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आस्था के महापर्व को लेकर कुमारधुबी बाजार सेवा समिति द्वारा 11 किउंटल लौकी का किया गया वितरण।

आस्था के महापर्व को लेकर कुमारधुबी बाजार सेवा समिति द्वारा 11 किउंटल लौकी का किया गया वितरण।

आस्था के महापर्व को लेकर कुमारधुबी बाजार सेवा समिति द्वारा 11 किउंटल लौकी का किया गया वितरण।

धनबाद: मलय गोप

धनबाद/निरसा: बिहार झारखण्ड का महान पर्व छठ पूजा को लेकर काफी उत्साह देखी जा रही हैं चार दिनों का यह आस्था का महापर्व की शुक्रवार यानी आज नहाय खाय के साथ शुरू हो गई हैं इस दिन छठ व्रती पूरे विधि विधान से नहा घोकर शुद्ध होकर लौकी भात बना कर पर्व की शुरुआत करती हैं जो कि चार दिनों तक यह अनुश्ठान चलता हैं।इसी क्रम में कुमारधुबी छठ पूजा सेवा समिति व पसस सदस्य श्रीमती मधु सिंह द्वारा कुमारधुबी बाजार स्थित संकट मोचन धर्मशाला के समीप व्रतधारियों के बीच 11 किउंटल लौकी का वितरण किए वही कुमारधुबी बाजार में छोटे छोटे बच्चों द्वारा भी लौकी का वितरण किया गया जिसका नेतृत्व पूर्व पार्षद इरफान अहमद खान ने किया और सभी व्रतधारियों के बीच लौकी वितरण कर छठ मईया से सभी के लिए मंगल कामना किए।

जानते है नहाय खाय क्या है:

 

व्रत रखने वाली महिलाओं के प्रसाद ग्रहण करने के बाद ही परिवार के अन्य सदस्य भोजन करते हैं. इस दिन व्रत से पूर्व नहाने के बाद सात्विक भोजन ग्रहण करना ही नहाय-खाय कहलाता है. मुख्यतौर पर इस दिन छठ व्रती लौकी की सब्जी और चने की दाल ग्रहण करते हैं. इन सब्जियों को पूरी पवित्रता के साथ धोया जाता है. खाना पकाने के दौरान साफ सफाई का पूरा ध्यान रखा जाता है

. खाना पकाने के दौरान भी छठव्रती छठी मईया की गीतों से आराधना करती नजर आती हैं. नहाय खाय के दिन जो खाना खाया जाता है उसमें सेंधा नमक का इस्तेमाल किया जाता है. नियम का पालन करते हुए छठव्रती के भोजन ग्रहण करने के बाद घर के बाकि सदस्य भोजन ग्रहण कर सकते हैं. यह व्रत काफी कठिन होता है. इसलिए बीमार या शारीरिक रूप से कमजोर लोग इस व्रत को नहीं कर सकते हैं।माँ छठ मईया सबको अपना आशीष प्रदान करती हैं।

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