पोटका के बच्चों की “महुआ ज़ीन” अब कोलकाता के क्लाइमेट सबमिट 2026 में होगी प्रदर्शित।
पोटका और टांगराईन के बच्चों ने प्रकृति, महुआ वृक्ष और उससे जुड़े जीव-जंतुओं के साथ अपने संबंधों को कला और रचनात्मक अभिव्यक्ति के माध्यम से समझा और व्यक्त किया।

पोटका के बच्चों की “महुआ ज़ीन” अब कोलकाता के क्लाइमेट सबमिट 2026 में होगी प्रदर्शित।
अभिजीत सेन।
जमशेदपुर/ पोटका
पोटका और टांगराईन के बच्चों ने प्रकृति, महुआ वृक्ष और उससे जुड़े जीव-जंतुओं के साथ अपने संबंधों को कला और रचनात्मक अभिव्यक्ति के माध्यम से समझा और व्यक्त किया। यह पहल सामाजिक संस्था युवा (यूथ यूनिटी फॉर वॉलंटरी एक्शन) के तत्वावधान में फुल टाइम हेजहोग स्टूडियो की शैलज़ा के सहयोग से की गई।

बच्चों की बनाई ज़ीन को क्लाइमेटएड वीक इंडिया 2026 के दौरान देशभर में ऑनलाइन प्रदर्शित किया गया। अब इन्हें 3 अक्टूबर 2026 को कोलकाता में आयोजित होने वाले क्लाइमेट सबमिट ,,ClimateEd Summit,, 2026 में भी प्रदर्शित किया जाएगा।
महुआ स्थानीय जीवन, संस्कृति और जैव-विविधता का महत्वपूर्ण हिस्सा है। कार्यशालाओं में बच्चों ने महुआ और उसके आसपास के जीव-जंतुओं एवं पक्षियों के रिश्तों को जाना। पहले सत्र में उन्होंने साही (झींक) और महुआ के संबंध को कला के माध्यम से व्यक्त किया। दूसरे सत्र में हाथी और महुआ के संबंध पर काम किया। तीसरे सत्र में चमगादड़ और महुआ के संबंध पर अपनी कल्पनाएँ और अनुभव ज़ीन में दर्ज किए।
बच्चों ने फैन-फोल्ड और अकॉर्डियन, दो तरह की ज़ीन बनाईं। शुरुआती दो कार्यशालाओं में उन्होंने छोटे समूहों में काम किया। तीसरे सत्र में सबने मिलकर एक लंबी सामूहिक ज़ीन तैयार की, जिसमें उनके मन की बातें, भावनाएँ, सवाल और कल्पनाएँ शामिल हैं। कला और शिल्प के साथ खेल, कहानियाँ और कविताएँ भी कार्यशालाओं का हिस्सा रहीं।
अरबिंद कुमार तिवारी ने कहा, ‘जब बच्चे अपने आसपास की प्रकृति को अपनी नज़र से देखते और व्यक्त करते हैं, तभी जलवायु शिक्षा सार्थक बनती है।
पूरी रचनात्मक प्रक्रिया का मार्गदर्शन फुल टाइम हेजहोग स्टूडियो की शैलज़ा ने किया। कार्यशाला को सफल बनाने में युवा की कापरा मांझी और अंजना देवगम ने सक्रिय भूमिका निभाई।

