियों का प्रयोग कर वे धरती को फिर से उपजाऊ और जहरमुक्त बना रहे हैं।

जब पत्रकारों ने केदार हाज़रा से पूछा कि इतने व्यस्त राजनीतिक जीवन के बीच खेती के लिए समय कैसे निकालते हैं, तो उन्होंने मुस्कराते हुए कहा कि जनप्रतिनिधि हूँ लेकिन किसान का बेटा जन्म से हूं। मुझे खेतों में काम करना सुकून देता है। राजनीति सेवा का माध्यम है, लेकिन खेती आत्मा से जुड़ी हुई है। जब मिट्टी में हाथ लगता है तो अपनापन महसूस होता है।

पूर्व विधायक केदार हाज़रा सिर्फ खुद खेती नहीं कर रहे, बल्कि अपने विधानसभा क्षेत्र के किसानों को भी प्राकृतिक खेती की ओर प्रेरित कर रहे हैं। वे समय-समय पर गांवों में जाकर किसानों से संवाद करते हैं और उन्हें इसके लाभ बताते हैं। उन्होंने कहा, “सरकार की तरफ से भी प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने के लिए योजनाएं चलाई जा रही हैं, लेकिन सबसे बड़ा बदलाव सोच का होता है।

जब तक किसान खुद यह नहीं समझेगा कि रासायनिक खेती से उसकी मिट्टी मर रही है, तब तक बदलाव मुश्किल है। बहरहाल केदार हाज़रा जैसे जनप्रतिनिधि जब खुद खेतों में उतरते हैं और आधुनिकता की चकाचौंध के बीच प्राकृतिक खेती को अपनाते हैं, तो यह न सिर्फ एक प्रेरणादायक संदेश है, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए एक मजबूत उदाहरण भी है।




