Ranchi Protest: सोनम वांगचुक की अपील के बाद देवेंद्र नाथ महतो ने पिया पानी, लेकिन भूख हड़ताल जारी; सरकार को दी दो टूक चेतावनी
झारखंड में प्रतियोगी परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं को लेकर चल रहा छात्र आंदोलन निर्णायक मोड़ पर, स्वास्थ्य बिगड़ने के बावजूद अनशन खत्म करने से किया इनकार।

Ranchi Protest: सोनम वांगचुक की अपील के बाद देवेंद्र नाथ महतो ने पिया पानी, लेकिन भूख हड़ताल जारी; सरकार को दी दो टूक चेतावनी
रांची: झारखंड में जेपीएससी, जेएसएससी सीजीएल और अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं में कथित धांधली के विरोध में जारी छात्र आंदोलन अब एक अहम मोड़ पर पहुंच गया है। 3 जुलाई से अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर बैठे छात्र नेता देवेंद्र नाथ महतो ने बुधवार को पहली बार पानी ग्रहण किया। हालांकि उन्होंने स्पष्ट कर दिया कि यह उनके आंदोलन का अंत नहीं है और सरकार द्वारा मांगें पूरी किए जाने तक वह अन्न ग्रहण नहीं करेंगे।
सोनम वांगचुक की अपील के बाद लिया फैसला
भूख हड़ताल के दौरान लगातार बिगड़ती तबीयत को देखते हुए प्रसिद्ध सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने देवेंद्र नाथ महतो से वीडियो कॉल पर बातचीत की। करीब 10 मिनट तक चली इस बातचीत में वांगचुक ने छात्रों के आंदोलन के प्रति अपना समर्थन दोहराते हुए महतो से स्वास्थ्य का भी ध्यान रखने की अपील की।
उन्होंने आग्रह किया कि छात्रों के अधिकारों की लड़ाई जारी रहे, लेकिन जीवन और स्वास्थ्य की सुरक्षा भी उतनी ही जरूरी है। इसी अपील को स्वीकार करते हुए देवेंद्र नाथ महतो ने पानी पिया।
‘पानी पिया है, लेकिन अनशन खत्म नहीं हुआ’
पानी पीने के बाद देवेंद्र नाथ महतो ने कहा कि उनकी तबीयत लगातार खराब हो रही थी, लेकिन सोनम वांगचुक के अनुरोध का सम्मान करते हुए उन्होंने केवल पानी ग्रहण किया है। उन्होंने दोहराया कि जब तक सरकार उनकी मांगों पर ठोस निर्णय नहीं लेती, तब तक वह अन्न ग्रहण नहीं करेंगे।
महतो ने यह भी कहा कि उन्होंने पहले जंतर-मंतर पर सोनम वांगचुक के आंदोलन का समर्थन किया था और अब उन्हें उम्मीद है कि वांगचुक भी रांची पहुंचकर छात्रों का मनोबल बढ़ाएंगे। उन्होंने उनसे व्यक्तिगत रूप से मिलने की इच्छा भी जताई।
मानसून सत्र से पहले तेज हुआ छात्र आंदोलन
झारखंड विधानसभा का मानसून सत्र गुरुवार से शुरू होने जा रहा है। इससे ठीक पहले राजधानी रांची में छात्रों का विरोध प्रदर्शन और तेज हो गया है। देवेंद्र नाथ महतो सहित छह छात्र अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर बैठे हैं, जबकि पिछले 10 दिनों से प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे युवाओं के अलग-अलग समूह लगातार प्रदर्शन कर रहे हैं।
छात्रों का कहना है कि प्रतियोगी परीक्षाओं में पारदर्शिता सुनिश्चित किए बिना युवाओं का भविष्य सुरक्षित नहीं हो सकता।
छात्रों की प्रमुख मांगें क्या हैं?
प्रदर्शन कर रहे छात्रों ने सरकार के सामने कई अहम मांगें रखी हैं। इनमें 14वीं जेपीएससी परीक्षा को रद्द करने, जेपीएससी और जेएसएससी की कार्यप्रणाली में व्यापक सुधार लागू करने तथा कथित परीक्षा धांधली की जांच सीबीआई या राज्य के बाहर के सेवानिवृत्त हाई कोर्ट के न्यायाधीशों की स्वतंत्र समिति से कराने की मांग प्रमुख है।
जेपीएससी-जेएसएससी रिफॉर्म्स मंच के प्रवक्ता जीवन कुमार ने बताया कि आंदोलन को और व्यापक बनाने के लिए कोर कमेटी जल्द बैठक करेगी। इस बैठक में छात्रों के समर्थन में ‘तिरंगा मार्च’ निकालने पर भी निर्णय लिया जाएगा।
छात्राओं ने भी सरकार पर लगाए अनदेखी के आरोप
भूख हड़ताल में शामिल छात्रा सबिता कुमारी ने कहा कि सरकार की ओर से लगातार अनदेखी किए जाने के कारण उन्हें इतना कठोर कदम उठाने के लिए मजबूर होना पड़ा। उनका कहना है कि जब तक युवाओं की मांगों पर गंभीरता से कार्रवाई नहीं होती, आंदोलन जारी रहेगा।
मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने क्या कहा?
छात्र आंदोलन के बीच झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने कहा कि राज्य सरकार प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे युवाओं की चिंताओं को गंभीरता से ले रही है। उन्होंने भरोसा दिलाया कि सभी पहलुओं की जांच की जा रही है और उचित समय पर आवश्यक निर्णय लिया जाएगा।
फिलहाल छात्रों का कहना है कि केवल आश्वासन से काम नहीं चलेगा। जब तक उनकी मांगों पर ठोस कार्रवाई नहीं होती, तब तक आंदोलन जारी रहेगा।




