शहीदों की आत्मा की शांति के लिए 1518 KM पैदल यात्रा! गंगोत्री का जल लेकर गिरिडीह पहुंचे ‘गुणी बाबा’
देश की सरहद पर मातृभूमि की रक्षा करते हुए शहीद हुए जवानों की आत्मा की शांति के लिए एक शिवभक्त ने अनोखा संकल्प लिया है।

शहीदों की आत्मा की शांति के लिए 1518 KM पैदल यात्रा! गंगोत्री का जल लेकर गिरिडीह पहुंचे ‘गुणी बाबा’
गिरिडीह, मनोज कुमार।
गिरिडीह : देश की सरहद पर मातृभूमि की रक्षा करते हुए शहीद हुए जवानों की आत्मा की शांति के लिए एक शिवभक्त ने अनोखा संकल्प लिया है। धनबाद के धोवाटांड़, शास्त्री नगर निवासी गुणवंत जोशी उर्फ ‘गुणी बाबा’ गंगोत्री धाम से पवित्र जल लेकर करीब 1518 किलोमीटर की पदयात्रा करते हुए गिरिडीह पहुंचे।

गिरिडीह पहुंचने पर शिवभक्तों और स्थानीय लोगों ने उनका भव्य स्वागत किया। इसी क्रम में वे बाबा राजपूत मोहल्ला भी पहुंचे, जहां बबलू चंद्रवंशी सहित अन्य लोगों ने उन्हें भगवा वस्त्र पहनाकर सम्मानित किया।
गुणवंत जोशी ने बताया कि उनका संकल्प गंगोत्री धाम से जल लाकर बाबा बैद्यनाथ धाम और इसके बाद बाबा बासुकीनाथ धाम में जलाभिषेक करने का है। उनका कहना है कि यह यात्रा वह देश की सरहद पर शहीद हुए वीर सैनिकों की आत्मा की शांति के लिए कर रहे हैं।

उन्होंने बताया कि बाबा बैद्यनाथ और बाबा बासुकीनाथ में जलाभिषेक के बाद वे गुजरात स्थित बाबा नागेश्वर धाम के लिए रवाना होंगे। वहां भी भगवान शिव का जलाभिषेक कर शहीद जवानों की आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना करेंगे।
गुणवंत जोशी का कहना है कि देश की रक्षा के लिए जवान अपनी जवानी और जिंदगी तक देश के नाम कुर्बान कर देते हैं। ऐसे 20 वीर सपूतों की आत्मा की शांति के लिए उनका यह छोटा-सा प्रयास है।

ब्रह्मचर्य जीवन जी रहे गुणवंत जोशी पेशे से मैकेनिकल इंजीनियरिंग के क्षेत्र में कार्यरत हैं। उन्होंने बताया कि इतनी लंबी पदयात्रा के दौरान रास्ते में उन्हें लोगों का भरपूर सहयोग मिलता है। कई जगह श्रद्धालु भोजन-पानी और दूसरी जरूरतों में मदद करते हैं। उन्होंने कहा कि रास्ते में उन्हें कभी किसी चीज की कमी महसूस नहीं हुई और यह सब बाबा भोलेनाथ की कृपा है।
गुणी बाबा ने गिरिडीह के लोगों की भी जमकर तारीफ की। उन्होंने कहा कि गिरिडीह के लोग बेहद अच्छे और धार्मिक भावना से जुड़े हुए हैं। यहां पहुंचने पर शिवभक्तों ने जिस तरह उनका स्वागत और सम्मान किया, उससे वे बेहद भावुक और अभिभूत हैं।
गंगोत्री से निकली यह पदयात्रा सिर्फ एक धार्मिक यात्रा नहीं, बल्कि देश के वीर शहीदों को श्रद्धांजलि देने और उनके प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने का एक अनोखा संकल्प बन गई है।




