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बड़कागांव और केरेडारी के विस्थापित किसानों की आवाज बनकर संसद में गूंजे सांसद मनीष जायसवाल

संसद के शीतकालीन सत्र के ग्यारहवां दिन गुरुवार को बड़कागांव और केरेडारी क्षेत्र के किसान जिन्हें विस्थापित करने का कवायद चल रहा है उनकी आवाज बनकर उनकी आजीविका और क्षेत्र की कृषि विरासत पर मंडरा रहे गहरे संकट को हजारीबाग लोकसभा क्षेत्र के सांसद मनीष जायसवाल ने सदन में ज़ोरदार ढंग से आवाज बुलंद किया।

बड़कागांव और केरेडारी के विस्थापित किसानों की आवाज बनकर संसद में गूंजे सांसद मनीष जायसवाल

उपजाऊ कृषि योग्य भूमि पर कोल ब्लॉक आवंटन का किया पुरजोर विरोध, मार्मिक तरीके से व्यक्त किया किसानों की वेदना

कहा अन्नदाता के लिए उनकी जमीन सिर्फ़ सम्पत्ति नहीं उनकी पहचान होती है और उनकी पहचान मिटना कतई जायज नहीं है

सरकार किसानों की आवाज़ सुने और कृषि विरासत की रक्षा के लिए नीतिगत पुनर्विचार करे: मनीष जायसवाल

हजारीबाग: कुंवर यादव ब्यूरो रिपोर्ट

हजारीबाग : संसद के शीतकालीन सत्र के ग्यारहवां दिन गुरुवार को बड़कागांव और केरेडारी क्षेत्र के किसान जिन्हें विस्थापित करने का कवायद चल रहा है उनकी आवाज बनकर उनकी आजीविका और क्षेत्र की कृषि विरासत पर मंडरा रहे गहरे संकट को हजारीबाग लोकसभा क्षेत्र के सांसद मनीष जायसवाल ने सदन में ज़ोरदार ढंग से आवाज बुलंद किया। अत्यंत भावुक और गंभीर शब्दों में सांसद मनीष जायसवाल ने सरकार का ध्यान बड़कागांव और केरेडारी क्षेत्र के उपजाऊ ‘तीन-फसली’ कृषि भूमि पर किए जा रहे बड़े पैमाने के कोल ब्लॉक आवंटन और अधिग्रहण की ओर आकर्षित किया।

सांसद मनीष जायसवाल जायसवाल ने विशेष रूप से बड़कागाँव (गोंदलपुरा, बादम, हरली, महूगाई, चंदौल, अंबाजीत, रतवे) और केरेडारी ब्लॉक की उन ज़मीनों का उल्लेख किया, जिन्हें कोल माइनिंग के लिए आवंटित किया गया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह सामान्य भूमि नहीं है, बल्कि तीन-फसली उपजाऊ ज़मीन है, जो न केवल स्थानीय किसानों का भरण-पोषण करती है, बल्कि पूरे हज़ारीबाग ज़िले में सब्ज़ियों की आपूर्ति का मुख्य केंद्र है।

यह इलाका अपने उच्च गुणवत्ता वाले गुड़ के लिए भी राष्ट्रीय स्तर पर विख्यात है। सांसद मनीष जायसवाल ने सदन को बताया कि किसान के लिए यह ज़मीन महज़ संपत्ति नहीं, बल्कि उसकी पहचान होती है और पहचान छीनना किसी भी नागरिक के लिए सबसे बड़ी त्रासदी है।

उन्होंने कहा कि स्थानीय किसान पिछले तीन वर्षों से शांतिपूर्ण आंदोलन कर रहे हैं लेकिन उन्हें निराशा और आक्रोश के अतिरिक्त कुछ नहीं मिला है। विकास परियोजनाओं के नाम पर किसानों को जो मिल रहा है, वह केवल वेदना, पीड़ा, क्षति, व्यथा, दुःख, रोष, संतोष, निराशा और आक्रोश
है।

सरकार से सांसद मनीष जायसवाल ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि यहां के तीन-फसली और अत्यंत उपजाऊ कृषि भूमि का अधिग्रहण कोल माइनिंग जैसी गैर-कृषि गतिविधियों के लिए तत्काल प्रभाव से रोका जाए, इस क्षेत्र में कार्यरत एनटीपीसी द्वारा किए जा रहे अधिग्रहण में मुआवजे के दामों में तत्काल वृद्धि की जाए, क्योंकि यह दरें पिछले पाँच वर्षों से नहीं बढ़ाई गई हैं। अधिग्रहण में चल रहे ‘कट-ऑफ डेट’ की मनमानी प्रणाली को जिसे उन्होंने ‘काला कानून’ बताया समाप्त किया जाए, ताकि किसानों को उनके हक से वंचित न किया जा सके।
सांसद मनीष जायसवाल ने कहा कि राष्ट्र के विकास के लिए ऊर्जा आवश्यक है, लेकिन इसकी क़ीमत अन्नदाताओं की आजीविका, पहचान और क्षेत्र के पर्यावरण को दांव पर लगाकर नहीं चुकाई जा सकती। उन्होंने कहा कि यह आवश्यक है कि सरकार किसानों की आवाज़ सुने और कृषि विरासत की रक्षा के लिए नीतिगत पुनर्विचार करे।

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