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28 वर्षों की परंपरा को भव्यता के साथ आगे बढ़ा रही रविंद्र ग्रंथागार काली पूजा समिति, बंगला स्कूल परिसर में सजेगा मां काली का दरबार; आकर्षक पंडाल बनेगा श्रद्धालुओं के आकर्षण का केंद्र

आस्था, भक्ति और परंपरा का अनूठा संगम एक बार फिर गिरिडीह में देखने को मिलेगा। रविंद्र ग्रंथागार काली पूजा समिति की ओर से इस वर्ष भी बंगला स्कूल परिसर में मां काली की पूजा-अर्चना की भव्य तैयारी की गई है।

28 वर्षों की परंपरा को भव्यता के साथ आगे बढ़ा रही रविंद्र ग्रंथागार काली पूजा समिति, बंगला स्कूल परिसर में सजेगा मां काली का दरबार; आकर्षक पंडाल बनेगा श्रद्धालुओं के आकर्षण का केंद्र

गिरिडीह, मनोज कुमार।

गिरिडीह : आस्था, भक्ति और परंपरा का अनूठा संगम एक बार फिर गिरिडीह में देखने को मिलेगा। रविंद्र ग्रंथागार काली पूजा समिति की ओर से इस वर्ष भी बंगला स्कूल परिसर में मां काली की पूजा-अर्चना की भव्य तैयारी की गई है। समिति पिछले लगभग 28 वर्षों से लगातार मां काली की पूजा का आयोजन करती आ रही है। वर्षों पुरानी इस परंपरा को आगे बढ़ाते हुए इस बार भी पूजा को विशेष और आकर्षक बनाने की तैयारी की गई है।

खास बात यह है कि यहां मां काली की प्रतिमा बंगाल के कुशल कारीगरों द्वारा तैयार की जाती है। प्रतिमा की भव्यता और कलात्मकता श्रद्धालुओं के लिए विशेष आकर्षण रहती है। वहीं इस वर्ष भव्य पंडाल का निर्माण कराया गया है, जो अपनी आकर्षक सजावट और खूबसूरत बनावट से लोगों को मंत्रमुग्ध करेगा।

समिति के कार्यक्रम के अनुसार, 8 नवंबर को मां काली की विधिवत पूजा-अर्चना की जाएगी। वहीं 9 नवंबर को सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन, श्रद्धालुओं के बीच महाप्रसाद का वितरण और 10 तारीख को मां काली की प्रतिमा का विसर्जन किया जाएगा।

पूजा को सफल बनाने में समिति के अध्यक्ष तरुण मुखर्जी के साथ अरिंदम बस, वैद्यनाथ पॉल, विश्वनाथ पॉल, संदीप चटर्जी, पार्थो सरकार, बाबू घोष, आयन बनर्जी, प्रणेश दास, डॉ. आलोक रंजन रॉय, सुमित चटर्जी, असीम डे सहित समिति के अन्य सदस्य सक्रिय रूप से जुटे हुए हैं।

28 वर्षों की आस्था और परंपरा के साथ इस बार रविंद्र ग्रंथागार काली पूजा समिति का आयोजन श्रद्धालुओं के लिए विशेष आकर्षण बनने जा रहा है।

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