राजकुमार शुक्ल की याद में डॉ. प्रेम कुमार का बड़ा संदेश, बोले- ‘लोक चिंतन मजबूत होगा तो लोकतंत्र मजबूत होगा’
बिहार विधान सभा के अध्यक्ष डॉ. प्रेम कुमार आज बिहार विधान परिषद सभागार में आयोजित पंडित राजकुमार शुक्ल स्मृति सम्मान–2026 एवं लोक चिंतन स्थापना दिवस समारोह में शामिल हुए।

राजकुमार शुक्ल की याद में डॉ. प्रेम कुमार का बड़ा संदेश, बोले- ‘लोक चिंतन मजबूत होगा तो लोकतंत्र मजबूत होगा’
Patna News: बिहार विधान सभा के अध्यक्ष डॉ. प्रेम कुमार आज बिहार विधान परिषद सभागार में आयोजित पंडित राजकुमार शुक्ल स्मृति सम्मान–2026 एवं लोक चिंतन स्थापना दिवस समारोह में शामिल हुए। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए उन्होंने पंडित राजकुमार शुक्ल के संघर्ष, दृढ़ इच्छाशक्ति और चंपारण सत्याग्रह में उनकी ऐतिहासिक भूमिका को याद किया। उन्होंने कहा कि राजकुमार शुक्ल केवल एक व्यक्ति का नाम नहीं, बल्कि किसान की पीड़ा, आम आदमी के संघर्ष और अपने अधिकार के लिए अडिग संकल्प का प्रतीक हैं।

राजकुमार शुक्ल के आग्रह से चंपारण पहुंचे थे महात्मा गांधी
डॉ. प्रेम कुमार ने कहा कि पंडित राजकुमार शुक्ल को याद करते ही चंपारण सत्याग्रह की ऐतिहासिक स्मृति सामने आती है। उस दौर में चंपारण के किसानों को जबरन नील की खेती की व्यवस्था और अंग्रेजी शासन के अत्याचारों का सामना करना पड़ रहा था। किसानों की परेशानियों को देखकर राजकुमार शुक्ल ने महात्मा गांधी से चंपारण आने और किसानों की वास्तविक स्थिति देखने का आग्रह किया।
उन्होंने कहा कि राजकुमार शुक्ल का संकल्प इतना मजबूत था कि उनके लगातार प्रयासों के बाद महात्मा गांधी चंपारण पहुंचे। इसके साथ ही भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन में एक महत्वपूर्ण अध्याय की शुरुआत हुई। राजकुमार शुक्ल ने यह साबित किया कि किसी व्यक्ति की सामाजिक या आर्थिक स्थिति चाहे जैसी हो, यदि उसका संकल्प मजबूत हो तो वह इतिहास की दिशा बदलने की क्षमता रखता है।

लोकतंत्र सिर्फ चुनाव नहीं, जनता की आवाज सुनना भी है
बिहार विधान सभा अध्यक्ष ने लोकतांत्रिक व्यवस्था में लोक चिंतन की भूमिका पर भी विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र का अर्थ केवल चुनाव तक सीमित नहीं है। लोकतंत्र की वास्तविक भावना जनता की आवाज सुनने, उनकी समस्याओं को समझने और जनहित में निर्णय लेने में निहित है।
उन्होंने कहा कि भारत का लोकतंत्र इसलिए मजबूत है क्योंकि इसकी जड़ें गांव, गरीब, किसान, मजदूर, युवा, महिला और समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंची हुई हैं। संविधान ने देश को लोकतांत्रिक व्यवस्था दी है और लोकतांत्रिक संस्थाओं की जिम्मेदारी है कि वे जनता की आकांक्षाओं और अपेक्षाओं को उचित सम्मान दें।

बिहार की धरती रही है लोक चिंतन और लोकतांत्रिक चेतना की भूमि
डॉ. प्रेम कुमार ने बिहार की ऐतिहासिक विरासत का उल्लेख करते हुए कहा कि यह धरती सदियों से लोक चिंतन, लोक संस्कृति और लोकतांत्रिक चेतना की भूमि रही है। भगवान बुद्ध, भगवान महावीर, चाणक्य, सम्राट अशोक, लोकनायक जयप्रकाश नारायण और चंपारण सत्याग्रह जैसी ऐतिहासिक घटनाओं एवं व्यक्तित्वों ने समाज को नई दिशा देने का काम किया है।
उन्होंने कहा कि बिहार की पहचान केवल उसके इतिहास से नहीं, बल्कि सामाजिक परिवर्तन और जनचेतना की लंबी परंपरा से भी जुड़ी हुई है। इसी विरासत को आगे बढ़ाते हुए वर्तमान पीढ़ी को विकास और जनहित के बीच बेहतर संतुलन स्थापित करना होगा।

विकसित बिहार के लिए शिक्षा, रोजगार और कृषि पर जोर
बिहार विधान सभा अध्यक्ष ने कहा कि राज्य तेजी से विकास की दिशा में आगे बढ़ रहा है, लेकिन विकास के साथ सामाजिक न्याय, सुशासन, शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार, कृषि और पर्यावरण संरक्षण को भी प्राथमिकता देना जरूरी है।
उन्होंने कहा कि बिहार के विकास का लक्ष्य ऐसा होना चाहिए जिसमें समाज का कोई भी व्यक्ति विकास की मुख्यधारा से बाहर न रह जाए। किसानों को उनकी मेहनत का सम्मान मिले, युवाओं को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और रोजगार के अवसर मिलें, महिलाएं आत्मनिर्भर बनें, गरीब परिवारों को सम्मानजनक जीवन मिले और गांवों तक आधुनिक सुविधाएं पहुंचें।
उन्होंने कहा कि बिहार का प्रत्येक नागरिक खुद को विकसित बिहार के निर्माण में सहभागी महसूस करे, यही सामूहिक प्रयास राज्य को आगे ले जाने का रास्ता तैयार करेगा।

इतिहास से प्रेरणा लेकर भविष्य बनाने की जरूरत
डॉ. प्रेम कुमार ने कहा कि पंडित राजकुमार शुक्ल जैसे महान व्यक्तित्वों की स्मृति केवल अतीत को याद करने के लिए महत्वपूर्ण नहीं है, बल्कि यह वर्तमान और भविष्य के लिए प्रेरणा भी देती है। उन्होंने कहा कि युवा पीढ़ी को यह समझना चाहिए कि देश की स्वतंत्रता आसानी से हासिल नहीं हुई। इसके पीछे असंख्य ज्ञात-अज्ञात स्वतंत्रता सेनानियों का संघर्ष, त्याग और बलिदान रहा है।
उन्होंने राजकुमार शुक्ल के जीवन से मिलने वाली सीख का उल्लेख करते हुए कहा कि व्यक्ति छोटा हो सकता है, लेकिन उसका संकल्प कभी छोटा नहीं होना चाहिए। यदि समाज के लिए कुछ करने की दृढ़ इच्छा हो तो सामान्य व्यक्ति भी बदलाव का माध्यम बन सकता है।
‘सम्मान केवल स्मृति नहीं, संकल्प भी है’
समारोह में पंडित राजकुमार शुक्ल स्मृति सम्मान–2026 से सम्मानित होने वाली विभूतियों को डॉ. प्रेम कुमार ने शुभकामनाएं दीं। उन्होंने कहा कि किसी महान व्यक्तित्व की स्मृति में दिया जाने वाला सम्मान सिर्फ अतीत को याद करने का अवसर नहीं, बल्कि समाज और राष्ट्र के प्रति नई जिम्मेदारी का संकल्प भी है।
उन्होंने सभी से आह्वान किया कि पंडित राजकुमार शुक्ल की स्मृति में जनता की आवाज को सम्मान देने, लोकहित को सर्वोच्च प्राथमिकता देने, कमजोर वर्गों के साथ खड़े रहने और युवाओं को आगे बढ़ने के अवसर उपलब्ध कराने का संकल्प लिया जाए।
‘लोक चिंतन मजबूत होगा तो लोकतंत्र मजबूत होगा’
अपने संबोधन के दौरान डॉ. प्रेम कुमार ने कहा कि बिहार को ऐसा राज्य बनाना होगा जो विकास के साथ अपनी संस्कृति, विरासत और सामाजिक मूल्यों को भी सुरक्षित रखे। उन्होंने कहा कि बिहार ज्ञान, लोकतंत्र, संघर्ष और परिवर्तन की भूमि रहा है और इस विरासत को नई पीढ़ी तक पहुंचाना सभी की जिम्मेदारी है।
उन्होंने कहा कि लोक चिंतन मजबूत होगा तो लोकतंत्र मजबूत होगा और लोकतंत्र मजबूत होगा तो राष्ट्र मजबूत होगा। उन्होंने पंडित राजकुमार शुक्ल के संघर्ष, साहस और संकल्प को अपने जीवन में अपनाने तथा विकसित बिहार और विकसित भारत के निर्माण में योगदान देने का आह्वान किया।
कार्यक्रम में माननीय विधि मंत्री श्री संजय सिंह टाइगर सहित अन्य गणमान्य लोग उपस्थित रहे।




