भाजपा का नगर निकाय चुनाव पर धरना सत्ता-लोलुपता का तमाशा : कुणाल यादव
भारतीय जनता पार्टी द्वारा झारखंड में नगर निकाय चुनाव को बैलेट पेपर से कराने के विरोध और दलगत आधार पर चुनाव कराने की माँग को लेकर दिया जा रहा धरना लोकतंत्र के प्रति चिंता नहीं, बल्कि सत्ता के लिए बेचैनी का प्रदर्शन है। झारखंड मुक्ति मोर्चा भाजपा की इस राजनीतिक नौटंकी की घोर निंदा करता है।

भाजपा का नगर निकाय चुनाव पर धरना सत्ता-लोलुपता का तमाशा : कुणाल यादव
हजारीबाग : भारतीय जनता पार्टी द्वारा झारखंड में नगर निकाय चुनाव को बैलेट पेपर से कराने के विरोध और दलगत आधार पर चुनाव कराने की माँग को लेकर दिया जा रहा धरना लोकतंत्र के प्रति चिंता नहीं, बल्कि सत्ता के लिए बेचैनी का प्रदर्शन है। झारखंड मुक्ति मोर्चा भाजपा की इस राजनीतिक नौटंकी की घोर निंदा करता है।

झामुमो के प्रवक्ता कुणाल यादव ने तीखे शब्दों में कहा कि नगर निकाय चुनाव जनता की रोज़मर्रा की ज़िंदगी से जुड़े मुद्दों पानी, सड़क, नाली, सफ़ाई और बिजली पर प्रतिनिधि चुनने की प्रक्रिया है, न कि भाजपा के ध्रुवीकरण और राजनीतिक प्रयोगशाला का मैदान। भाजपा हर चुनाव को सांप्रदायिक ध्रुवीकरण और पार्टी-प्रोपेगैंडा का अखाड़ा बनाना चाहती है। यही वजह है कि वह स्थानीय स्वशासन की आत्मा को कुचलने पर आमादा है।
उन्होंने कहा कि बैलेट पेपर लोकतंत्र की रीढ़ है, जिसे दशकों से देश अपनाता आया है। यह सबसे भरोसेमंद और पारदर्शी व्यवस्था है। भाजपा को बैलेट से नहीं, जनता के फ़ैसले से डर लगता है। जब देश के कई हिस्सों में वही व्यवस्था उसे स्वीकार है, तो झारखंड में अचानक लोकतंत्र खतरे में कैसे आ गया ?
कुणाल यादव ने भाजपा पर सीधा आरोप लगाते हुए कहा कि भाजपा चुनावी हार की आशंका से नियम बदलवाने की साज़िश कर रही है। यह न लोकतंत्र है, न संवैधानिक मर्यादा है, यह सत्ता पाने की बेशर्मी है।
उन्होंने स्पष्ट किया कि चुनाव की प्रक्रिया तय करने का अधिकार संवैधानिक संस्थाओं और राज्य निर्वाचन आयोग को है, न कि सड़क पर ड्रामा करने वालों को। धरने की आड़ में दबाव बनाकर लोकतांत्रिक संस्थाओं को कमजोर करना भाजपा की पुरानी आदत है। झारखंड मुक्ति मोर्चा भाजपा की इस जनविरोधी राजनीति के सामने न झुकेगा, न चुप रहेगा। हम स्थानीय स्वशासन, लोकतांत्रिक मूल्यों और जनता के अधिकारों की रक्षा के लिए हर मोर्चे पर भाजपा की सत्ता-लोलुप राजनीति का विरोध करेंगे।




