निरसा, मैथन, गलफरबाड़ी, कालूबाथान व पंचेत में डंके की चोट पर जारी है अवैध कोयले का कारोबार कोल तस्करों के आगे निरसा अनुमंडल पुलिस नतमस्तक
विधानसभा का निरसा, मैथन, पंचेत, कालूबाथान व गलफरबाड़ी क्षेत्र इनदिनों कोल तस्करों का सेफ जोन बना हुआ है ।

निरसा, मैथन, गलफरबाड़ी, कालूबाथान व पंचेत में डंके की चोट पर जारी है अवैध कोयले का कारोबार कोल तस्करों के आगे निरसा अनुमंडल पुलिस नतमस्तक
निरसा : विधानसभा का निरसा, मैथन, पंचेत, कालूबाथान व गलफरबाड़ी क्षेत्र इनदिनों कोल तस्करों का सेफ जोन बना हुआ है । भाजपा नेता सिमंतो मंडल के द्वारा जिला प्रशासन व निरसा अनुमंडल को कोयला चोरी रोकने हेतू दिए गए शिकायत के दो माह बाद भी निरसा विधानसभा के निरसा, मैथन, गलफरबाड़ी, पंचेत और कालूबाथान क्षेत्रों में डंके की चोट पर रात के अंधेरे से दिन के उजाले तक अवैध कोयले का कारोबार निर्बाध रूप से जारी है ।

वही विधानसभा क्षेत्र में चल रहे अवैध कोयले का कारोबार रोकने के बजाए कोल तस्करों के आगे नतमस्तक है । निरसा अनुमंडल क्षेत्र में कोल तस्करी रोकने के जिम्मेवार सभी माननीय गेंद को एक दूसरे के पाले में डालकर अपना पाल्ला झाड़ रहे है । पूरे विधानसभा क्षेत्र के सड़कों व पगडंडियों पर इसका जीता जागता नजारा खुली आंखों से देखा जा सकता है । धंधे के एवज में कोल तस्करों द्वारा प्रतिमाह चढ़ाए जानेवाले चढ़ावे ने जिम्मेवार माननीय को धृतराष्ट्र बनने पर मजबूर कर दिया है । सबकुछ जानते हुए भी ईसीएल, बीसीसीएल, स्थानीय प्रशासन मूकदर्शक बने हुए है ।
सूत्र बताते है कि शाम होते ही ट्रेक्टरों, हाइवा, मोटर साईकिल व अन्य वाहनों से पूरे विधानसभा क्षेत्र में अवैध उत्खनन व चोरी के कोयले की ढुलाई शुरू हो जाती है जो रातभर निर्बाध रूप से जारी रहती है । गड़गड़ाहट सुनकर ऐसा प्रतीत होता है कि मानो जैसे जंग शुरू हो गई हो । वही भट्ठा और डिपो संचालक अपने गुर्गो के साथ सक्रिय रहते है ।
सूत्र बताते है पूरे विधानसभा क्षेत्र के जंगलों, ईसीएल व बीसीसीएल के बंद खदानों में कोल तस्करों ने हजारों अवैध उत्खनन स्थल बना रखे है जहां से निर्बाध रूप से अवैध कोयले की आपूर्ति हो सके । साथ ही अवैध उत्खनन के लिए कोल तस्करों व भट्ठा संचालकों ने बंगाल व झारखंड के विभिन्न क्षेत्रों से सैकड़ों मजदूर मंगा रखे है ताकि अवैध उत्खनन के दौरान कोई अप्रिय घटना घटती है तो अपना गर्दन फंसने से बचा जा सके ।
अवैध उत्खनन के दौरान उन तमाम मजदूरों के रहने, खाने पीने व आवागमन की सारी जिम्मेवारी कोल तस्कर व भट्ठा संचालक उठाते है । हल्की फुल्की घटना को तो स्थानीय प्रशासन ही संभाल लेती है । वही बड़ी घटना घटने पर सभी एक दूसरे पर गेंद फेंककर अपना पाला झाड़ लेते है । ऐसे में पूरे निरसा विधानसभा क्षेत्र में कैसे रुकेगा अवैध कोयले का कारोबार । यह बात इनदिनों स्थानीय लोगों के बीच यक्ष प्रश्न बना हुआ है ।




