बिहार के 13 आकांक्षी जिलों के पदाधिकारियों के लिए सतत विकास लक्ष्यों पर दो दिवसीय क्षमता-वर्धन कार्यशाला संपन्न
बिहार सरकार के योजना एवं विकास विभाग द्वारा यूनिसेफ (UNICEF) के तकनीकी सहयोग से बिहार के 13 आकांक्षी जिलों के पदाधिकारियों के लिए आयोजित दो दिवसीय क्षमता-वर्धन कार्यशाला आज पटना के होटल द पनाश में संपन्न हुई।

बिहार के 13 आकांक्षी जिलों के पदाधिकारियों के लिए सतत विकास लक्ष्यों पर दो दिवसीय क्षमता-वर्धन कार्यशाला संपन्न
पटना : बिहार सरकार के योजना एवं विकास विभाग द्वारा यूनिसेफ (UNICEF) के तकनीकी सहयोग से बिहार के 13 आकांक्षी जिलों के पदाधिकारियों के लिए आयोजित दो दिवसीय क्षमता-वर्धन कार्यशाला आज पटना के होटल द पनाश में संपन्न हुई। 28–29 सितंबर 2026 को आयोजित इस कार्यशाला का विषय “Accelerating SDGs: Aspirational District Action for Gender Equality through Child Rights and Social & Behaviour Change Approaches” था।
कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य आकांक्षी जिलों में लैंगिक समानता, बाल अधिकार और सामाजिक एवं व्यवहार परिवर्तन (Social & Behaviour Change–SBC) से जुड़े मुद्दों को जिला विकास की प्राथमिकताओं में शामिल करना तथा उपलब्ध आंकड़ों के आधार पर ठोस, समन्वित और परिणामोन्मुख कार्ययोजना तैयार करने के लिए जिला पदाधिकारियों की क्षमता को सुदृढ़ करना था।

दो दिवसीय कार्यशाला में आकांक्षी जिला कार्यक्रम (ADP) के प्रमुख संकेतकों और सतत विकास लक्ष्यों (SDGs) के बीच संबंधों पर विस्तार से चर्चा की गई। विशेष रूप से स्वास्थ्य एवं पोषण, शिक्षा, कृषि एवं जल संसाधन, आधारभूत संरचना, वित्तीय समावेशन और कौशल विकास जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में लैंगिक समानता एवं बाल अधिकारों से संबंधित चुनौतियों और उनके समाधान पर ध्यान केंद्रित किया गया।
कार्यशाला के दौरान इस बात पर विशेष जोर दिया गया कि लैंगिक समानता केवल किसी एक विभाग की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि इसके लिए सभी संबंधित विभागों के बीच प्रभावी समन्वय और जिला प्रशासन की सक्रिय भागीदारी आवश्यक है। महिलाओं और बच्चों के जीवन में वास्तविक बदलाव लाने के लिए योजनाओं के क्रियान्वयन के साथ-साथ उन सामाजिक मान्यताओं और व्यवहारों में परिवर्तन लाना भी जरूरी है, जो शिक्षा, स्वास्थ्य, पोषण और आर्थिक अवसरों तक उनकी पहुंच को प्रभावित करते हैं।
कार्यशाला में प्रतिभागी जिलों के पदाधिकारियों ने व्यावहारिक अभ्यास के माध्यम से अपने-अपने जिलों में लैंगिक असमानता से जुड़ी प्रमुख चुनौतियों की पहचान, उपलब्ध आंकड़ों की समीक्षा और समस्याओं के मूल कारणों का विश्लेषण किया। इस प्रक्रिया में स्थानीय आवश्यकताओं और जिला-विशिष्ट प्राथमिकताओं के अनुरूप कार्ययोजना तैयार करने पर विशेष बल दिया गया।
जिला कार्ययोजना के अंतर्गत प्राथमिकता वाले संकेतकों, संबंधित विभागों की जिम्मेदारियों, समयबद्ध लक्ष्यों, विभागीय समन्वय की व्यवस्था तथा नियमित समीक्षा की रूपरेखा पर विचार किया गया। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि कार्यशाला में प्राप्त जानकारी और अनुभव जिला स्तर पर व्यावहारिक कार्रवाई में परिवर्तित हों तथा उनकी प्रगति को मापने की स्पष्ट व्यवस्था हो।
कार्यशाला में सामाजिक एवं व्यवहार परिवर्तन के दृष्टिकोण को भी महत्वपूर्ण स्थान दिया गया। इस बात पर जोर दिया गया कि बाल विवाह, बालिकाओं की शिक्षा, महिलाओं की निर्णय लेने में भागीदारी, पोषण तथा अन्य सामाजिक मुद्दों पर स्थायी बदलाव लाने के लिए समुदायों, परिवारों और स्थानीय संस्थाओं की सहभागिता आवश्यक है।
दो दिवसीय कार्यशाला ने आकांक्षी जिलों को अपनी विकास संबंधी चुनौतियों को लैंगिक समानता और बाल अधिकारों के दृष्टिकोण से समझने तथा उनके समाधान के लिए साझा प्रयासों की दिशा में आगे बढ़ने का अवसर प्रदान किया।
कार्यशाला का प्रमुख संदेश रहा कि सतत विकास लक्ष्य-5 सहित वर्ष 2030 के विकास लक्ष्यों की प्राप्ति के लिए जिला स्तर पर आंकड़ों पर आधारित योजना, विभागों के बीच प्रभावी समन्वय, समुदाय की सक्रिय भागीदारी और नियमित समीक्षा आवश्यक है। इन प्रयासों से बिहार के आकांक्षी जिलों में महिलाओं और बच्चों के जीवन में सकारात्मक एवं स्थायी बदलाव लाने के साथ-साथ समावेशी और सतत विकास की दिशा में राज्य की प्रगति को गति दी जा सकेगी।



