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कर्मा के रंग में रंगा गिरिडीह, ढोल-मांदर की थाप पर रातभर थिरकीं महिलाएं

प्राकृतिक पर्व कर्मा पूजा के अवसर पर गिरिडीह में आदिवासी समाज की परंपरा और संस्कृति का अद्भुत नजारा देखने को मिला।

कर्मा के रंग में रंगा गिरिडीह, ढोल-मांदर की थाप पर रातभर थिरकीं महिलाएं
फूलो-झानो तिलका मांझी हूल सरदार बैसी के तत्वावधान में धूमधाम से हुआ कर्मा पूजा का आयोजन

गिरिडीह, मनोज कुमार।

गिरिडीह : प्राकृतिक पर्व कर्मा पूजा के अवसर पर गिरिडीह में आदिवासी समाज की परंपरा और संस्कृति का अद्भुत नजारा देखने को मिला। फूलो-झानो तिलका मांझी हूल सरदार बैसी, सिरसिया, गिरिडीह के तत्वावधान में कर्मा पूजा का आयोजन पूरे विधि-विधान और पारंपरिक रीति-रिवाज के साथ किया गया।

पूजा के दौरान कर्मा डाड़ स्थापित कर युवतियों और महिलाओं ने विधिवत पूजा-अर्चना की और सुख-समृद्धि की कामना की। इसके बाद देर रात तक कर्मा के पारंपरिक गीतों का दौर चलता रहा। ढोल-मांदर की थाप पर महिलाओं और युवतियों ने पारंपरिक नृत्य कर पूरे माहौल को उत्सवमय बना दिया।

कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में प्रखंड विकास पदाधिकारी गणेश रजक अपने पूरे परिवार के साथ मौजूद रहे। वहीं संस्था की अध्यक्ष सीतामणि किस्कू, उपाध्यक्ष मुनि बेसरा, सन्नी टुडू, प्रेमी बेसरा, श्री फूल टुडू, सोना मनी टुडू, शांति मुर्मू, सुशीला देवी, शीला टुडू, नूनका टुडू, साहेब राम बेसरा, देवन बेसरा, जागेश्वर मरांडी, भाजपा नेता नुनु लाल मरांडी और सिकंदर हेंब्रम सहित बड़ी संख्या में लोग मौजूद रहे।

रातभर कर्मा गीत, ढोल-मांदर और पारंपरिक नृत्य के बाद सुबह कर्मा डाड़ का विधिवत विसर्जन किया गया। इस दौरान लोगों ने प्रकृति, परंपरा और संस्कृति के संरक्षण का संदेश भी दिया।
फूलो-झानो तिलका मांझी हूल सरदार बैसी के इस आयोजन ने कर्मा पर्व की पारंपरिक संस्कृति और सामुदायिक एकता की खूबसूरत तस्वीर पेश की।

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