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तीन सांसदों को सौंपा गया ज्ञापन, अब पहल का इंतजार; रेलवे मुद्दों पर राजेश सिन्हा ने उठाए सवाल l

गिरिडीह जिले में रेलवे सुविधाओं की बदहाल स्थिति को लेकर सामाजिक संगठनों और स्थानीय लोगों की आवाज लगातार बुलंद हो रही है।

तीन सांसदों को सौंपा गया ज्ञापन, अब पहल का इंतजार; रेलवे मुद्दों पर राजेश सिन्हा ने उठाए सवाल

गिरिडीह, मनोज कुमार।

गिरिडीह : जिले में रेलवे सुविधाओं की बदहाल स्थिति को लेकर सामाजिक संगठनों और स्थानीय लोगों की आवाज लगातार बुलंद हो रही है। हाल के दिनों में सलैया संघर्ष मोर्चा के बैनर तले सलैया रेलवे स्टेशन पर साप्ताहिक बैठकें शुरू की गई हैं, जिसका असर अब दिखाई देने लगा है। सामाजिक कार्यकर्ता राजेश सिन्हा ने रेलवे की उदासीनता और जनप्रतिनिधियों की निष्क्रियता पर सवाल उठाते हुए कहा कि आखिर इतने वर्षों बाद भी रेलवे समस्याओं के समाधान की दिशा में ठोस पहल क्यों नहीं हुई।

उन्होंने कहा कि हाल ही में कोडरमा सांसद अन्नपूर्णा देवी, गिरिडीह सांसद चंद्र प्रकाश चौधरी एवं राज्यसभा सांसद डॉ. सरफराज अहमद को रेलवे से जुड़ी लंबित मांगों को लेकर ज्ञापन सौंपा गया है। लेकिन अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि ज्ञापन सौंपने के बाद धरातल पर क्या पहल होगी। उन्होंने कहा कि सिर्फ ज्ञापन देकर फोटो प्रकाशित हो जाना पर्याप्त नहीं है, जनता अब परिणाम देखना चाहती है।

राजेश सिन्हा ने कहा कि सलैया संघर्ष मोर्चा की पहली बैठक के बाद रेलवे के इंटेलिजेंस विभाग के अधिकारियों ने मामले को गंभीरता से लिया और उनकी रिपोर्टिंग के बाद धनबाद डीआरएम ने मोर्चा के ट्वीट का जवाब भी दिया। हालांकि उन्होंने कहा कि डीआरएम द्वारा यह कहना हे कि राज्य सरकार एनओसी देगी तब कार्य होगा या राज्य सरकार चाहे तो खुद बनाए, यह सिर्फ जिम्मेदारी टालने जैसा है।
उन्होंने कहा कि दशकों से रेलवे सुविधाएं उपेक्षित हैं। कोलकाता और पटना जाने के लिए जो एक-एक बोगी उपलब्ध थी, उसे भी हटा लिया गया। वहीं 2019 में शिलान्यास हुए पारसनाथ वाया सलैया-न्यू गिरिडीह रेलखंड का कार्य आज तक ठप पड़ा है। ऐसे में जनता में आक्रोश स्वाभाविक है।

इधर सलैया संघर्ष मोर्चा के शिष्टमंडल ने तीनों सांसदों को सौंपे आवेदन में सलैया स्टेशन पर आसनसोल-हटिया इंटरसिटी एवं गोड्डा-दिल्ली एक्सप्रेस जैसी ट्रेनों के ठहराव, नई ट्रेन सेवा शुरू करने तथा रेल कनेक्टिविटी मजबूत करने की मांग उठाई।

प्रतिनिधिमंडल की ओर से गौतम सोनी ने कहा कि सलैया स्टेशन का मासिक राजस्व लगभग 13 लाख रुपये है, जबकि न्यू गिरिडीह स्टेशन का राजस्व लगभग 6 लाख रुपये है। इसके बावजूद सलैया स्टेशन को अपेक्षित सुविधाएं नहीं मिल रही हैं। उन्होंने सियालदह-आसनसोल ट्रेन को गिरिडीह या न्यू गिरिडीह तक विस्तारित करने की मांग की।

अमित छापरिया ने बैद्यनाथ धाम-पारसनाथ धार्मिक कॉरिडोर विकसित करने तथा लंबित रेलखंड निर्माण कार्य जल्द शुरू कराने की मांग उठाई। मिथिलेश पांडे ने इंटरसिटी ट्रेनों में अतिरिक्त एवं आरक्षित बोगी जोड़ने की मांग रखी।
श्रीकांत सिंह ने कहा कि गिरिडीह के लोग आज भी इलाज, एम्स और एयरपोर्ट जैसी सुविधाओं के लिए देवघर पर निर्भर हैं। सावन को देखते हुए शिवभक्तों के लिए विशेष मेमू ट्रेन चलाने की मांग की गई।

तुलसी राणा ने कहा कि गिरिडीह शिक्षा हब के रूप में विकसित हो रहा है, ऐसे में छात्रों की सुविधा के लिए एक्सप्रेस एवं इंटरसिटी ट्रेनों का ठहराव जरूरी है।

वहीं संतोष पांडे ने कहा कि यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि जिले में तीन सांसद और तीन रेलवे स्टेशन होने के बावजूद आज तक कोलकाता और पटना के लिए सीधी ट्रेन सेवा उपलब्ध नहीं हो सकी है।
प्रतिनिधिमंडल ने चेतावनी दी कि यदि मांगों पर शीघ्र सकारात्मक पहल नहीं हुई तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा।

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