वित्तीय वर्ष 2025-26 में अमानक पाये गये कृषि उपादानों के निर्माता एवं विकेताओं के विरुद्ध होगी कठोर कार्रवाई, गुणवत्ता से नहीं होगा समझौता
माननीय कृषि मंत्री श्री विजय कुमार सिन्हा ने आज रसायन भवन, पटना स्थित गुण नियंत्रण एवं बीज विश्लेषण प्रयोगशाला का निरीक्षण कर प्रयोगशालाओं की कार्यप्रणाली, उपलब्ध संसाधनों एवं विभिन्न नमूनों की जांच व्यवस्था की विस्तृत समीक्षा की।

वित्तीय वर्ष 2025-26 में अमानक पाये गये कृषि उपादानों के निर्माता एवं विकेताओं के विरुद्ध होगी कठोर कार्रवाई, गुणवत्ता से नहीं होगा समझौता
कृषि उपादानों की गुणवत्ता सुनिश्चित करने हेतु प्रयोगशालाओं को और सुदृढ़ किया जाएगा
प्रयोगशालाओं में गुणवत्ता, पारदर्शिता एवं वैज्ञानिक मानकों का कड़ाई से हो अनुपालन
जय जवान, जय किसान, जय विज्ञान के बाद जय अनुसंधान की जरूरत
पटना : माननीय कृषि मंत्री श्री विजय कुमार सिन्हा ने आज रसायन भवन, पटना स्थित गुण नियंत्रण एवं बीज विश्लेषण प्रयोगशाला का निरीक्षण कर प्रयोगशालाओं की कार्यप्रणाली, उपलब्ध संसाधनों एवं विभिन्न नमूनों की जांच व्यवस्था की विस्तृत समीक्षा की। इस दौरान उन्होंने प्रयोगशालाओं में संचालित परीक्षण कार्यों, आधुनिक उपकरणों, मानव संसाधन, परीक्षण क्षमता एवं गुणवत्ता नियंत्रण व्यवस्था का अवलोकन करते हुए आवश्यक दिशा-निर्देश दिए।
समीक्षा के दौरान कृषि मंत्री ने कहा कि किसानों को गुणवत्तापूर्ण बीज, उर्वरक एवं कीटनाशी उपलब्ध कराना राज्य सरकार की सर्वाेच्च प्राथमिकता है। इसके लिए प्रयोगशालाओं द्वारा निर्धारित मानकों के अनुरूप निष्पक्ष एवं गुणवत्तापूर्ण जांच सुनिश्चित की की जाये। उन्होंने निदेश दिया कि गुणवत्ता एवं मानकों से किसी प्रकार का समझौता स्वीकार्य नहीं होगा तथा सभी नमूनों की जाँच वैज्ञानिक एवं विधिसम्मत प्रक्रिया के अनुरूप की जाये।

श्री सिन्हा ने प्रयोगशालाओं में आधुनिक तकनीक एवं अत्याधुनिक मशीनों की उपलब्धता की समीक्षा करते हुए आवश्यकतानुसार तकनीकी उन्नयन का प्रस्ताव तैयार करने का निर्देश दिया। साथ ही, जैव उत्प्रेरक (Biostimulant) परीक्षण प्रयोगशाला की स्थापना हेतु आवश्यक आधारभूत संरचना, उपकरण, मानव संसाधन एवं अन्य आवश्यकताओं का विस्तृत प्रस्ताव शीघ्र उपलब्ध कराने का निर्देश दिया। उन्होंने कहा कि आवश्यकता पड़ने पर कृषि विष्वविद्यालयों से विशेषज्ञ वैज्ञानिकों की सेवाएं भी ली जाएंगी, ताकि प्रयोगशालाओं की क्षमता एवं गुणवत्ता को और सुदृढ़ किया जा सके।
कृषि मंत्री ने दक्ष एवं उत्तरदायी टीम के गठन पर बल देते हुए निर्देश दिया कि प्रत्येक माह प्रयोगशालाओं की नियमित समीक्षा बैठक आयोजित की जाए तथा कार्यों के निष्पादन में आने वाली समस्याओं का समयबद्ध समाधान सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने अधिकारियों से पूरी निष्ठा एवं प्रतिबद्धता के साथ कार्य करने का निदेष देते हुए कहा कि आगामी तीन माह के भीतर प्रयोगशालाओं की कार्यक्षमता, गुणवत्ता एवं परीक्षण प्रणाली में स्पष्ट सुधार परिलक्षित होना चाहिए।

माननीय मंत्री ने बताया कि वित्तीय वर्ष 2026-27 के शारदीय (खरीफ) मौसम हेतु 20,000 बीज नमूनों की जांच का लक्ष्य निर्धारित है। इसके विरुद्ध अब तक 11,236 बीज नमूनों का संग्रहण एवं परीक्षण किया जा चुका है, जिनमें 162 नमूने अमानक पाए गए हैं। अमानक पाए गए बीजों की बिक्री पर रोक लगाने के साथ संबंधित संस्थानों के विरुद्ध विधिसम्मत कार्रवाई की जा रही है।
माननीय कृषि मंत्री ने कार्बनिक, जैव एवं अकार्बनिक उर्वरकों तथा कीटनाशी एवं जैव कीटनाशी नमूनों की जाँच के प्रगति की समीक्षा करते हुए अधिकारियों को जांच कार्य में और तेजी लाने का निर्देश दिया। उन्होंने निदेष दिया कि सभी प्राप्त नमूनों की निर्धारित मानकों के अनुरूप समयबद्ध जांच सुनिश्चित करने तथा अमानक पाए जाने वाले कृषि उपादानों के विरुद्ध विधिसम्मत कार्रवाई की जाये। जिन जिलों द्वारा अपेक्षाकृत कम संख्या में नमूने जाँच हेतु भेजे जा रहे हैं, उनकी समीक्षा करते हुए संबंधित पदाधिकारियों के विरुद्ध आवश्यक कार्रवाई करने तथा नमूना संग्रहण एवं जाँच की प्रक्रिया में अपेक्षित गति लाने के निर्देश भी दिये। उन्होंने कहा कि बीज, उर्वरक, कीटनाषी के नमूनों के संग्रहण में पूूरी पारदर्षिता बरती जाये तथा जाँच हेतु प्राप्त नमूनों की गोपनीयता सुनिष्चित किया जाये।
कृषि मंत्री ने निदेष दिया कि किसानों के हितों की रक्षा के लिए गुणवत्ता नियंत्रण प्रणाली को और अधिक प्रभावी बनाया जाए तथा अमानक बीज, उर्वरक एवं कीटनाशकों के विरुद्ध नियमित निगरानी एवं सख्त कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। उन्होंने कहा कि कृषि उपादानों की गुणवत्ता से किसी प्रकार का समझौता नहीं किया जाएगा तथा विभाग किसानों के हितों की रक्षा के लिए पूर्णतः प्रतिबद्ध है।
माननीय कृषि मंत्री ने विभाग के पदाधिकारियों को प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने के लिए प्रभावी कार्य योजना तैयार करने का निदेष दिया है। उन्होंने कहा कि प्राकृतिक खेती से पर्यावरण संरक्षण के साथ खेती की लागत घटेगी और किसानों की आय में वृद्धि होगी।
माननीय मंत्री ने कहा कि कृषि क्षेत्र की बदलती चुनौतियों और किसानों के अपेक्षाओं को देखते हुए आज समय की मांग है कि हम श्जय जवान, जय किसान, जय विज्ञानश् के साथ श्जय अनुसंधानश् को भी अपना संकल्प बनाएं। क्योंकि जब तक प्रयोगशालाओं में गुणवत्तापूर्ण अनुसंधान नहीं होगा, खेतों तक उत्कृष्ट बीज, उर्वरक और नई तकनीक नहीं पहुँचेगी। अनुसंधान ही गुणवत्तापूर्ण कृषि, समृद्ध किसान और विकसित भारत की सबसे मजबूत नींव है।



