4 KM तक खाट पर तड़पती रही गर्भवती! सड़क नहीं तो एम्बुलेंस भी बेबस, फिर उजागर हुई प्रशासनिक लापरवाही
गिरिडीह जिले के पीरटांड़ प्रखंड के उत्तरी पारसनाथ क्षेत्र में सड़क की बदहाली ने एक बार फिर ग्रामीणों की बेबसी को उजागर कर दिया।

4 KM तक खाट पर तड़पती रही गर्भवती! सड़क नहीं तो एम्बुलेंस भी बेबस, फिर उजागर हुई प्रशासनिक लापरवाही
गिरिडीह के पीरटांड़ में सड़क के अभाव में प्रसव पीड़ा से कराहती महिला को ग्रामीणों ने खाट पर ढोकर मुख्य सड़क तक पहुंचाया, फिर एम्बुलेंस से अस्पताल भेजा गया।
गिरिडीह, मनोज कुमार।
गिरिडीह : जिले के पीरटांड़ प्रखंड के उत्तरी पारसनाथ क्षेत्र में सड़क की बदहाली ने एक बार फिर ग्रामीणों की बेबसी को उजागर कर दिया। शनिवार को दलवाडीह गांव में प्रसव पीड़ा से तड़प रही एक गर्भवती महिला को ग्रामीणों ने खाट पर लिटाकर करीब चार किलोमीटर पैदल चलकर मुख्य सड़क तक पहुंचाया। इसके बाद एम्बुलेंस से महिला को अस्पताल ले जाया गया, जहां समय पर इलाज मिलने से उसकी जान बच गई।

जानकारी के अनुसार, दलवाडीह निवासी संतोष मुर्मू की पत्नी लोगो टुडू को सुबह अचानक प्रसव पीड़ा शुरू हुई। परिजनों ने तुरंत 108 एम्बुलेंस सेवा को सूचना दी, लेकिन गांव तक सड़क नहीं होने के कारण एम्बुलेंस पहुंच ही नहीं सकी। मजबूरन ग्रामीणों ने महिला को खाट पर लिटाया और ऊबड़-खाबड़ रास्तों से होते हुए करीब चार किलोमीटर दूर पिपराडीह मुख्य मार्ग तक पैदल ले गए। वहां पहले से मौजूद एम्बुलेंस ने महिला को अस्पताल पहुंचाया।
हैरानी की बात यह है कि शुक्रवार को ही ग्रामीणों ने उपायुक्त से मिलकर सड़क निर्माण की मांग उठाई थी। लेकिन अगले ही दिन फिर वही द,र्दनाक तस्वीर सामने आ गई। रास्ते में महिला की हालत बिगड़ने लगी थी, जिससे ग्रामीणों की चिंता और बढ़ गई। हालांकि अस्पताल में समय पर उपचार मिलने से बड़ी अनहोनी टल गई।

ग्रामीणों का कहना है कि यह किसी एक परिवार की नहीं, बल्कि पूरे क्षेत्र की समस्या है। सड़क के अभाव में हर आपातकालीन स्थिति जानलेवा बन जाती है। लोगों ने जिला प्रशासन से अविलंब पक्की सड़क निर्माण कराने की मांग करते हुए कहा कि यदि जल्द समाधान नहीं हुआ तो किसी दिन बड़ा हादसा हो सकता है।
डिजिटल इंडिया और विकास के दावों के बीच गिरिडीह के इस गांव की तस्वीर कई सवाल खड़े करती है। जहां सड़क नहीं, वहां एम्बुलेंस भी बेबस है और जिंदगी बचाने का जिम्मा आज भी ग्रामीणों के कंधों पर है। आखिर कब बदलेगी यह तस्वीर?




