निरसा में हाईवा परिवहन व्यवस्था पर गहराता संकट:मैथन पावर लिमिटेड के रेलवे परिवर्तन से हजारों परिवारों का भविष्य अधर में धनबाद
झारखंड के निरसा क्षेत्र में हाईवा परिवहन व्यवस्था पर अभूतपूर्व संकट मंडरा रहा है, जो न केवल स्थानीय अर्थव्यवस्था की रीढ़ को तोड़ने की कगार पर है, बल्कि 50,000 से अधिक परिवारों की आजीविका को भी खतरे में डाल रहा है।

निरसा में हाईवा परिवहन व्यवस्था पर गहराता संकट:मैथन पावर लिमिटेड के रेलवे परिवर्तन से हजारों परिवारों का भविष्य अधर में धनबाद
धनबाद : झारखंड के निरसा क्षेत्र में हाईवा परिवहन व्यवस्था पर अभूतपूर्व संकट मंडरा रहा है, जो न केवल स्थानीय अर्थव्यवस्था की रीढ़ को तोड़ने की कगार पर है, बल्कि 50,000 से अधिक परिवारों की आजीविका को भी खतरे में डाल रहा है। मैथन पावर लिमिटेड (एमपीएल) द्वारा कोयला परिवहन को सड़क मार्ग से रेलवे की ओर पूरी तरह शिफ्ट करने की योजना ने क्षेत्र के हाईवा मालिकों और इससे जुड़े श्रमिकों में हड़कंप मचा दिया है। यदि समय रहते इस मुद्दे पर ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो न केवल हाईवा परिवहन व्यवस्था बल्कि निरसा की सामाजिक-आर्थिक संरचना भी चरमरा सकती है।

हाईवा व्यवस्था: निरसा की आर्थिक जीवनरेखा मैथन पावर लिमिटेड, जो 1050 मेगावाट बिजली उत्पादन करती है, की स्थापना से ही निरसा के हाईवा मालिक कोयला परिवहन का मुख्य आधार रहे हैं। वर्ष 2011 से 2021 तक, प्रतिदिन लगभग 12,000 टन कोयला हाईवा के माध्यम से एमपीएल को निर्बाध रूप से आपूर्ति की जाती थी। इस दौरान, कभी भी कोयले की कमी या परिवहन में व्यवधान की शिकायत नहीं आई। इस व्यवस्था ने न केवल स्थानीय हाईवा मालिकों को रोजगार दिया, बल्कि ड्राइवरों, हेल्परों, मिस्त्रियों, स्थानीय दुकानदारों और अन्य सहायक व्यवसायों से जुड़े हजारों परिवारों की आजीविका को भी सहारा प्रदान किया।
इस कार्य में शुरुआत में राष्ट्रीय स्तर की प्रतिष्ठित कंपनियां जैसे नरेश कुमार एंड कंपनी, आका कंपनी, एसडीजीएम, और बीके बी विजेता कंस्ट्रक्शन शामिल थीं। धीरे-धीरे स्थानीय ट्रांसपोर्टरों ने ‘सेकंड जेनरेशन’ कॉन्ट्रैक्टर्स के रूप में इन कंपनियों से काम हथियाया और एमपीएल के लिए सीधे कोयला परिवहन शुरू किया। इस बदलाव ने स्थानीय स्तर पर आर्थिक समृद्धि को बढ़ावा दिया और निरसा को एक मजबूत परिवहन हब के रूप में स्थापित किया।
हालांकि यहीं से लोकल गुंडा ,माफिया, नेता ,पुलिस प्रशासन ,का गठजोड़ तथाकथित हाईवा एसोसिएशन से जुड़े संगठन ने इसको मिलकर कमजोर किया और हाईवा मालिकों का शोषण अप्रत्याशित रूप से बढ़ गया
वर्ष 2021 में रेलवे लाइन के चालू होने के बाद स्थिति नाटकीय रूप से बदलने लगी। एमपीएल प्रबंधन ने कोयला परिवहन को रेलवे पर शिफ्ट करने की रणनीति अपनाई, जिसके तहत हाईवा की संख्या को क्रमिक रूप से कम किया जाने लगा। अब प्रबंधन की योजना पूर्ण रूप से रेलवे के माध्यम से कोयला परिवहन करने की है, जिससे हाईवा व्यवस्था लगभग समाप्त होने की कगार पर है।
यह बदलाव न केवल तकनीकी या आर्थिक निर्णय है, बल्कि इसके सामाजिक और सांस्कृतिक परिणाम भी गंभीर हैं।
निरसा क्षेत्र में कोयला खदानें और अन्य औद्योगिक इकाइयां पहले ही बंद हो चुकी हैं जो कुछ बच्चे हैं वह भी अंतिम सांस गिन रहे हैं।
ऐसे में हाईवा परिवहन ही एकमात्र ऐसा क्षेत्र बचा है, जो स्थानीय अर्थव्यवस्था को संभाले हुए है। अनुमान के अनुसार, इस व्यवस्था से प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से 50,000 से अधिक लोग जुड़े हैं, जिनमें हाईवा मालिक, ड्राइवर, मिस्त्री, और छोटे-मोटे व्यवसायी शामिल हैं। इस व्यवस्था के खत्म होने से न केवल इन परिवारों की आजीविका छिन जाएगी, बल्कि क्षेत्र में सामाजिक अस्थिरता और आर्थिक संकट भी गहरा सकता है
स्थानीय हाईवा मालिकों की सबसे बड़ी चुनौती केवल एमपीएल की नीति नहीं है, बल्कि इस व्यवसाय में बढ़ती माफिया और प्रशासनिक घुसपैठ भी है। हाल के वर्षों में, कुछ स्थानीय संगठन, माफिया तत्व, और प्रभावशाली नेता इस व्यवसाय में शामिल हो गए हैं, जिससे यह ‘लोकल ट्रांसपोर्टिंग’ का एक सीमित और दबावग्रस्त स्वरूप बनकर रह गया है।
हाल ही में एमपीएल को कोयला ले जा रही चार गाड़ियां पकड़ी गईं, लेकिन इस मामले को स्थानीय प्रशासन और माफिया तत्वों की मिलीभगत से दबा दिया गया। यह घटना इस बात का स्पष्ट संकेत है कि व्यवस्था को व्यवस्थित रूप से कमजोर करने का प्रयास किया जा रहा है।
हाईवा मालिकों का कहना है कि उनकी आवाज को लगातार दबाया जा रहा है। माफिया और प्रशासनिक तत्वों की मौजूदगी ने हाईवा मालिकों के बीच एकजुटता को भी प्रभावित किया है। जहां एक ओर एमपीएल प्रबंधन रेलवे शिफ्ट की नीति को लागू कर रहा है, वहीं दूसरी ओर स्थानीय स्तर पर भ्रष्टाचार और गुंडागर्दी इस व्यवसाय को और कमजोर कर रही है।
हाईवा व्यवस्था के समाप्त होने का असर केवल रोजगार तक सीमित नहीं रहेगा। निरसा क्षेत्र में छोटे-मोटे व्यवसाय, जैसे चाय की दुकानें, मरम्मत की दुकानें, और स्थानीय बाजार, इस व्यवस्था पर निर्भर हैं। इसके बंद होने से इन व्यवसायों पर भी गहरा असर पड़ेगा। इसके अलावा, बेरोजगारी और आर्थिक तंगी से सामाजिक अस्थिरता, अपराध, और पलायन जैसे मुद्दे भी बढ़ सकते हैं। यदि यह व्यवस्था खत्म होती है, तो निरसा क्षेत्र की पहचान और आर्थिक चमक हमेशा के लिए मिट सकती है।
निरसा के लगभग 400 हाईवा मालिक इस समय निराश और असंगठित हैं। माफिया तत्वों और प्रशासनिक दबाव के कारण उनकी एकजुटता कमजोर पड़ रही है।
निरसा के हाईवा मालिकों और ट्रांसपोर्ट यूनियनों से अपील है कि वे इस संकट को गंभीरता से लें और तत्काल एकजुट होकर कार्रवाई करें। यह केवल हाईवा मालिकों का नहीं, बल्कि पूरे निरसा क्षेत्र का मुद्दा है। यदि यह व्यवस्था समाप्त होती है, तो क्षेत्र की आर्थिक और सामाजिक संरचना पर दीर्घकालिक नकारात्मक प्रभाव पड़ेगा। साथ ही, स्थानीय नेताओं, सामाजिक संगठनों, और मीडिया से अनुरोध है कि वे इस मुद्दे को राज्य और राष्ट्रीय स्तर पर उठाएं और हाईवा मालिकों की आवाज को बुलंद करें।



